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Monsoon In India: इस बार कम होगी बारिश, जानें मॉनसून के कमजोर होने के पीछे IMD ने क्या बताई वजह

Monsoon In India: दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे भारत में गर्मी ने अप्रैल की शुरुआत से ही अपना तीखा रूप दिखाना शुरू कर दिया है. ऐसे में लोगों की निगाहें अब बारिश और राहत की उम्मीद पर टिकी हैं. इसी बीच India Meteorological Department (IMD) ने मॉनसून-2026 को लेकर जो शुरुआती पूर्वानुमान जारी किया है, वह कुछ हद तक चिंता बढ़ाने वाला है. 

समय से पहले तेज हुई गर्मी

इस साल मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में ही तापमान तेजी से बढ़ गया है. दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई हिस्सों में लू जैसी स्थिति बनने लगी है. इससे साफ है कि गर्मी का सीजन इस बार लंबा और अधिक तीव्र हो सकता है.

मॉनसून 2026: क्या कहता है पूर्वानुमान?

IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून “सामान्य से थोड़ा कमजोर” रह सकता है. जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA) का लगभग 92 फीसदी रहने का अनुमान है.  आईएमडी की परिभाषा के अनुसार 96 प्रतिशत से 104 फीसदी तक की बारिश को सामान्य माना जाता है, इसलिए 92 फीसदी का स्तर 'सामान्य से कम' श्रेणी में आता है.

‘अल नीनो’ का असर

कम बारिश के पीछे सबसे बड़ा कारण El Niño को माना जा रहा है. यह प्रशांत महासागर में बनने वाली एक जलवायु घटना है, जो भारत के मॉनसून को कमजोर कर देती है. जब अल नीनो सक्रिय होता है, तो भारत में बादल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और वर्षा कम हो जाती है.

किन क्षेत्रों में कैसी रहेगी बारिश?

IMD के मुताबिक, पूरे देश में स्थिति एक जैसी नहीं होगी:

-कम बारिश की संभावना: मध्य भारत, पूर्वी भारत और कुछ अन्य हिस्सों में

सामान्य या अधिक बारिश: उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में

यह असमान वितरण खेती और जल संसाधनों के लिए चुनौती बन सकता है.

कृषि पर संभावित प्रभाव

भारत की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, और मॉनसून इसका आधार है. अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, सोयाबीन पर असर पड़ेगा. वहीं सिंचाई पर निर्भरता बढ़ेगी
खाद्यान्न उत्पादन में कमी आ सकती है.  दरअसल इससे महंगाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है.

IOD से मिल सकती है थोड़ी राहत

हालांकि, IMD ने उम्मीद जताई है कि हिंद महासागर में Indian Ocean Dipole (IOD) का पॉजिटिव फेज बन सकता है. यह स्थिति मॉनसून को कुछ हद तक मजबूत कर सकती है और अल नीनो के असर को आंशिक रूप से संतुलित कर सकती है. 

यह केवल पहला पूर्वानुमान है. IMD मई 2026 के अंत में दूसरा और अधिक विस्तृत पूर्वानुमान जारी करेगा, जिसमें क्षेत्रवार बारिश की स्पष्ट जानकारी मिलेगी. मॉनसून-2026 का शुरुआती संकेत यह दर्शाता है कि इस साल बारिश थोड़ी कम हो सकती है, जिससे गर्मी और सूखे जैसी स्थितियां बढ़ सकती हैं. हालांकि, IOD जैसे कारक कुछ राहत दे सकते हैं. ऐसे में सरकार, किसानों और आम लोगों को पहले से तैयारी करनी होगी ताकि संभावित चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके.

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सिर्फ थकान नहीं, न्यूरोलॉजिकल समस्या की निशानी भी हो सकती है जम्हाई, न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। अक्सर लोग जम्हाई को एक सामान्य आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। सुबह उठते समय, काम के बीच या खाली बैठे हुए अगर जम्हाई आ जाए तो इसे नींद की कमी या थकान से जोड़ दिया जाता है, लेकिन हाल के वैज्ञानिक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कई बार जम्हाई लेना शरीर के भीतर चल रही गड़बड़ियों का संकेत भी हो सकता है, इसलिए इस पर ध्यान देना जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जम्हाई लेना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो दिमाग और शरीर के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती है, लेकिन जब यह प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा होने लगे, तो यह संकेत है कि शरीर के कुछ सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बार-बार जम्हाई आने का संबंध दिमाग की कार्यप्रणाली से जुड़ा हो सकता है। कुछ मामलों में यह मिर्गी या स्ट्रोक जैसे न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। इन स्थितियों में दिमाग के कुछ हिस्सों की गतिविधि प्रभावित होती है, जिससे शरीर में असामान्य प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। उदाहरण के तौर पर जब दिमाग का कोई हिस्सा असंतुलित तरीके से सक्रिय हो जाता है, तो व्यक्ति को बार-बार जम्हाई आने लगती है। इसलिए अगर जम्हाई के साथ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

इसके अलावा, जम्हाई का संबंध शरीर के ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से भी होता है। यह तंत्र दिल की धड़कन, रक्तचाप और पाचन जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। जब इस सिस्टम में असंतुलन होता है, तो शरीर की प्रतिक्रिया भी बदलने लगती है और इसका असर जम्हाई के रूप में दिख सकता है। कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि जम्हाई लेते समय शरीर में नसों के संकेत बदलते हैं और एक खास प्रकार का तंत्र ज्यादा सक्रिय हो जाता है, जिससे शरीर थोड़ी देर के लिए आराम की स्थिति में चला जाता है।

हालांकि हर बार जम्हाई आना किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार यह केवल नींद की कमी, ज्यादा काम, मानसिक तनाव या थकावट के कारण भी हो सकता है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहे और बिना किसी कारण के बार-बार जम्हाई आने लगे, तो सावधान हो जाना चाहिए। खासतौर पर जब इसके साथ चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी या सोचने-समझने में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह शरीर का चेतावनी संकेत हो सकता है।

--आईएएनएस

पीके/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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