रियासत से जिला बनने तक धौलपुर की अनोखी कहानी: 15 अप्रैल 1982 को बना राजस्थान का 27वां जिला, जानिए पूरा इतिहास
Dholpur Hindi News: राजस्थान का धौलपुर एक समय में एक रियासत के रूप में जाना जाता था, जिसने समय के साथ विकास की नई राह पकड़ी. 15 अप्रैल 1982 को धौलपुर को आधिकारिक रूप से राजस्थान का 27वां जिला घोषित किया गया, जो इसके इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था. रियासत काल में यह क्षेत्र अपने सांस्कृतिक वैभव और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध था. स्वतंत्रता के बाद राज्य पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत इसे आधुनिक प्रशासनिक ढांचे में शामिल किया गया. जिला बनने के बाद यहां विकास कार्यों को गति मिली, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं में सुधार हुआ. धौलपुर की यह यात्रा न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती है, बल्कि यह दर्शाती है कि किस तरह एक रियासत समय के साथ बदलकर एक संगठित और विकसित जिले के रूप में उभर सकती है.
Video: लिखो और उगाओ! रद्दी से बनी पेन-पेंसिल उगाएगी टमाटर-मिर्च, ऋषभ के स्टार्टअप की देश में धूम
Success Story: अक्सर इस्तेमाल के बाद हम पेन और पेंसिल को कचरा समझकर फेंक देते हैं, लेकिन पटना के एक युवा उद्यमी ने इस कचरे को हरियाली में बदल दिया है. ऋषभ और उनकी कंपनी ओरिजिंस ट्राइब ने ऐसी ईको-फ्रेंडली पेन-पेंसिल तैयार की है. जिसे इस्तेमाल के बाद मिट्टी में दबाने पर सब्जियां और फूल उगते हैं. इन पेन और पेंसिल के पिछले हिस्से में टमाटर, मिर्च, धनिया और फूलों के बीज लगे होते हैं. चूंकि ये रद्दी कागज को रिसाइकिल करके बनाई गई हैं, इसलिए मिट्टी में जाते ही कागज गल जाता है. बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाते हैं. मात्र 10 से 15 रुपये की कीमत वाली यह कलम प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक बड़ा हथियार साबित हो रही है. तीन साल पहले शुरू हुआ यह स्टार्टअप आज सफलता की ऊंचाइयों पर है. कंपनी सिर्फ पेन ही नहीं, बल्कि बांस की बोतलें, नीम की कंघी और टूथब्रश जैसे उत्पाद भी बना रही है. बिहार सरकार के विभागों से लेकर देशभर के कॉरपोरेट जगत तक इनके उत्पादों की भारी मांग है. आज ऋषभ की यह कंपनी डेढ़ करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर कर रही है.
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