Ajmer Jail के Warden सद्दाम हुसैन निलंबित, कैदियों के Video Call पर एक्शन
जयपुर, आठ अगस्त अजमेर केंद्रीय जेल के एक कारापाल (जेल वार्डन) को बंदियों के साथ निषिद्ध सामग्री के उपयोग और जेल के बाहर के व्यक्तियों से संपर्क रखने के आरोप में निलंबित किया गया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि केंद्रीय कारागृह अजमेर में पदस्थापित कारापाल सद्दाम हुसैन को निलंबित किया गया है।
पुलिस महानिदेशक (कारागार) अशोक राठौड़ ने राजस्थान सिविल सेवाएं नियम, 1958 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निलंबन आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, उक्त आरोपों के संबंध में विभागीय जांच प्रस्तावित है। इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई के तहत केंद्रीय कारागृह अजमेर में निरुद्ध बंदी सैयद तौसीफ चिश्ती को केंद्रीय कारागृह भरतपुर स्थानांतरित किया गया है।
वहीं, प्रकरण के संबंध में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। उल्लेखनीय है कि यह कार्रवाई एक कथित वीडियो सामने आने के बाद की गई है जिसमें कैदी जेल के अंदर से बाहर मौजूद एक व्यक्ति से वीडियो कॉल पर बात करते हुए दिख रहे हैं। कथित वीडियो में तीन कैदी जेल वार्डन सद्दाम हुसैन के कार्यालय में मोबाइल फोन के ज़रिए नफीस चिश्ती से बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
नफीस चिश्ती को 1990 के दशक की शुरुआत में हुए चर्चित अजमेर सेक्स स्कैंडल मामले में पॉक्सो अदालत ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। हालांकि, पिछले साल उच्च न्यायालय ने सजा पर रोक लगा दी थी और उसे व तीन अन्य दोषियों को जमानत दे दी थी। वीडियो के अनुसार, कैदी तारिक चिश्ती, उसका बेटा तौसीफ चिश्ती (उर्फ चिंकी) और भतीजा फखर जमाली जेल वार्डन द्वारा कथित तौर पर किए गए वीडियो कॉल पर नफीस चिश्ती से बात करते हुए दिखे।
इन तीनों को 2014 में एक व्यक्ति पर हमले के मामले में 2025 में सात-सात साल की सज़ा सुनाई गई थी।
Tarun Tejpal की बेटी Kara ने पिता को बताया निर्दोष, तहलका की पत्रकारिता से जोड़ा मामला
पणजी, आठ अगस्त तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की बेटी कारा तेजपाल शनिवार को उनके बचाव में सामने आईं। कारा ने मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने को उनकी खोजी पत्रकारिता से जोड़ा और कहा कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि उन्हें बलात्कार का समर्थन करने वाली या बलात्कारी की बेटी कहा जाए। कारा ने कहा कि उन्होंने 13 साल तक इस मामले में पेश किए गए साक्ष्यों का अध्ययन किया है और वह इस निष्कर्ष पर पहुंची हैं कि उनके पिता निर्दोष हैं।
उन्होंने एक बयान में कहा, जब मेरे पिता को गिरफ्तार किया गया था, तब मैं 23 साल की थी। जब उन्हें बरी किया गया, तब मेरी उम्र 31 वर्ष थी और आज 36 साल की उम्र में मैं उनके साथ खड़ी हूं, क्योंकि मुंबई उच्च न्यायालय ने गोवा सरकार की ओर से स्वत: दर्ज की गई दुष्कर्म की एक झूठी शिकायत के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया है। उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तेजपाल को 2013 में अपनी एक कनिष्ठ सहयोगी के साथ बलात्कार का दोषी ठहराया और निचली अदालत के 2021 के बरी करने के फैसले को पलट दिया।
यह फैसला गोवा सरकार की ओर से उनके बरी होने के खिलाफ दायर अपील पर आया। कारा ने कहा कि जब उनके पिता को गिरफ्तार किया गया था, तब वह सच बोलने से डरी हुई थीं और मामले से जुड़ी मीडिया कवरेज का उन पर गहरा असर पड़ा था। उन्होंने कहा कि अब वह अपने पिता का समर्थन करने के कारण होने वाली आलोचना के बावजूद चुप नहीं रहेंगी।
उन्होंने कहा, मैं अब वह 23 साल की लड़की नहीं हूं। मैं 36 साल की हूं और मुझे इस बात की बिल्कुल परवाह नहीं है कि मुझे ‘बलात्कार का समर्थन करने वाली’, ‘बलात्कारी की बेटी’ या किसी अन्य अपमानजनक शब्द से बुलाया जाए। कारा ने इस मामले को तहलका की खोजी पत्रकारिता, भ्रष्टाचार पर पत्रिका की रिपोर्ट से जुड़े विवादों और सत्ता में बैठे लोगों के कथित गलत कामों से जोड़ने की भी कोशिश की।
उन्होंने दावा किया कि तहलका के काम के कारण उनके पिता को निशाना बनाया गया और बलात्कार का आरोप उन्हें चुप कराने के लिए इस्तेमाल किया गया। तेजपाल को नवंबर 2013 में गोवा में तहलका पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में अपनी कनिष्ठ सहकर्मी का यौन उत्पीड़न करने के आरोपों के बाद गिरफ्तार किया गया था।
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