West Bengal सरकार 325 लोगों को देगी Emergency सम्मान, सीएम करेंगे शुरुआत
कोलकाता, आठ अगस्त पश्चिम बंगाल सरकार रविवार को उन 325 लोगों को पहली बार ‘पश्चिमबंग लोकतंत्र सेनानी सम्मान’ प्रदान करेगी, जिन्हें 1975 में आपातकाल के दौरान विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण जेल भेजा गया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक आपातकाल लागू रहा।
21 महीने की इस अवधि में मीडिया पर प्रतिबंध, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां, नागरिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश और प्रशासनिक शक्तियों के अधिक केंद्रीकरण जैसी घटनाएं हुईं। ये मुद्दे आज भी राजनीतिक बहस का विषय बने हुए हैं। जहां केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाती है, वहीं कई राज्य, खासकर भाजपा शासित, आपातकाल के दौरान जेल भेजे गए लोगों को पुरस्कार और पेंशन देकर सम्मानित करते हैं।
इस साल विधानसभा चुनाव में भाजपा पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई है। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी नौ अगस्त को राज्य सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में ‘पश्चिमबंग लोकतंत्र सेनानी सम्मान’ प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि सम्मान पाने वालों में लगभग सभी जिलों के वे लोग शामिल हैं, जिन्हें आपातकाल के दौरान आंदोलनों में भाग लेने के कारण जेल में रखा गया था।
Ajmer Jail के Warden सद्दाम हुसैन निलंबित, कैदियों के Video Call पर एक्शन
जयपुर, आठ अगस्त अजमेर केंद्रीय जेल के एक कारापाल (जेल वार्डन) को बंदियों के साथ निषिद्ध सामग्री के उपयोग और जेल के बाहर के व्यक्तियों से संपर्क रखने के आरोप में निलंबित किया गया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि केंद्रीय कारागृह अजमेर में पदस्थापित कारापाल सद्दाम हुसैन को निलंबित किया गया है।
पुलिस महानिदेशक (कारागार) अशोक राठौड़ ने राजस्थान सिविल सेवाएं नियम, 1958 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निलंबन आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, उक्त आरोपों के संबंध में विभागीय जांच प्रस्तावित है। इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई के तहत केंद्रीय कारागृह अजमेर में निरुद्ध बंदी सैयद तौसीफ चिश्ती को केंद्रीय कारागृह भरतपुर स्थानांतरित किया गया है।
वहीं, प्रकरण के संबंध में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। उल्लेखनीय है कि यह कार्रवाई एक कथित वीडियो सामने आने के बाद की गई है जिसमें कैदी जेल के अंदर से बाहर मौजूद एक व्यक्ति से वीडियो कॉल पर बात करते हुए दिख रहे हैं। कथित वीडियो में तीन कैदी जेल वार्डन सद्दाम हुसैन के कार्यालय में मोबाइल फोन के ज़रिए नफीस चिश्ती से बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
नफीस चिश्ती को 1990 के दशक की शुरुआत में हुए चर्चित अजमेर सेक्स स्कैंडल मामले में पॉक्सो अदालत ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। हालांकि, पिछले साल उच्च न्यायालय ने सजा पर रोक लगा दी थी और उसे व तीन अन्य दोषियों को जमानत दे दी थी। वीडियो के अनुसार, कैदी तारिक चिश्ती, उसका बेटा तौसीफ चिश्ती (उर्फ चिंकी) और भतीजा फखर जमाली जेल वार्डन द्वारा कथित तौर पर किए गए वीडियो कॉल पर नफीस चिश्ती से बात करते हुए दिखे।
इन तीनों को 2014 में एक व्यक्ति पर हमले के मामले में 2025 में सात-सात साल की सज़ा सुनाई गई थी।
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