भारत-फ्रांस वार्ता के लिए पेरिस पहुंचे विदेश सचिव विक्रम मिस्री, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
पेरिस, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री रविवार को भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय वार्ता में शामिल होने के लिए पेरिस पहुंचे।
फ्रांस में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में बताया, विदेश सचिव विक्रम मिस्री भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय वार्ता के लिए पेरिस पहुंचे हैं। यह दौरा फरवरी 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के बाद हो रहा है। यह भारत और यूरोप के बीच लगातार हो रहे उच्च-स्तरीय संपर्कों को दिखाता है।”
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मिस्री फ्रांस के विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी जनरल मार्टिन ब्रिएंस के साथ मिलकर इस बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। इसमें रक्षा, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, अंतरिक्ष, साइबर और डिजिटल क्षेत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इनोवेशन और लोगों के बीच आपसी संपर्क और सांस्कृतिक रिश्तों जैसे कई मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही, दोनों देश वैश्विक और क्षेत्रीय हालात पर भी बात करेंगे।
फ्रांस में अपने दौरे के दौरान मिस्री कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य लोगों से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह जर्मनी जाएंगे, जहां वह जर्मन विदेश मंत्रालय के स्टेट सेक्रेटरी गेजा एंड्रियास वॉन गेर के साथ विदेश कार्यालय वार्ता की सह-अध्यक्षता करेंगे।
एमईए के बयान में कहा गया है, “यह दौरा जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 2026 की शुरुआत में भारत दौरे के बाद हो रहा है। यह भारत और यूरोप के बीच नियमित उच्च-स्तरीय बातचीत का हिस्सा है। इससे दोनों देशों के साथ भारत के रिश्तों की पूरी तस्वीर की समीक्षा करने और अहम क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा।”
फरवरी में मैक्रों के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने भारत-फ्रांस रिश्तों को स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया था।
दोनों नेताओं ने रक्षा, तकनीक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा रोडमैप भी पेश किया, जो ‘होराइजन 2047’ विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।
इस दौरे के दौरान रक्षा उत्पादन में भी अहम प्रगति हुई, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के साथ जुड़ी है। कर्नाटक के वेमागल में भारत की पहली निजी हेलीकॉप्टर फाइनल असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन किया गया।
इस संयुक्त परियोजना के तहत एच125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर बनाए जाएंगे, जिनका पहला ‘मेड इन इंडिया’ मॉडल 2027 तक आने की उम्मीद है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और फ्रांस की कंपनी सैफ्रान के बीच हैमर प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइल भारत में बनाने के लिए समझौता हुआ है।
साथ ही, दोनों नेताओं ने ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ की भी शुरुआत की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस रिश्ते को एक अनिश्चित दुनिया में “वैश्विक स्थिरता की ताकत” बताया।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बातचीत भले ही बेनतीजा रही, अब अमेरिका हमले तेज नहीं करेगा : रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी खींचतान ने हालात को नाजुक बना दिया है। रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने कहा कि जहां तक मेरा मानना है कि बातचीत का भले ही कोई हल न निकला हो, लेकिन अमेरिका अब हमले तेज नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि ट्रंप इस समय काफी ज्यादा मुसीबत में हैं। वो जबरदस्त राजनीतिक तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं। ट्रंप को पता है कि नवंबर में चुनाव होने वाले हैं। अमेरिका की जनता हो या फिर रिपब्लिक पार्टी, ट्रंप पर दबाव बनाए हुए हैं। उनको पता है इस बार उनको जबरदस्त हार का सामना करना होगा। ट्रंप के ऊपर इकोनॉमिक दवाब भी बहुत ज्यादा है। युद्ध से पहले फरवरी महीने में महंगाई 0.9 प्रतिशत थी। अब हालत ये हो गए हैं कि महंगाई की स्थिति 3.3 प्रतिशत हो गई है। ग्रोसरी की कीमतों में जबरदस्त उछाल है। ऐसे में वहां के लोगों में गुस्सा भरा हुआ है। वहीं दूसरी ओर युद्ध में ट्रंप के ट्रूप्स ऑन ग्राउंड उतारने के फैसले के खिलाफ अमेरिका के 93 प्रतिशत लोग हैं। उनके कमांडर भी इस बात के खिलाफ हैं क्योंकि वह जानते हैं कि उस हालात में बड़े पैमाने पर बॉडी बैग्स वापस आएंगे।
सहगल ने कहा कि देखा जाए तो दोनों ही देशों के टीम लीडर डिसीजन मेकर्स थे। इसके बावजूद बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। इसका मतलब साफ है, वार्ता के दौरान मुद्दे बहुत ही ज्यादा गंभीर थे और दोनों ही लीडर अपने देश के हित को कायम रखना चाहते थे। लगभग सभी को उम्मीद थी कि इतने गंभीर मसले का हल 21 घंटे की एक बैठक में होना नामुमकिन था। इस मसले का हल ऐसी कई दौर की बैठकों के बाद ही निकाला जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि दोनों ही पक्ष कई बिंदुओं पर एकमत नहीं हो पाए। एक तरफ अमेरिका का मत साफ था कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रखेगा और न ही ऐसे किसी भी संसाधन का इस्तेमाल करेगा, जो परमाणु हथियार बनाने में सहायक हो सकते हैं। दूसरा गंभीर मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का है और तीसरा लेबनान-हिज्बुल्लाह का मुद्दा। ईरान चाहता था कि सीजफायर में लेबनान-हिज्बुल्लाह भी शामिल हों, जबकि अमेरिका और इजरायल इस बात को मानने से इनकार कर रहे हैं। वहीं पाकिस्तान भी इस बात पर सहमत था कि लेबनान सीजफायर की शर्तों में शामिल था। ईरान भी तीन बातों पर अड़ा हुआ है। परमाणु हथियार के मसले पर ईरान ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। दूसरा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, इस पर भी ईरान का मत साफ है, वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को हथियारों से सुरक्षित करना चाहता है। तीसरे मुद्दे में ईरान ने कहा कि सीजफायर का कोई मतलब नहीं है, जब तक हिज्बुल्लाह को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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