बंगाल चुनाव 2026: दुर्गापुर में कीर्ति आजाद का मैथिली कार्ड, अप्पन भाषा में दरभंगा-समस्तीपुर के लोगों को साधा
Kirti Azad Maithili Speech Durgapur: दुर्गापुर पूर्व विधानसभा सीट पर प्रदीप मजूमदार के लिए सांसद कीर्ति आजाद ने मैथिली में किया प्रचार. नतून पल्ली बस्ती के बिहारी मतदाताओं के बीच जगी उम्मीद. पढ़ें पूरी खबर.
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पटना से पूर्णिया अब सिर्फ 3 घंटे दूर, एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू; इन गांवों की चमकेगी किस्मत
Patna Purnia Greenfield Expressway: बिहार में विकास रफ्तार पकड़ रहा है. अब यहां सड़कों की सूरत बदलने वाली एक बड़ी योजना जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है. पटना से पूर्णिया को जोड़ने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर समस्तीपुर जिले में हलचल तेज हो गई है. केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. जिला प्रशासन ने इस संबंध में सरकारी गजट जारी कर दिया है, जिसके बाद प्रभावित होने वाले इलाकों में सर्वे और दावों का काम आगे बढ़ रहा है. अब तक करीब 400 से ज्यादा लोगों ने जमीन से जुड़ी अपनी आपत्तियां और दावे दर्ज कराए हैं, जिनका निपटारा प्रशासन द्वारा त्वरित गति से किया जा रहा है ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए.
दो हिस्सों में बांटा काम
इस विशाल परियोजना को समस्तीपुर जिले के अंदर दो मुख्य हिस्सों यानी पैकेज में बांटा गया है. पहला पैकेज वैशाली की सीमा से शुरू होकर रोसड़ा के भिरहा तक जाएगा. इस हिस्से की कुल लंबाई लगभग 84.5 किलोमीटर होगी. इस महत्वपूर्ण खंड के निर्माण पर सरकार करीब 10083.96 करोड़ रुपये खर्च करने वाली है. वहीं, दूसरा पैकेज भिरहा से सरौंजा तक बनाया जाएगा, जिसकी लंबाई 51.835 किलोमीटर निर्धारित की गई है. इस दूसरे खंड की लागत 8564.82 करोड़ रुपये के आसपास रहने वाली है. इन दोनों ही हिस्सों के लिए बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत है, जिसमें सरकारी जमीन के साथ-साथ बड़ी मात्रा में निजी भूमि भी शामिल है.
क्या है बजट का गणित?
इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल 2236 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता जताई गई है. इसमें किसानों की निजी जमीन के अलावा वन विभाग की भूमि और सरकारी परती जमीन का भी इस्तेमाल किया जाएगा. वित्तीय व्यवस्था की बात करें तो यह एक्सप्रेसवे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल यानी हैम (HAM) के तहत बनाया जा रहा है. इसका मतलब है कि निर्माण की कुल लागत का 40 फीसदी हिस्सा सरकार देगी, जबकि बाकी 60 फीसदी राशि निर्माण करने वाली एजेंसी को खुद लगानी होगी. बाद में एजेंसी टोल वसूलकर अपनी लागत को पूरा करेगी. इस मॉडल से काम में तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि फंड की कमी की वजह से प्रोजेक्ट अटकने का डर कम रहता है.
इन गांवों की चमकेगी किस्मत
समस्तीपुर जिले के कई प्रमुख क्षेत्रों से होकर यह सड़क निकलने वाली है. इसमें मोरवा, सरायरंजन, उजियारपुर, विभूतिपुर, खानपुर और रोसड़ा जैसे महत्वपूर्ण इलाके शामिल हैं. इन क्षेत्रों में जमीन के दाम अभी से ही बढ़ने लगे हैं क्योंकि एक्सप्रेसवे के आने से भविष्य में यहां बड़े व्यावसायिक केंद्र बनने की संभावना है. प्रशासन की कोशिश है कि जल्द से जल्द जमीन मालिकों को मुआवजा देकर काम शुरू कराया जाए ताकि तय समय सीमा के अंदर इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके.
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व्यापार के खुलेंगे नए रास्ते
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं है, बल्कि यह बिहार के पूर्वी और मध्य हिस्से के लिए आर्थिक वरदान साबित होने वाला है. वर्तमान में पटना से पूर्णिया जाने में काफी समय लगता है, लेकिन इस ग्रीनफील्ड सड़क के बन जाने के बाद यह दूरी महज 3 घंटे में तय हो सकेगी. समस्तीपुर, दलसिंहसराय और रोसड़ा जैसे शहरों में इससे व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे. छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होगी. साथ ही रास्ते में पड़ने वाले इलाकों में नए होटल, अस्पताल और गोदाम बनने से स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की उम्मीद है. प्रशासन की सक्रियता बता रही है कि जल्द ही इस एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी.
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