आपकी छोटी-छोटी लापरवाही बन सकती है डायरिया का कारण, ऐसे करें बचाव
नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। डायरिया यानी दस्त एक आम बीमारी लग सकती है, लेकिन अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो यह खासकर छोटे बच्चों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। हालांकि डायरिया से बचाव कोई मुश्किल काम नहीं है। हमारी रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें बच्चों और पूरे परिवार को इस बीमारी से काफी हद तक सुरक्षित रख सकती हैं।
सबसे जरूरी है हाथों की सफाई। खाना खाने या खिलाने से पहले और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद साबुन और साफ पानी से हाथ जरूर धोने चाहिए। कई बार गंदे हाथों के जरिए कीटाणु खाने और पानी तक पहुंच जाते हैं और यही डायरिया की बड़ी वजह बनते हैं।
साफ और सुरक्षित पीने का पानी भी बेहद जरूरी है। घर में इस्तेमाल होने वाले पानी को साफ और ढककर रखे गए बर्तनों में रखना चाहिए। बच्चों को हमेशा साफ और सुरक्षित पानी ही पिलाएं। पानी को खुले बर्तन में रखने से उसमें गंदगी और कीटाणु पहुंच सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
छोटे बच्चों के लिए जन्म के बाद पहले 6 महीने तक केवल मां का दूध ही दिया जाता है। इसके बाद उम्र के हिसाब से पौष्टिक और सही पूरक आहार देना चाहिए। मां का दूध बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है और कई संक्रमणों से बचाव करता है।
घर और आसपास की साफ-सफाई पर भी ध्यान देना जरूरी है। शौच के लिए हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें और बच्चों को भी इसकी आदत डालें। नालियों और आसपास जमा गंदगी की नियमित सफाई करें, क्योंकि गंदा वातावरण बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है।
अगर बच्चे या किसी अन्य व्यक्ति को डायरिया हो जाए तो शरीर में पानी की कमी न होने दें। ऐसे समय में ओआरएस और जिंक दिया जा सकता है। इसके बाद मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ले जाएं।
--आईएएनएस
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कर्नाटक में महिला कर्माचरी को 4 महीने तक नहीं मिली एक भी छुट्टी, जहर खाकर किया सुसाइड
Karnataka News: कर्नाटक के मैसूरु से एक हैरान कर देने वाली खबर आ रही है, जहां एक महीला ने कार्यस्थल पर उत्पीड़ने से परेशान होकर कीटनाशक खाकर आत्महत्या कर ली. महिला की पहचान नागेश्वरी के रूप में हुई है. मृतका के परिवार के मुताबिक नागेश्वरी पिछले 15 दिनों से मानिसक तनाव मं थी और उसने परिजनों को बताया था कि वर्कप्लेस पर उसे परेशान किया जा रहा है.
सुसाइड नोट में सुपरवाइजर पर लगाया आरोप
नागेश्वरी एक कंपनी में प्रमोटर के तौर पर काम करती थी. उसकी नियुक्ति मार्केटिंग कंपनी के जरिए हुई थी. वहीं, पुलिस को मिले सुसाइड नोट में सामने आया कि उन्हें सीनियर अधिकारियों द्वारा उन मामलों को लेकर पेरशान और प्रताड़ित किया जा रहा था, जिनमें उसकी कोई गलती नहीं थी. इसके साथ नागेश्वरी ने यह भी आरोप लगया कि उसे करीब चार महीने लगातार सप्ताह में एक भी दिन छुट्टी नहीं दी गई. उसे इमरजेंसी लीव भी मांगी, लेकिन उसे इमरजेंसी लीव भी नहीं मिली. साथ ही बार-बार उसे नौकरी से निकाले जाने की धमकी मिली. अपने सुसाइड नोट में नागेश्वरी ने एक सुपरवाइजर पर आरोप लगाए है, जिसमें उसने कहा कि उसके साथ किए जा रहे उत्पीड़न और व्यवहार ने उसे इस कदम को उठाने के लिए मजबूर किया.
15 दिनों से मानसिक रूप से परेशान थी मृतका
मृतका के परिवार का कहना है कि लगातार मानसिक दबाव और नौकरी से निकाले जाने के बाद उसकी स्थिति और बिगड़ गई थी. नागेश्वरी की मां के मुताबिक बेटी ने उन्हें कार्यस्थल पर हो रहे उत्पीड़न के बार में बताया था और सुपरवाइजर का नाम लिया था. उन्होंने अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करते हुए कहा कि उनकी बेटी को छोटी-छोटी बातों के लिए परेशान किया जा रहा था. वह करीब 15 दिनों से मानसिक रूप से परेशान थी. अब मां की मांग है कि जिम्मेदार लोगों के लिए कार्रवाई की जाए, जिससे उनकी बेटू का न्याय मिले. वहीं, पुलिस मामले की जांच कर रही है.
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