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भारत का 'विजन 2047' नीतियों पर आधारित : विनय क्वात्रा

वाशिंगटन, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने टेक्सास में एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की यात्रा शैक्षणिक और नीतिगत विमर्श पर आधारित है।

राजदूत विनय क्वात्रा ने ये बातें ऑस्टिन इंडिया कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में अपने वर्चुअल संबोधन के दौरान कहीं। इसका आयोजन ऑस्टिन की टेक्सास यूनिवर्सिटी के मैककॉम्ब्स बिजनेस स्कूल ने किया था।

आयोजकों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के विजन 2047 या विकसित भारत की ओर बढ़ने के रास्ते पर विचार-विमर्श करने के लिए इस तरह की दूरदर्शी पहलें बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि भारत के विकास को आकार देने वाले निर्णय गहरी नीतिगत चर्चाओं पर आधारित होते हैं, जो आने वाले दशकों में देश की परिवर्तनकारी प्रगति की नींव रखते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की विकास और नवाचार यात्रा से भारत और अमेरिका दोनों को साझा लाभ मिलेंगे, और साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक तालमेल लगातार गहरा होता जा रहा है।

भारत के दीर्घकालिक विकास पथ के विषय पर आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग हितधारक एक साथ आए, ताकि वे देश के बदलते नीतिगत परिदृश्य और विकास प्राथमिकताओं की समीक्षा कर सकें।

ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्य दूत डीसी मंजूनाथ ने द ग्रोथ ट्रायंगल (विकास त्रिकोण) शीर्षक वाले एक अलग सत्र के दौरान कहा कि भारत-अमेरिका संबंध कई स्तंभों पर लगातार मजबूत हो रहे हैं, जिनमें सरकार-से-सरकार, व्यापार-से-व्यापार और लोगों-से-लोगों के बीच जुड़ाव शामिल है।

उन्होंने कहा कि ये तीनों स्तंभ द्विपक्षीय संबंधों की लगातार ऊपर की ओर बढ़ती यात्रा का आधार रहे हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत हुआ है। उप-राष्ट्रीय साझेदारियों के बढ़ते महत्व की ओर इशारा करते हुए मंजूनाथ ने भारत और टेक्सास के बीच सहयोग को व्यापक भारत-अमेरिका संबंधों का एक प्रमुख घटक बताया।

उन्होंने कहा कि इस तरह के क्षेत्रीय जुड़ाव आर्थिक जुड़ाव, नवाचार और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मंजूनाथ ने ऑस्टिन की टेक्सास यूनिवर्सिटी के नेतृत्व और संकाय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, उन्होंने टेक्सास में शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग का विस्तार करने की वाणिज्य दूतावास की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस तरह की भागीदारी संवाद को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और विकास व प्रगति के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

--आईएएनएस

डीसीएच/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अमेरिका-ईरान के बीच नहीं बनी बात, बेनतीजा रही इस्लामाबाद शांति वार्ता; वेंस बोले- 'वापस जा रहे हम'

US Iran Peace Talk in Pakistan: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता को लेकर जिस बात का डर था आखिरकार वहीं हुआ. दरअसल, इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता में अमेरिका और ईरान के बीच बात नहीं बनी. उसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वापस अमेरिका लौटने का एलान कर दिया.

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, "हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके जहां ईरानी हमारी शर्तों को मानने के लिए तैयार हों. मुझे लगता है कि हम काफी लचीले और समझौतावादी थे. राष्ट्रपति ने हमसे कहा था - आपको सद्भावना के साथ यहां आना होगा और समझौता करने के लिए हर संभव प्रयास करना होगा. हमने ऐसा किया. दुर्भाग्य से, हम कोई प्रगति नहीं कर पाए."

'ईरान को दिखानी होगी परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता'

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आगे कहा, "सीधी सी बात यह है कि हमें ईरान से यह सकारात्मक प्रतिबद्धता देखनी होगी कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे और न ही ऐसे उपकरण हासिल करेंगे, जिनसे वे जल्दी से परमाणु हथियार बना सकें. यही अमेरिकी राष्ट्रपति का मूल लक्ष्य है. इन वार्ताओं के माध्यम से हमने यही हासिल करने की कोशिश की है. उनका मौजूदा परमाणु कार्यक्रम और पहले से मौजूद संवर्धन केंद्र नष्ट कर दिए गए हैं. लेकिन सीधा सा सवाल यह है कि क्या हमें ईरानियों की ओर से परमाणु हथियार विकसित न करने की कोई ठोस प्रतिबद्धता दिख रही है, न सिर्फ अभी के लिए, न सिर्फ दो साल बाद के लिए, बल्कि दीर्घकालिक रूप से? अभी तक हमें यह प्रतिबद्धता नहीं दिखी है, लेकिन हमें उम्मीद है कि दिखेगी."


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  Sports

प्रफुल्ल की सफलता की कहानी: पिता के दृढ़ विश्वास और मैकग्रा ‘कनेक्शन’ ने निभाई अहम भूमिका

 प्रकाश हिंगे खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं लेकिन इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अपने पदार्पण मैच में ही शानदार प्रदर्शन करने वाले उनके बेटे प्रफुल्ल की उपलब्धि का जश्न मनाते समय वह अपने शब्दों के चयन और उत्साह की अभिव्यक्ति में बहुत संयम बरतते हैं। दरअसल हिंगे परिवार को यह भी नहीं पता था कि उनका बेटा सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से सोमवार को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेलेगा या नहीं।

अकाउंटेंट के पद पर काम कर चुके प्रकाश ने पीटीआई से कहा, ‘‘हमें पता था कि इम्पैक्ट प्लेयर्स की सूची में होने के कारण उसे पंजाब के खिलाफ खेलना था। हम उससे कभी नहीं पूछते कि वह खेल रहा है या नहीं। वह सोने से पहले हर दिन रात 10 बजे फोन करता है। हमारे बीच बस सामान्य बातचीत होती है जैसे खाना खाया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कल जब मैच का प्रसारण शुरू हुआ तो हमने टीवी पर देखा कि वह पदार्पण करेगा। इसलिए हम खुश थे।’’

मैच आगे बढ़ने के साथ उनकी खुशी भी बढ़ने लगी क्योंकि प्रफुल्ल ने अपने शुरुआती स्पेल में दो ओवर में छह रन देकर चार विकेट लिए और सनराइजर्स की 57 रन की जीत में अहम भूमिका निभाई। नागपुर के रहने वाले प्रकाश ने उस समय को याद किया जब उन्होंने अपने बेटे प्रफुल्ल की क्रिकेट में रुचि को देखते हुए उसे स्थानीय जिमखाना क्लब में दाखिला दिलाया था। तब वह लगभग 13 साल का था।

प्रकाश ने कहा, ‘‘मैं अपने मोहल्ले की गलियों में खेलता था। मेरे बेटे को इसमें रुचि थी, इसलिए मैंने उसे एक स्थानीय अकादमी में दाखिला दिला दिया। मैंने उसे जरूर संतुलन बनाए रखने के लिए कहा लेकिन साथ ही मैं उसे अपना रास्ता चुनने की स्वतंत्रता भी देना चाहता था।’’ एक बार जब प्रफुल्ल विदर्भ की अंडर-16 टीम में शामिल हो गए, तो फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज प्रशांत वैद्य ने प्रफुल्ल को चेन्नई स्थित एमआरएफ पेस फाउंडेशन में भेजने की सलाह दी।

प्रकाश ने कहा, ‘‘वीसीए के साथ रहे पूर्व भारतीय गेंदबाज प्रशांत वैद्य सर ने सुझाव दिया था कि प्रफुल्ल को एमआरएफ पेस अकादमी में विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेना चाहिए।’’ प्रफुल्ल को इस बीच पीठ की चोट से भी जूझना पड़ा लेकिन जल्द ही वह फिट हो गए। एमआरएफ पेस फाउंडेशन के कोच एम सेंथिलनाथन और वरुण आरोन (जो अब सनराइजर्स के गेंदबाजी कोच हैं) ने उनकी प्रतिभा को निखारा। इसके बाद उन्होंने अंडर-23 और सीनियर विदर्भ टीम के साथ भी अच्छा प्रदर्शन किया।

उनके पिता ने कहा, ‘‘मैं एमआरएफ पेस फाउंडेशन, सेंथिल सर, वरुण सर का जितना भी आभार व्यक्त करूं, वह कम होगा। अगर वह आईपीएल के इस मुकाम तक पहुंचा है, तो इसका श्रेय उन्हीं को जाता है। ग्लेन मैकग्रा ने भी प्रफुल्ल का हौसला बढ़ाया और वह हाई परफॉर्मेंस कोच से प्रशिक्षण लेने के लिए ब्रिस्बेन गया।’’ जब सेंथिलनाथन से पूछा गया कि उन्होंने पेस फाउंडेशन के साथ प्रफुल्ल के सफर की योजना कैसे बनाई, तो उन्होंने कहा, ‘‘जब वह 2023 में हमारे पास आया तो उसकी पीठ में खिंचाव की समस्या थी और हमने सबसे पहले उसी का इलाज किया। उसकी लाइन और लेंथ बहुत अच्छी है। लेकिन इसका पूरा फायदा उठाने के लिए हमें उसकी फिटनेस पर काम करने की जरूरत थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद हमने उसकी गेंदबाजी पर काम किया। यह छह महीने का कार्यक्रम था। हमने उसे 2023 के घरेलू सत्र के लिए फिट और तैयार किया। उसने अच्छा प्रदर्शन किया।’’ तमिलनाडु के इस पूर्व बल्लेबाज ने इसके लिए फाउंडेशन के कोचिंग निदेशक और ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज मैकग्रा को श्रेय दिया, जिन्होंने प्रफुल्ल की मदद की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘रणनीतिक पक्ष की बात करें तो मैकग्रा शायद दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं। उन्हें पता है कि किस लेंथ और किस लाइन पर गेंदबाजी करनी है। नई और पुरानी गेंदों का उपयोग कैसे करना है। सबसे महत्वपूर्ण बात बड़े मैच के दबाव को कैसे संभालना है। ये वो चीजें हैं जो मैकग्रा सिखाते हैं, जो निश्चित रूप से उसके लिएमददगार साबित होंगी।

Tue, 14 Apr 2026 15:00:47 +0530

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