रिपोर्ट: वैश्विक स्तर पर आतंकवाद में कमी, लेकिन पाकिस्तान ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में शीर्ष पर
वॉशिंगटन, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। दुनिया भर में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28 प्रतिशत और हमलों में करीब 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन पाकिस्तान इस प्रवृत्ति से अलग नजर आया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान 2026 के ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में शीर्ष पर पहुंच गया है, जहां पिछले वर्ष 1,139 लोगों की मौत आतंकवादी घटनाओं में हुई।
ऑनलाइन मैगजीन ‘अमेरिकन थिंकर’ के लिए लिखते हुए मोरक्को की शोधकर्ता और पत्रकार फ़ातिमा अल हाशिमी ने कहा कि पाकिस्तान में हिंसा अब सामान्य होती जा रही है, जो देश की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को दर्शाती है। यह लगातार छठा साल है जब आतंकवाद में वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि यह बढ़ोतरी एक गंभीर और लगातार जारी रहने वाले रुझान को दिखाती है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी मौतें पिछले छह वर्षों से हर साल बढ़ रही हैं और हालिया वृद्धि पिछले एक दशक की सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है।”
रिपोर्ट के अनुसार, हमलों की संख्या 2023 में 517 से बढ़कर 2024 में 1,099 हो गई, जबकि 2025 में इसमें हल्की कमी आई, लेकिन यह अब भी ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर बनी रही।
फ़ातिमा अल हाशिमी ने कहा कि घटनाएं, मौतें, घायल और बंधकों जैसे आंकड़े यह दर्शाते हैं कि पाकिस्तान में उग्रवादी हिंसा न केवल लगातार बनी हुई है, बल्कि ऐसे रूप में विकसित हो रही है जो राज्य की प्रतिक्रिया क्षमता को चुनौती देती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान हिंसा के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं, जहां 2025 में 74 प्रतिशत से अधिक हमले और 67 प्रतिशत मौतें दर्ज की गईं।
उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र लंबे समय से शासन और विकास की दृष्टि से उपेक्षित रहे हैं और आंतरिक संघर्ष का सबसे अधिक असर इन्हीं पर पड़ रहा है।
रिपोर्ट में पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी रणनीति की भी आलोचना की गई है, जिसे “मुख्य रूप से सैन्य कार्रवाई, छापेमारी और जवाबी हमलों तक सीमित” बताया गया है, जबकि उग्रवाद के खिलाफ गैर-सैन्य उपाय कमजोर या लगभग न के बराबर हैं।
फ़ातिमा अल हाशिमी ने कहा कि एक बड़ी कमजोरी विश्वसनीय और प्रमाणित आतंकवाद डेटाबेस की कमी है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति के लिए पाकिस्तान को केवल बल-आधारित रणनीति से आगे बढ़कर वैचारिक उग्रवाद, सीमा पार ठिकानों, राजनीतिक अस्थिरता और शासन से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए पुलिस और न्यायिक सुधार, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और विशेष रूप से अफगानिस्तान के साथ क्षेत्रीय कूटनीति को मजबूत करना जरूरी होगा।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
यूएई दौरे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारतीय समुदाय से की मुलाकात
अबू धाबी, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने दो दिवसीय संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दौरे की शुरुआत शनिवार को वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात के साथ की।
इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यूएई यात्रा की शुरुआत भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत के साथ की। पश्चिम एशिया संकट के बीच उनके कल्याण और सुरक्षा के लिए भारत सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। कठिन समय में स्थानीय समाज में उनके योगदान और यूएई सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग की सराहना की।”
एस जयशंकर इससे पहले मॉरीशस के दो दिवसीय दौरे को पूरा कर यूएई पहुंचे। मॉरीशस यात्रा के दौरान उन्होंने 9वें इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस में भी भाग लिया।
इस यात्रा के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और हरित गतिशीलता (ग्रीन मोबिलिटी) जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए। साथ ही भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति, विजन महासागर और ग्लोबल साउथ के प्रति प्रतिबद्धता को भी दोहराया गया।
दोनों देशों के बीच ‘स्पेशल इकोनॉमिक पैकेज 2025’ के तहत परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भारत और मॉरीशस सरकार के बीच लेटर ऑफ एक्सचेंज पर हस्ताक्षर भी हुए।
यूएई दौरे के दूसरे चरण में विदेश मंत्री वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।
इससे पहले दिन में जयशंकर ने बताया कि ईरान से 312 भारतीय मछुआरों को सुरक्षित निकालकर आर्मेनिया के रास्ते भारत लाया गया है।
उन्होंने कहा कि आर्मेनिया, ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की निकासी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इससे पहले विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि ईरान से 1,200 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें से 996 को आर्मेनिया पहुंचाया गया।
--आईएएनएस
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