नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। देश भर के नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर अब टोल टैक्स का भुगतान पूरी तरह डिजिटल हो गया है। शनिवार को एक आधिकारिक बयान में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि बीते 10 अप्रैल 2026 से सभी यूजर फीस केवल फास्टैग या यूपीआई के जरिए ही ली जा रही है। यह कदम टोल कलेक्शन सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और तेज बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इसके साथ ही बयान में कहा गया है कि हालांकि, चुनाव प्रक्रिया के चलते लागू आचार संहिता के कारण तमिलनाडु, केरल, असम, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में फिलहाल इस व्यवस्था को लागू नहीं किया गया है।
यह फैसला सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट को पूरी तरह बंद करने के लिए लिया है। इससे पहले 1 अप्रैल से ही यात्रियों को सलाह दी गई थी कि वे केवल डिजिटल माध्यम जैसे फास्टैग या यूपीआई से ही भुगतान करें। इस नई व्यवस्था का मकसद टोल कलेक्शन में पारदर्शिता बढ़ाना और वाहनों की आवाजाही को तेज करना है, जिससे लंबी कतारों से छुटकारा मिल सके।
अधिकारियों के अनुसार, पूरी तरह डिजिटल सिस्टम लागू होने से टोल प्लाजा पर वाहनों की प्रोसेसिंग तेज होगी, जिससे ट्रैफिक जाम कम होगा और यात्रियों का समय बचेगा। खासकर पीक आवर्स में ट्रैफिक का प्रवाह सुचारु रहने की उम्मीद है। इसके अलावा, कम रुकावट के कारण ईंधन की खपत भी घटेगी और वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम होगा, जिससे पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।
हालांकि, यह बदलाव कुछ यात्रियों के लिए शुरुआती दौर में असुविधा पैदा कर सकता है, खासकर उनके लिए जो डिजिटल भुगतान के लिए तैयार नहीं हैं। जिन वाहनों में वैध फास्टैग नहीं होगा या बैलेंस पर्याप्त नहीं होगा, उन्हें जुर्माना देना पड़ सकता है या टोल प्लाजा पर रोका भी जा सकता है। ऐसे में यात्रियों के पास क्यूआर कोड स्कैन कर यूपीआई के जरिए तुरंत भुगतान करने का विकल्प मौजूद रहेगा।
अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि कभी-कभी नेटवर्क की समस्या के कारण यूपीआई ट्रांजैक्शन में देरी हो सकती है। इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले अपना फास्टैग एक्टिव रखें, उसे बैंक खाते से लिंक करें और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें। साथ ही, मोबाइल में काम करने वाला यूपीआई ऐप बैकअप के तौर पर रखना भी बेहतर रहेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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ईरान, अमेरिका, इजराइल जंग में अब बता दें कि चाइना की एंट्री हो गई है और इस दावे ने पूरी दुनिया को इस वक्त चौंका दिया है, हैरान कर दिया है। बता दें कि इस्लामाबाद में बातचीत हो रही है अमेरिका और ईरान के बीच में लेकिन दूसरी तरफ की जो कहानी है वो सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली है। सीज फायर जरूर हुआ है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान अपने हाथ में हाथ रखकर चुप बैठा रहेगा। इस टाइम को ईरान अपनी सैन्य ताकत को और भी ज्यादा मजबूत करने में जुटा हुआ है। अब जो खबर सामने आई है उसके मुताबिक युद्ध विराम के बीच ईरान खुद को और भी ज्यादा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। जो खुफिया जानकारी सामने आई है उससे यह पता चला है कि चाइना अगले कुछ हफ्तों में ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है। खुफिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया, यह भी दावा किया गया है कि ईरान सीज फायर का फायदा उठाकर विदेशी दोस्तों की मदद से अपने हथियारों का जखीरा भरना चाहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हथियारों में आपको बता दें कि सीधे नहीं बल्कि किसी तीसरे देश के रास्ते ईरान तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है। योजना बनाई जा रही है और उस पर काम किया जा रहा है ताकि चीन की भूमिका बिल्कुल भी सामने ना आए। यानी ऊपर से न्यूट्रल रहने की बातचीत हो रही है और अंदर ही अंदर तैयारी कुछ और ही चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक बता दें कि बीजिंग सिस्टम को ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहा है। वे कंधे से दागे जाने वाले एंटी एयर मिसाइल सिस्टम भेजने की तैयारी कर रहा है। जिन्हें मैनपड्स कहा जाता है। ये ऐसे हथियार होते हैं जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टर के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं। यह बताया गया कि पांच हफ्तों तक चले युद्ध में ऐसे सिस्टम नीचे उड़ने वाले अमेरिकी एयरक्राफ्ट के लिए एक बड़ा खतरा भी साबित हुए थे और इसी के जरिए उन्हें टारगेट किया गया था। और अगर सीज फायर टूटता है तो यही हथियार चाइना का यही हथियार एक बार फिर अमेरिका और इजराइल के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगा। इस बीच बता दें कि एक और बड़ा दावा भी सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बताया गया कि हाल ही में जिस अमेरिकी F1-15 फाइटर जेट को मार गिराया था उसे एक हैंड हेल्ड हीट स्किंग मिसाइल से निशाना बनाया गया था। हालांकि बता दें कि यह साफ बिल्कुल भी नहीं हो पाया है। पुष्टि नहीं हो पाई है कि वो सिस्टम चीन में बना था या फिर नहीं। लेकिन अगर ऐसा साबित होता है तो यह बीजिंग की सीधी भागीदारी की ओर साफ-साफ इशारा करता है। दरअसल बता दें कि चीन और ईरान के बीच ये जो तकनीकी सहयोग है यह पहले से ही रहा है। यह नया नहीं है। सूत्रों का यह भी कहना है कि चीनी कंपनियां ईरान को ड्यूल यूज़ टेक्नोलॉजी देती रही है। जिससे ईरान जो है वो अपने हथियार और नेविगेशन सिस्टम को और भी ज्यादा बेहतर बना सके और यह बेहतर बनाता आया भी है। लेकिन अगर सीधे हथियार सिस्टम ट्रांसफर होता है तो यह मदद का एक बिल्कुल ही नया स्तर होगा। अब इस पूरे मामले का एक कूटनीतिक एंगल भी सामने आया है। दरअसल बता दें कि अगले महीने जो है बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात होने की उम्मीद है। ऐसा रिपोर्ट में दावा किया गया है।
ऐसे में यह जो रिपोर्ट सामने आई है यह उस बैठक पर भी साया डाल सकती है। वाइट हाउस ने भी यह संकेत दिया है कि हाल ही में ईरान सीज फायर बातचीत के दौरान अमेरिका और चीन के बीच में एक हाई लेवल [संगीत] बातचीत हुई थी। इंटेलिजेंस से जुड़े सूत्रों का यह मानना है कि चीन इस जंग में खुलकर कूदने का जोखिम बिल्कुल भी नहीं लहना चाहता है। उसे यह पता है कि अमेरिका और जो इजराइल है यह इसके खिलाफ होगा। सीधे टक्कर में जीतना आसान नहीं है।
इसलिए बीजिंग जो है वो एक अलग ही रणनीति पर काम कर रहा है। इस वक्त ऊपर से वो न्यूट्रल रहने की कोशिश कर रहा है और अंदर ही अंदर ईरान के साथ अपने रिश्तों को वो मजबूत कर रहा है। ईरान को यह खुलकर मदद कर रहा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि चीन जो है वो ईरान के तेल पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में वह तेहरान को बिल्कुल भी नाराज नहीं कर सकता और खुद को उसका पक्का दोस्त भी साबित चाइना करना चाहता है। हालांकि जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इसे नजरअंदाज कर दिया है। प्रवक्ता ने यह भी कहा है कि चीन ने कभी भी इस लड़ाई में किसी भी पक्ष को हथियार नहीं दिए हैं। यानी कि इस दावे पर चीन की तरफ से रिएक्शन सामने आया है। ऐसे में आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने यह कहा और यह सनसननी फैलाने की कोशिश की जा रही है।
चीन का यह भी कहना है कि वह एक जिम्मेदार देश है और लगातार इस जंग को खत्म करने और सीज फायर को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है ताकि शांति बनी रहे। लेकिन सवाल अब वही है कि अगर सब कुछ इतना ही साफ है तो फिर यह जो खुफिया रिपोर्ट्स सामने आई यह बार-बार चीन का नाम ही क्यों ले रही है? दरअसल बता दें कि तस्वीर अब जो है वह दो हिस्सों में बटती हुई साफ नजर आ रही है। एक तरफ रूस है जो ईरान को खुफिया जानकारी देकर उसकी मदद कर रहा है ताकि वो अमेरिका और इजराइल के जो क्राफ्ट्स हैं एयरक्राफ्ट्स हैं उन्हें टक्कर दे और दूसरी तरफ चीन का यह जो नाम जुड़ता हुआ नजर आ रहा है वो सैन्य क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। यह भी कहा गया। यानी यह जंग अब सिर्फ ईरान और अमेरिका और इजराइलके बीच नहीं रही है।
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