Video: एयरपोर्ट के पास लहलहाई 'तीखी' कामयाबी! बिना सरकारी मदद महिला ने बुलेट से बदली किस्मत
Bullet Chili Farming Success Story: सरकारी मदद और मुफ्त बीजों के इंतजार में बैठे रहने वालों के लिए दरभंगा एयरपोर्ट के पास कषनारायणी गांव की सुनील देवी एक प्रेरणा हैं. महज 5 कट्ठे के खेत में बुलेट वैरायटी की मिर्च उगाकर उन्होंने न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि यह भी साबित किया है कि सही तकनीक और मेहनत से तकदीर बदली जा सकती है. सुनील देवी की फसल की खासियत इसकी बुलेट रफ्तार पैदावार है. रोपाई के महज 3-4 महीने बाद ही एक पौधे से 2 से 3 किलो तक मिर्च निकलने लगती है. जुताई से लेकर मिट्टी चढ़ाने तक का वैज्ञानिक प्रबंधन और डीएपी-यूरिया के संतुलित उपयोग से वह बंपर पैदावार ले रही हैं. हालांकि सफलता की इस चमक के पीछे एक तीखा सवाल भी है. सुनील देवी कहती हैं कि मुनाफा तो हो रहा है, लेकिन आज तक सरकार से न बीज मिले और न ही प्रखंड कार्यालय से कोई तकनीकी सहायता. उनकी यह रिपोर्ट बताती है कि यदि छोटे किसानों को ब्लॉक स्तर पर पारदर्शी सरकारी मदद मिले, तो दरभंगा की यह बुलेट मिर्च पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में तीखापन ला सकती है. फिलहाल बिना किसी सब्सिडी के सुनील देवी अपनी मेहनत की फसल स्थानीय बाजारों में बेचकर परिवार का स्वावलंबन सुनिश्चित कर रही हैं.
Udaipur Khajla Sweet: उदयपुर की ये खास मिठाई देख चौंक जाएंगे! बाहर नमकीन लुक, अंदर मीठा सरप्राइज ‘ख़ाजला’
Udaipur Famous Sweets: उदयपुर की पारंपरिक मिठाइयों में ‘ख़ाजला’ एक बेहद खास और अनोखी डिश है, जो अपने अलग लुक और स्वाद के लिए जानी जाती है. देखने में यह आलू पेटिस जैसा लगता है, लेकिन अंदर से यह मावा और ड्राई फ्रूट्स की भरपूर मिठास से भरा होता है. इसे बनाने के लिए मैदे की परत तैयार कर उसमें मावा, काजू, बादाम और इलायची का मिश्रण भरा जाता है, फिर इसे हल्का तला या बेक किया जाता है. बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से नरम व मीठा ‘ख़ाजला’ हर उम्र के लोगों को पसंद आता है. खास मौकों और त्योहारों पर इसकी मांग और भी बढ़ जाती है. यह मिठाई उदयपुर की फूड कल्चर का अहम हिस्सा बन चुकी है.
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