रंगों में बसी विरासत! उदयपुर में लहरिया-बंधेज का जलवा कायम, सदियों पुरानी कला आज भी फैशन और पर्यटन की शान
Leheriya Bandhej Udaipur: उदयपुर में लहरिया और बंधेज की पारंपरिक कला आज भी अपनी चमक बनाए हुए है. सदियों पुरानी यह टाई-डाई तकनीक न केवल राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि पर्यटन का भी अहम हिस्सा बन चुकी है. यहां के कारीगर आज भी पारंपरिक तरीकों से कपड़ों को रंग-बिरंगे डिजाइनों में ढालते हैं, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. लहरिया और बंधेज की साड़ियां, दुपट्टे और ड्रेस मटेरियल खासतौर पर त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में बेहद लोकप्रिय होते हैं. आधुनिक फैशन के साथ तालमेल बिठाते हुए इस कला ने अपनी खास पहचान बनाए रखी है. यह विरासत न केवल कारीगरों की आजीविका का स्रोत है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है.
अब किसानों की बल्ले-बल्ले! आधे दाम में मिलेंगे खेती के महंगे यंत्र, ऐप से होगी आसान बुकिंग
Agriculture News : बीकानेर के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब खेती के लिए महंगे यंत्र खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए आधुनिक मशीनें आधे किराए पर मिलेंगी. खास बात यह है कि किसान मोबाइल ऐप से ही बुकिंग कर सकेंगे, जिससे खेती सस्ती, आसान और तकनीकी रूप से मजबूत बनेगी.
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