Rajasthan News: बदलने वाला है राजस्थान के विकास का नक्शा, 7 नए मेगा नोड्स होंगे तैयार, जानिए किसे होगा फायदा
Rajasthan News: राजस्थान अब औद्योगिक क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है. राज्य सरकार ने सात नए बड़े औद्योगिक नोड्स का प्रस्ताव रखा है. इनका उद्देश्य राज्य को इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित करना है. यह कदम केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत उठाया गया है. इन नोड्स के जरिए उद्योगों को बेहतर सुविधाएं और तेज शुरुआत का मौका मिलेगा.
7 नए नोड्स से बदलेगा औद्योगिक विकास
प्रस्तावित सभी सात नोड्स को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा. इनमें मजबूत ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर, अच्छी कनेक्टिविटी और आसान प्रशासनिक व्यवस्था होगी. इन परियोजनाओं को स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) के जरिए लागू किया जाएगा. इससे काम तेजी से पूरा होगा और निवेशकों को कम समय में सुविधाएं मिलेंगी. इन नोड्स का मकसद सिर्फ उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि पूरी इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम तैयार करना है.
प्लग-एंड-प्ले मॉडल से मिलेगा फायदा
इन नए औद्योगिक क्षेत्रों को प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा. इसका मतलब है कि कंपनियों को शुरुआत से सब कुछ तैयार मिलेगा. उद्योग लगाने के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया नहीं करनी होगी. इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी. यह मॉडल खासतौर पर नए निवेशकों को आकर्षित करेगा.
पहले से चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स
राजस्थान में पहले से ही दो बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है. इनमें खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना और जोधपुर-पाली-मारवाड़ क्षेत्र शामिल हैं. जोधपुर-पाली-मारवाड़ क्षेत्र में काम शुरू हो चुका है. इससे साफ है कि राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है. इन प्रोजेक्ट्स को राज्य और केंद्र सरकार मिलकर आगे बढ़ा रही हैं.
DMIC से मिलेगा बड़ा लाभ
इनमें से ज्यादातर नोड्स दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के प्रभाव क्षेत्र में आएंगे. इससे राजस्थान को लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी का बड़ा फायदा मिलेगा. बेहतर सड़क, रेल और बंदरगाह कनेक्शन से उद्योगों को काम करना आसान होगा. इसके अलावा, औद्योगिक क्लस्टर बनने से उत्पादन और सप्लाई चेन भी मजबूत होगी.
निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी
हाल ही में आयोजित राइजिंग राजस्थान 2024 समिट में निवेशकों ने राज्य में खास रुचि दिखाई. खासकर मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अच्छे संकेत मिले हैं. अधिकारियों का मानना है कि यह सकारात्मक माहौल नए नोड्स को सफल बनाने में मदद करेगा. साथ ही निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे.
अब केंद्र की मंजूरी का इंतजार
राज्य सरकार ने प्रस्ताव भेज दिया है. अब इसे केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है. अगर जल्दी स्वीकृति मिलती है, तो इन परियोजनाओं पर काम तेजी से शुरू हो जाएगा. इससे राजस्थान देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा.
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यूपीआई के 10 साल: भारत ने वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट में हासिल की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को शनिवार को 10 साल पूरे हो गए हैं और इस दौरान भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। सरकार के अनुसार, आज भारत वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जो देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल ताकत को दर्शाता है।
जनवरी 2026 में ही यूपीआई के जरिए 21.70 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपए रही। भारत में कुल रिटेल डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो इसकी लोकप्रियता और व्यापक उपयोग को दिखाती है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है। खास बात यह है कि इसे 10 साल से भी कम समय में विकसित किया गया, और इस दौरान इसमें 12,000 गुना से ज्यादा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और 4,000 गुना से अधिक वैल्यू की वृद्धि दर्ज की गई है।
यूपीआई की असली ताकत सिर्फ इसके आंकड़ों में नहीं, बल्कि इसके व्यापक उपयोग में है। आज यह सिस्टम शहरों से लेकर गांवों तक, ऑटो रिक्शा चालकों से लेकर सड़क किनारे दुकानदारों और मंडियों तक पहुंच चुका है।
एक साधारण स्मार्टफोन की मदद से कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी कोने में तुरंत पैसे भेज सकता है, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है।
भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम अब दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुका है। आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं ने इसकी व्यापकता, दक्षता और समावेशी मॉडल की सराहना की है।
यूपीआई का दायरा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रहा है। यह सिस्टम संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे देशों तक पहुंच चुका है, जिससे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन और रेमिटेंस आसान हो गए हैं।
सरकार के अनुसार, यूपीआई अब सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं रहा, बल्कि यह एक व्यापक फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है। यूपीआई लाइट छोटे और तेज भुगतान को आसान बना रहा है, वहीं यूपीआई ऑटोपे के जरिए बिजली बिल और सब्सक्रिप्शन जैसे नियमित भुगतान ऑटोमैटिक हो गए हैं।
इसके अलावा, यूपीआई के जरिए क्रेडिट सुविधाएं भी बढ़ी हैं, जहां एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियां प्री-अप्रूव्ड लोन, आसान रीपेमेंट और कस्टमाइज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स उपलब्ध करा रही हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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