भारत कच्चे तेल के लिए मध्य पूर्व पर निर्भरता घटाए, घरेलू उत्पादन को मिले बढ़ावा: ओएनजीसी चेयरमैन
मुंबई, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। ओएनजीसी के चेयरमैन और सीईओ अरुण कुमार सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर फिर से विचार करना और पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं विशेष रूप से मध्य पूर्व पर निर्भरता को घटाना चाहिए।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड द्वारा आयोजित एक ऊर्जा सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए, ओएनजीसी चेयरमैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि हाल ही में पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष, जिसने दशकों में सबसे बड़े ऊर्जा संकटों में से एक को जन्म दिया, ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियों को उजागर किया है।
उन्होंने कहा, मौजूदा समय में भारत के कच्चे तेल के आयात का करीब 50 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस के आयात का करीब 30 प्रतिशत और एनपीजी की जरूरत का करीब 85-90 प्रतिशत मध्य पूर्व से आयात करता है।
हालांकि, सिंह ने भौगोलिक निकटता के कारण इन संसाधनों तक आसान पहुंच मान लेने के प्रति आगाह किया।
उन्होंने कहा, “यह सोचना कि मध्य पूर्व हमारे सबसे करीब है और इसलिए उनके सभी संसाधनों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है, इस धारणा को लेकर सतर्क रहना चाहिए।”
खाड़ी देशों द्वारा कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी के निर्यात के लिए उपयोग किए जाने वाले एक प्रमुख शिपिंग मार्ग के छह सप्ताह तक बाधित रहने से संकट और भी बढ़ गया, जिससे भारत सहित कई आयातक देशों में आपूर्ति बाधित हो गई।
इस व्यवधान ने अधिकारियों को महत्वपूर्ण क्षेत्रों को गैस आवंटन में प्राथमिकता देने के लिए मजबूर कर दिया।
लगातार खंडित हो रही वैश्विक व्यवस्था के जोखिमों पर प्रकाश डालते हुए सिंह ने कहा कि एक निर्णायक परिवर्तन हो रहा है।
उन्होंने कहा, यदि दुनिया और अधिक विवैश्वीकृत होती जाती है, तो हमें और अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत की आयात पर अत्यधिक निर्भरता इसे ऐसे परिदृश्य में विशेष रूप से कमजोर बनाती है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना आवश्यकता बन गया है और आक्रामक अन्वेषण प्रयासों का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, हमें अपने देश में जहां भी तेल या गैस है, उसे हर कीमत पर खोजना चाहिए, क्योंकि संकट में कोई मदद नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि गहरे पानी में अन्वेषण एक चुनौती बना हुआ है।
सिंह ने आपूर्ति और मूल्य में होने वाले झटकों से बचाव के लिए रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर भी बल दिया।
उन्होंने कहा, हमें अब इस भंडारण की समस्या का समाधान करना ही होगा, चाहे कुछ भी हो जाए। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ती अस्थिरता की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि शोधन अर्थशास्त्र तेजी से अप्रत्याशित हो गया है, और ऐसे असामान्य उदाहरण भी सामने आए हैं जहां उत्पाद मार्जिन कच्चे तेल की लागत से अधिक हो गया है।
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एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पश्चिम एशिया संकट: मीरवाइज उमर फारूक ने कूटनीति का समर्थन किया, न्याय आधारित समाधान की अपील
श्रीनगर, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु और ऑल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच शांति के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करते हुए न्याय आधारित समाधान की जरूरत पर जोर दिया।
श्रीनगर के पुराने शहर के नौहट्टा स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद संबोधित करते हुए मीरवाइज उमर ने कहा कि पूरा विश्व इस समय इस्लामाबाद की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है और क्षेत्र में शांति बहाली के लिए किसी ठोस पहल की प्रतीक्षा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग भी उम्मीद करते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता हिंसा और पीड़ा के दौर को खत्म करने में मदद करेगी और लेबनान, फ़िलिस्तीन समेत पूरे क्षेत्र में न्याय स्थापित होगा।
मीरवाइज उमर ने कहा कि कश्मीर के लोग दशकों से संघर्ष और हिंसा का दर्द झेलते आए हैं, इसलिए वे युद्ध की निरर्थकता और उसके मानवीय नुकसान को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने कहा, “युद्ध में कोई वास्तविक विजेता नहीं होता, हर कोई हारता है- जिंदगी, गरिमा और इंसानियत के स्तर पर।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति केवल गंभीर संवाद और न्यायपूर्ण समाधान से ही संभव है, न कि बल प्रयोग से।
लेबनान की हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए मीरवाइज ने बेरूत में नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा की और इजरायल पर लगातार हिंसा करने और शांति प्रयासों को बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं संकट को और गहरा करती हैं और तनाव कम करने की कोशिशों को कमजोर करती हैं।
उन्होंने दोहराया कि जब तक फिलिस्तीनी लोगों के उनके अधिकारों और जमीन से जुड़े मूल मुद्दे का न्यायपूर्ण समाधान नहीं होता, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।
अपने संबोधन के अंत में मीरवाइज उमर फारूक ने वैश्विक शांति के लिए दुआ की और मानवता से संघर्ष का रास्ता छोड़कर शांति और भाईचारे का मार्ग अपनाने की अपील की।
--आईएएनएस
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