Meta Controversy: PM मोदी का पोस्ट हटाने पर मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, 'Safe Harbour' पर सख्त संदेश
नई दिल्ली: Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में भारत सरकार से माफी मांगी है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने बैठक के दौरान अपने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM), Deepfake कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कमियों पर भी खेद जताया।
बुधवार को Meta की ग्लोबल टीम ने कंपनी के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान के नेतृत्व में केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव और IT सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। यह बैठक पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के बाद सरकार की ओर से जारी समन के बाद हुई।
'Safe Harbour' पर सरकार ने जताई सख्त आपत्ति
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक में अधिकारियों ने Meta को स्पष्ट किया कि कंपनी केवल एक 'इंटरमीडियरी' (Intermediary) की तरह काम नहीं करती, क्योंकि उसके एल्गोरिदम यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचे और किसे अधिक प्रमोट किया जाए।
सूत्रों का कहना है कि इसी आधार पर सरकार ने Meta को बताया कि IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाली 'Safe Harbour' सुरक्षा पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस सुरक्षा को समाप्त करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
PM मोदी का पोस्ट हटाने पर क्या हुआ था?
23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर एक वीडियो फेसबुक पर साझा किया था। Meta ने बाद में स्वीकार किया कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह वीडियो करीब पांच घंटे तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहा। कंपनी ने 28 जुलाई को बयान जारी कर कहा था कि कंटेंट गलती से हटाया गया था और बाद में बहाल कर दिया गया।
बैठक से पहले संसदीय समिति ने उठाए थे सवाल
Meta और केंद्र सरकार के बीच हुई बैठक से पहले सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कंपनी की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यदि कोई प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम के जरिए यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किसे दिखाया जाएगा, तो उसे सिर्फ 'इंटरमीडियरी' नहीं माना जा सकता।
दुबे ने मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की थी। उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो IT Act की धारा 79 के तहत Meta को मिलने वाली 'Safe Harbour' सुरक्षा की समीक्षा की जानी चाहिए। यह संस्करण क्रोनोलॉजी के हिसाब से भी सही है और न्यूज़ फ्लो भी अधिक स्वाभाविक बनाता है।
CSAM और Deepfake पर भी उठे सवाल
बैठक में सरकार ने Meta के प्लेटफॉर्म पर CSAM, महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री और Deepfake कंटेंट को प्रभावी ढंग से रोकने में कथित कमियों पर भी चिंता जताई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने कंपनी को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत में काम करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा और यूजर्स, विशेषकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है।
Saurav Das House Row: ₹12 लाख किराए वाले GK-1 घर के दावे के बीच CJP प्रवक्ता का आरोप- YouTubers ने घर में की घुसपैठ
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया है कि कुछ YouTubers और मीडिया से जुड़े लोग बिना अनुमति उनके दिल्ली स्थित घर में दाखिल हुए और अंदर का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। उनका कहना है कि इस घटना से उनके परिवार की सुरक्षा और निजता पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कुछ YouTube चैनलों पर सौरव दास की जीवनशैली को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। इनमें कहा गया कि वह दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 (GK-1) इलाके में एक आलीशान घर में रहते हैं, जिसका मासिक किराया करीब ₹12 लाख है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
'घर के बाहर 15-20 लोग जमा थे'
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि मंगलवार सुबह उनके घर के बाहर 15 से 20 लोग मौजूद थे, जिनमें से कुछ लोग पिछली रात से ही वहां डटे हुए थे।
First and foremost, rent can’t be 12 lacs; it’s an exaggeration.
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) August 5, 2026
Secondly, BJP has the Income Tax department; if they feel he is spending more than he earns, send him an IT notice.
This is not journalism; this is hounding Gen Z leaders who raised their voice against the… https://t.co/PVm3qh64Qi
उन्होंने आरोप लगाया कि घर के अंदर से रिकॉर्ड किए गए वीडियो सार्वजनिक होने के बाद उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। दास ने लिखा कि वह इस समय CJP की दो दिवसीय बैठक में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र में हैं, जबकि उनका परिवार दिल्ली स्थित घर में मौजूद है।
बिना अनुमति घर में घुसने का आरोप, दिल्ली पुलिस से लगाई मदद की गुहार
इससे पहले जारी एक SOS संदेश में सौरव दास ने आरोप लगाया कि कुछ YouTubers और मीडिया कर्मी बिना अनुमति उनके घर में दाखिल हुए और अंदर के दृश्य रिकॉर्ड कर प्रसारित किए।
उन्होंने इसे निजता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यदि इन वीडियो के कारण कोई असामाजिक तत्व उनके घर या परिवार को नुकसान पहुंचाता है, तो इसके लिए संबंधित वीडियो बनाने वाले और उनके समर्थकों को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए हस्तक्षेप की मांग भी की।
राजनीतिक विवाद भी तेज
इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ विपक्षी नेताओं ने कथित घुसपैठ और निजता के उल्लंघन पर चिंता जताई है, जबकि अन्य नेताओं ने सौरव दास की जीवनशैली और उनके निवास से जुड़े दावों पर सवाल उठाए हैं।
₹12 लाख किराए वाले घर के दावे से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब एक YouTube चैनल ने सौरव दास के कथित आवास का एक 'वॉक-थ्रू' वीडियो प्रकाशित किया। वीडियो में दावा किया गया कि वह ग्रेटर कैलाश-1 में स्थित एक आलीशान मकान में रहते हैं, जिसका मासिक किराया लगभग ₹12 लाख है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इन दावों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर CJP की फंडिंग, आर्थिक पारदर्शिता और नेतृत्व की जीवनशैली को लेकर बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने पार्टी से इन दावों पर स्पष्टता देने की मांग की है।
महाराष्ट्र में चल रही है CJP की अहम बैठक
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सौरव दास महाराष्ट्र में CJP की दो दिवसीय कोर कमेटी की बैठक में शामिल हैं। बताया जा रहा है कि बैठक में संगठन की आगामी रणनीति, सदस्यता अभियान और केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
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