चीन की सेना बिना मानव वाले युद्ध के क्षेत्र में तेजी से नए आयाम स्थापित कर रही है। हाल ही में विकसित किए गए उन्नत रोबोटिक कुत्ते, जो समन्वित झुंड के रूप में कार्य कर सकते हैं, वह आधुनिक युद्ध की दिशा को बदलने की क्षमता रखते हैं। इन रोबोटिक इकाइयों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि वह एक दूसरे के साथ जानकारी साझा करते हुए जटिल शहरी युद्ध अभियानों को अंजाम दे सकें। यह तकनीक पारंपरिक सैन्य प्रणालियों की तुलना में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
हम आपको बता दें कि पहले इस प्रकार के रोबोट केवल एक सैनिक की सहायता करने तक सीमित थे, लेकिन अब उन्हें एक संगठित समूह के रूप में काम करने के लिए विकसित किया गया है। ये नए रोबोटिक कुत्ते एक सामूहिक मंच के रूप में कार्य करते हैं, जिसमें सभी इकाइयां एक साझा प्रणाली के माध्यम से जुड़ी रहती हैं। इस प्रणाली को एक प्रकार का सामूहिक मस्तिष्क कहा जा सकता है, जो सभी रोबोटों को एक साथ सोचने, निर्णय लेने और कार्य करने में सक्षम बनाता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, शहरी युद्ध के अभ्यासों में यह देखा गया है कि ये रोबोटिक झुंड वास्तविक समय में आपसी संवाद कर सकते हैं और अपने कार्यों का समन्वय कर सकते हैं। इतना ही नहीं, ये जमीन पर काम करते हुए आकाश में उड़ने वाले यंत्रों के साथ भी जुड़ सकते हैं, जिससे संयुक्त अभियान और अधिक प्रभावी हो जाते हैं।
इन रोबोटिक कुत्तों को अलग अलग भूमिकाएं दी गई हैं, ठीक वैसे ही जैसे वास्तविक भेड़ियों के झुंड में होता है। उदाहरण के लिए, एक प्रकार का रोबोट निगरानी और जानकारी जुटाने के लिए बनाया गया है, जो युद्ध क्षेत्र की स्थिति को समझने में मदद करता है। दूसरा प्रकार आक्रमण के लिए तैयार किया गया है, जो लक्ष्य को निष्क्रिय करने का कार्य करता है। इसके अलावा एक अन्य प्रकार का रोबोट सहायता और रसद से जुड़ा कार्य करता है।
आक्रमण करने वाले रोबोट को विभिन्न प्रकार के हथियारों से लैस किया जा सकता है, जैसे छोटे मिसाइल, गोला फेंकने वाले यंत्र और स्वचालित बंदूकें। इससे उसकी युद्ध क्षमता काफी बढ़ जाती है। इन रोबोटों की गति भी पहले की तुलना में अधिक है और वह कठिन परिस्थितियों तथा अलग अलग प्रकार की जमीन पर काम करने में सक्षम हैं। वे लगभग पंद्रह किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चल सकते हैं और भारी सामान भी उठा सकते हैं।
इन रोबोटों को नियंत्रित करने के लिए कई तरीके विकसित किए गए हैं। सैनिक उन्हें आवाज के माध्यम से, हाथ में पहने जाने वाले उपकरणों से या विशेष नियंत्रण यंत्रों के द्वारा संचालित कर सकते हैं। हालांकि इनकी स्वायत्तता काफी उन्नत है, फिर भी किसी भी हमले से पहले मानव की अनुमति आवश्यक रखी गई है।
इस प्रकार की भी रिपोर्टें हैं कि चीन ने केवल जमीन तक ही नहीं, बल्कि आकाश और समुद्र में भी बिना मानव वाली प्रणालियों का विकास किया है। एक विशेष आकाशीय झुंड प्रणाली में दर्जनों उड़ने वाले यंत्र एक साथ काम करते हैं। ये यंत्र निगरानी, बाधा उत्पन्न करने और हमले जैसे कार्य एक ही संचालक के निर्देश पर कर सकते हैं। प्रत्येक यंत्र अपने आप में बुद्धिमान है और अन्य यंत्रों के साथ तालमेल बनाए रखते हुए अपनी स्थिति को लगातार समायोजित करता रहता है।
बताया जा रहा है कि चीनी वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीक पर भी काम कर रहे हैं जिसमें ये यंत्र बिना किसी संकेत के भी एक दूसरे के इरादों को समझ सकें। इसका उद्देश्य उन परिस्थितियों में भी काम करना है जहां संचार बाधित हो जाए।
साथ ही रक्षा प्रणाली के क्षेत्र में भी चीन ने प्रगति की है। ऐसे उपकरण विकसित किए गए हैं जो आकाशीय खतरों को निष्क्रिय कर सकते हैं। इसके साथ ही समुद्र में चलने वाले बिना मानव के जहाज भी तैयार किए गए हैं, जो अपने आप रास्ता तय कर सकते हैं, बाधाओं से बच सकते हैं और लक्ष्य की पहचान कर सकते हैं। ये जहाज समूह में काम करते हुए किसी खतरे को घेरने और आवश्यकता पड़ने पर उसे निष्क्रिय करने में सक्षम हैं।
बताया जा रहा है कि चीन के वैज्ञानिकों का दीर्घकालिक लक्ष्य पूरी तरह स्वायत्त प्रणालियां विकसित करना है, जो बिना मानव हस्तक्षेप के एक टीम के रूप में कार्य कर सकें। भविष्य में ऐसे कई मंच एक साथ मिलकर जटिल अभियानों को अंजाम दे सकेंगे, चाहे वहां किसी प्रकार की दिशा सूचक प्रणाली उपलब्ध हो या नहीं।
देखा जाये तो बिना मानव वाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों की ओर बढ़ता यह कदम आधुनिक युद्ध की प्रकृति को पूरी तरह बदल सकता है। रोबोटिक झुंड की यह अवधारणा भविष्य के युद्धक्षेत्र में समन्वित और तेज निर्णय लेने वाली सेनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत देती है।
Continue reading on the app
मध्य पूर्व में शांति बहाली की कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इज़रायल लेबनान में अपने हमलों को पूरी तरह बंद नहीं कर देता, वह अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत में शामिल नहीं होगा। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शनिवार से शुरू होने वाली प्रस्तावित US-ईरान सीज़फ़ायर बातचीत पर अब अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान की सरकारी एजेंसियों फ़ार्स और तस्नीम के अनुसार, एक जानकार सूत्र ने कहा, "कुछ मीडिया आउटलेट्स के ये दावे कि एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल US अधिकारियों के साथ बातचीत करने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंच गया है, पूरी तरह से झूठे हैं।"
'लेबनान में सीज़फ़ायर होने तक कोई बातचीत नहीं'
सूत्र ने आगे कहा कि बातचीत तब तक रुकी रहेगी जब तक US लेबनान में सीज़फ़ायर को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर लेता और इज़रायल अपने हमले रोक नहीं देता।
फ़ार्स ने सूत्र के हवाले से बताया, "जब तक लेबनान में सीज़फ़ायर लागू नहीं हो जाता, तब तक ईरान का इस्लामाबाद में अमेरिकी पक्ष के साथ शांति वार्ता में हिस्सा लेने का कोई इरादा नहीं है।"
US-ईरान सीज़फ़ायर में लेबनान की रुकावट
बुधवार को लेबनान में कम से कम 182 लोग मारे गए, जब इज़रायल ने ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह आतंकवादी समूह के खिलाफ अपने हमले तेज़ कर दिए; यह समूह तेहरान के समर्थन में इस संघर्ष में शामिल हुआ था।
बेरूत के व्यापारिक और रिहायशी, दोनों इलाकों में हुए हमलों के बाद, आपातकालीन बचाव दल पूरी रात मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश करते रहे।
इज़रायल ने गुरुवार को कहा कि उसने हिज़्बुल्लाह नेता नईम कासिम के एक सहयोगी, अली यूसुफ़ हर्षी को मार गिराया है। हिज़्बुल्लाह ने इस पर टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ज़ोर देकर कहा कि लेबनान में युद्ध को खत्म करना सीज़फ़ायर की आपसी समझ का ही एक हिस्सा था। हालांकि, इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह समझौते में शामिल नहीं था।
Continue reading on the app