आईएमएफ की चेतावनी: मध्य पूर्व संघर्ष से वैश्विक तेल संकट, महंगाई बढ़ेगी और विकास दर घटेगी
वॉशिंगटन, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने गुरुवार को चेतावनी दी कि मध्य पूर्व के संघर्ष से जुड़ा वैश्विक तेल संकट ऊर्जा आयात करने वाले देशों की विकास दर को धीमा करेगा और महंगाई बढ़ाएगा।
आईएमएफ की सालाना स्प्रिंग मीटिंग से पहले अपनी शुरुआती स्पीच में, क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने आईएमएफ की वार्षिक वसंत बैठक से पहले अपने भाषण में कहा कि इस व्यवधान ने दुनिया में रोजाना तेल की आपूर्ति लगभग 13 प्रतिशत और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति 20 प्रतिशत कम कर दी है। इससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं और सप्लाई चेन में तनाव पैदा हुआ है।
आईएमएफ प्रमुख ने कहा, जैसा हमेशा होता है, आपूर्ति में कमी से कीमतें बढ़ती हैं। उन्होंने बताया कि ब्रेंट क्रूड का भाव संघर्ष से पहले 72 डॉलर प्रति बैरल था, जो चरम पर 120 डॉलर तक पहुंच गया।
कीमतें अब थोड़ी कम हुई हैं, लेकिन अभी भी संघर्ष से पहले के स्तर से बहुत ऊपर हैं, और कई देश ईंधन पाने के लिए अधिक भुगतान कर रहे हैं।
आईएमएफ प्रमुख ने इस संकट को वैश्विक बताया, लेकिन असर सभी जगह एक जैसा नहीं है।
ऊर्जा आयात पर निर्भर देश सबसे अधिक प्रभावित होंगे, जबकि निर्यातक देश जिनकी आपूर्ति कम प्रभावित हुई है, उन्हें नुकसान सीमित होगा। इस संकट का असर पहले ही कई क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
ईंधन की कमी और रिफाइनरी की समस्याओं ने डीजल और जेट ईंधन की आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे परिवहन, व्यापार और पर्यटन प्रभावित हुए हैं। खाद्य सुरक्षा भी बढ़ती जा रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अभी और 45 मिलियन लोग या उससे ज्यादा भूख का सामना कर सकते हैं।
आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि पहले टेक्नोलॉजी निवेश और समर्थनकारी वित्तीय हालात की वजह से विकास में तेजी थी, अब वैश्विक विकास में कमी की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि हमारी सबसे आशावादी योजना में भी विकास दर घटाने की संभावना है। इसके पीछे कारण बुनियादी ढांचे को नुकसान, आपूर्ति में बाधा और विश्वास की कमी है। ऊर्जा बुनियादी ढांचे को लेकर चिंता बनी हुई है।
कतर का रस लफान कॉम्प्लेक्स जो गल्फ के 93 प्रतिशत एलएनजी का उत्पादन करता है, बंद हो गया है और पूरी क्षमता पर लौटने में तीन से पांच साल लग सकते हैं।
आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि 80 प्रतिशत से ज्यादा देश तेल आयातक हैं, इसलिए वे लगातार बढ़ती कीमतों के झटके के प्रति संवेदनशील हैं, खासकर वे देश जिनके पास सीमित वित्तीय संसाधन हैं।
जॉर्जीवा ने सरकारों से कहा कि वे ऐसी नीतियां लागू न करें जैसे कि निर्यात नियंत्रण या मूल्य सीमा, जो वैश्विक हालात को और बिगाड़ सकती हैं। केंद्रीय बैंक को मूल्य स्थिरता पर ध्यान रखना चाहिए और अगर महंगाई की उम्मीदें नियंत्रण से बाहर हों तो तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, वित्तीय सहायता लक्षित और अस्थायी होनी चाहिए।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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Jharkhand Government: झारखंड में कुपोषण से लड़ाई के लिए सरकार की बड़ी पहल, अब मिड डे मील के साथ मिलेंगे न्यूट्री कुकीज और बार
Jharkhand Government: झारखंड में कुपोषण और भूख की समस्या को दूर करने के लिए एक अहम पहल शुरू की गई है. अब राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) के साथ पोषक तत्वों से भरपूर न्यूट्री कुकीज और न्यूट्री बार भी दिए जा रहे हैं. इस योजना का उद्देश्य बच्चों को जरूरी पोषण उपलब्ध कराना और उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है. फिलहाल इस योजना की शुरुआत कुछ चुनिंदा जिलों में की गई है, जहां स्कूली बच्चों को नियमित रूप से न्यूट्री कुकीज दी जा रही हैं. यह पहल हार्वेस्ट प्लस सॉल्यूशंस, झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी और भारतीय लोक कल्याण संस्थान के सहयोग से चलाई जा रही है. इस योजना के तहत राज्य के आठ जिलों के 24 प्रखंडों में करीब 60 हजार बच्चों को इसका लाभ मिलेगा. इनमें पाकुड़, पलामू, रांची (राहे प्रखंड), गुमला, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और गोड्डा शामिल हैं.
आदिम जनजाति के बच्चों पर विशेष फोकस
यह योजना खासतौर पर आदिम जनजाति समुदाय के बच्चों के लिए शुरू की गई है. इसमें माल पहाड़िया, असुर और साबर जैसे समुदायों के बच्चे शामिल हैं, जिनमें कुपोषण की समस्या ज्यादा पाई जाती है. इन बच्चों को सप्ताह में पांच दिन पोषक खाद्य पदार्थ दिए जा रहे हैं, ताकि उनके शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल मिल सकें.
बायोफोर्टिफाइड फसलों को बढ़ावा
इस पहल के तहत पोषक तत्वों से भरपूर बायोफोर्टिफाइड फसलों की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. आयरन के लिए बाजरा, जिंक के लिए गेहूं और चावल तथा कैल्शियम के लिए रागी की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इन फसलों से बने खाद्य पदार्थ बच्चों के भोजन में शामिल किए जा रहे हैं.
न्यूट्री पाठशाला से बढ़ेगी जागरूकता
बच्चों को पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए ‘न्यूट्री पाठशाला’ की शुरुआत भी की गई है. स्कूलों की दीवारों पर पोषण से जुड़ी जानकारी चित्रों और संदेशों के माध्यम से दिखाई जाएगी. बच्चों को न्यूट्री डायरी दी जाएगी, जिसमें उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दर्ज होगी. इसके अलावा नुक्कड़ नाटक और कठपुतली शो के जरिए भी जागरूकता फैलाई जाएगी.
किसानों और समुदाय को भी जोड़ा जा रहा
इस योजना में किसानों और स्थानीय समुदाय को भी जोड़ा जा रहा है. पारंपरिक बीजों के संरक्षण और खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं. साथ ही, लोगों को संतुलित आहार के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है. यह पहल झारखंड में कुपोषण को कम करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है.
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