पीएम मोदी 21 अप्रैल को भारत के पहले रिफाइनरी-पेट्रोकेमिकल हब का उद्घाटन करेंगे
जयपुर, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को बालोतरा में देश की पहली हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन करेंगे।
उन्होंने कहा कि पचपदरा रिफाइनरी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का एक अहम स्तंभ बनकर उभरेगी और राजस्थान के आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए ताकि प्रधानमंत्री की यात्रा एक ऐतिहासिक और सुव्यवस्थित कार्यक्रम बन सके। शर्मा गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें प्रस्तावित यात्रा की तैयारियों का जायजा लिया गया।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे और रिफाइनरी में उत्पादित लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) टैंकरों को हरी झंडी दिखाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्यक्रम स्थल पर व्यापक इंतजाम करने के निर्देश दिए, जिनमें बैठने की व्यवस्था, पीने का पानी, चिकित्सा सुविधाएं, बिजली की निर्बाध आपूर्ति, पार्किंग, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा शामिल हैं।
उन्होंने यातायात पुलिस और परिवहन विभाग को निर्देश दिया कि वे आपस में तालमेल बिठाकर यातायात के सुचारू प्रवाह और पर्याप्त पार्किंग सुनिश्चित करें। रिफाइनरी परिसर के भीतर वृक्षारोपण गतिविधियों के संबंध में भी निर्देश जारी किए गए।
शर्मा ने बताया कि पेट्रोल और डीजल के अलावा, हिंदुस्तान रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल लिमिटेड की रिफाइनरी पॉलीप्रोपाइलीन, लीनियर लो-डेंसिटी पॉलीइथाइलीन, हाई-डेंसिटी पॉलीइथाइलीन, बेंजीन, टोल्यूनि और ब्यूटाडाइन का भी उत्पादन करेगी।
इन उत्पादों से परिवहन, फार्मास्यूटिकल्स, पेंट और पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों को काफी फायदा होगा।
उन्होंने आगे कहा कि यह परियोजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी, पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करेगी, और युवाओं के लिए कौशल विकास के अवसरों के साथ-साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगी।
पचपदरा स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी राज्य और राष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर ऊर्जा की मांगों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
परियोजना की संशोधित लागत 79,459 करोड़ रुपए है, जिसकी वार्षिक रिफाइनिंग क्षमता नौ मिलियन मीट्रिक टन है। यह रिफाइनरी 1.5–2.5 मिलियन टन राजस्थान के कच्चे तेल और 6.5–7.5 मिलियन टन आयातित कच्चे तेल के मिश्रण को संसाधित करेगी। लगभग 4,400 एकड़ में फैली इस सुविधा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस का वाणिज्यिक उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है।
बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड तथा अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल थे।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
गुजरात में 2527 जगहों पर छापेमारी, 703 किलो खाद्य सामग्री नष्ट, अधिकारियों ने दी सख्त चेतावनी
गांधीनगर, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। गुजरात में पनीर समेत अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लेबलिंग की जांच के लिए राज्यभर में सख्त अभियान चलाया गया। इस दौरान 2,500 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और 700 किलो से ज्यादा खाद्य सामग्री नष्ट की गई।
एफडीसीए ने 4 से 9 अप्रैल के बीच मेगा स्पेशल ड्राइव चलाकर होटलों, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में पनीर और चीज उत्पादों की गुणवत्ता, सही पहचान और उपभोक्ताओं को दी जाने वाली जानकारी की जांच की।
इस अभियान के दौरान कुल 2,527 प्रतिष्ठानों (निर्माताओं और खाने-पीने की जगहों) का निरीक्षण किया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन पर 270 नोटिस जारी किए गए, जबकि 18 प्रतिष्ठानों को सील या बंद किया गया। इसके अलावा 2,84,300 रुपए का जुर्माना वसूला गया और 703 किलो खराब खाद्य सामग्री नष्ट की गई।
जांच के दौरान 95 सैंपल लैब परीक्षण के लिए लिए गए। वहीं, फूड सेफ्टी वैन ने 659 जगहों पर जांच की और मौके पर ही 679 सैंपलों की टेस्टिंग की गई।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि एनालॉग पनीर नकली नहीं है, बल्कि डेयरी पनीर का एक विकल्प है, लेकिन यदि इसे गलत तरीके से असली पनीर बताकर बेचा गया तो कार्रवाई की जाएगी।
यह अभियान एफडीसीए के उस निर्देश के बाद चलाया गया, जिसमें होटलों और रेस्टोरेंट्स को यह स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य किया गया है कि परोसा जा रहा पनीर दूध से बना है या एनालॉग उत्पाद है।
सभी प्रतिष्ठानों को अपने यहां बोर्ड लगाकर पनीर की प्रकृति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रफुल पनशेरिया ने कहा कि ग्राहकों को सही जानकारी देना जरूरी है, अन्यथा इसे गुमराह करने की श्रेणी में माना जाएगा और कार्रवाई होगी।
नए नियम के तहत व्यवसायी एनालॉग उत्पाद को केवल पनीर के नाम से नहीं बेच सकते, बल्कि उसे एनालॉग या वेजिटेबल फैट पनीर विकल्प के रूप में स्पष्ट लिखना होगा।
अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई एफडीसीए एक्ट के तहत की जा रही है और नियमों का पालन न करने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी।
अब इस जांच अभियान को निर्माण इकाइयों और विक्रेताओं तक भी बढ़ाया जाएगा, ताकि उत्पादन और बिक्री दोनों स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो सके।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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