गुजरात में 2527 जगहों पर छापेमारी, 703 किलो खाद्य सामग्री नष्ट, अधिकारियों ने दी सख्त चेतावनी
गांधीनगर, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। गुजरात में पनीर समेत अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लेबलिंग की जांच के लिए राज्यभर में सख्त अभियान चलाया गया। इस दौरान 2,500 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और 700 किलो से ज्यादा खाद्य सामग्री नष्ट की गई।
एफडीसीए ने 4 से 9 अप्रैल के बीच मेगा स्पेशल ड्राइव चलाकर होटलों, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में पनीर और चीज उत्पादों की गुणवत्ता, सही पहचान और उपभोक्ताओं को दी जाने वाली जानकारी की जांच की।
इस अभियान के दौरान कुल 2,527 प्रतिष्ठानों (निर्माताओं और खाने-पीने की जगहों) का निरीक्षण किया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन पर 270 नोटिस जारी किए गए, जबकि 18 प्रतिष्ठानों को सील या बंद किया गया। इसके अलावा 2,84,300 रुपए का जुर्माना वसूला गया और 703 किलो खराब खाद्य सामग्री नष्ट की गई।
जांच के दौरान 95 सैंपल लैब परीक्षण के लिए लिए गए। वहीं, फूड सेफ्टी वैन ने 659 जगहों पर जांच की और मौके पर ही 679 सैंपलों की टेस्टिंग की गई।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि एनालॉग पनीर नकली नहीं है, बल्कि डेयरी पनीर का एक विकल्प है, लेकिन यदि इसे गलत तरीके से असली पनीर बताकर बेचा गया तो कार्रवाई की जाएगी।
यह अभियान एफडीसीए के उस निर्देश के बाद चलाया गया, जिसमें होटलों और रेस्टोरेंट्स को यह स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य किया गया है कि परोसा जा रहा पनीर दूध से बना है या एनालॉग उत्पाद है।
सभी प्रतिष्ठानों को अपने यहां बोर्ड लगाकर पनीर की प्रकृति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रफुल पनशेरिया ने कहा कि ग्राहकों को सही जानकारी देना जरूरी है, अन्यथा इसे गुमराह करने की श्रेणी में माना जाएगा और कार्रवाई होगी।
नए नियम के तहत व्यवसायी एनालॉग उत्पाद को केवल पनीर के नाम से नहीं बेच सकते, बल्कि उसे एनालॉग या वेजिटेबल फैट पनीर विकल्प के रूप में स्पष्ट लिखना होगा।
अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई एफडीसीए एक्ट के तहत की जा रही है और नियमों का पालन न करने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी।
अब इस जांच अभियान को निर्माण इकाइयों और विक्रेताओं तक भी बढ़ाया जाएगा, ताकि उत्पादन और बिक्री दोनों स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो सके।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
आंध्र प्रदेश : अमरावती में देश की पहली क्वांटम कंप्यूटर परीक्षण सुविधा की शुरुआत, सीएम नायडू करेंगे उद्घाटन
अमरावती, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। 14 अप्रैल को विश्व क्वांटम दिवस के अवसर पर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू अमरावती स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय में भारत की पहली स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटर परीक्षण सुविधा का औपचारिक रूप से शुभारंभ करेंगे। साथ ही वह विजयवाड़ा के पास गन्नवरम में मेधा टावर्स स्थित क्वांटम सुविधा केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन भी करेंगे।
राज्य सरकार ने घोषणा की कि आंध्र प्रदेश ऐसा केंद्र शुरू करने वाला पहला राज्य होगा, और अमरावती क्वांटम वैली क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभरेगी।
कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री एक लाइव क्वांटम सिस्टम की शुरुआत देखेंगे; इसमें प्रोसेसर को ठंडा करने की प्रक्रिया अमरावती 1 क्यू सिस्टम पर वर्चुअल रूप से शुरू की जाएगी, क्योंकि यह सिस्टम मेधा टावर्स में ही स्थापित है। साथ ही, अमरावती 1 एस सिस्टम एक ओपन-एक्सेस सेटअप के रूप में काम करेगा, जो प्रदर्शन के दौरान उपस्थित लोगों को पूरी तरह से दिखाई देगा।
अमरावती क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी (एक्यूआरएफ) की स्थापना के साथ, भारत के पास अब अपना संप्रभु क्वांटम इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमरावती अब राष्ट्रीय क्वांटम हार्डवेयर नेटवर्क का मुख्य केंद्र बन गया है, जिससे भारत वैश्विक उपयोग के लिए क्वांटम सिस्टम को डिजाइन करने, उनका परीक्षण करने, उन्हें प्रमाणित करने और उनका निर्माण करने की स्थिति में आ गया है।
एक्यूआरएफ के माध्यम से विकसित की गई तकनीकों में क्रायोजेनिक्स, सटीक इलेक्ट्रॉनिक्स और क्वांटम-ग्रेड फैब्रिकेशन शामिल हैं, जिनका रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी रणनीतिक लाभ मिलेगा।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत, अमरावती क्वांटम वैली में आईबीएम का 133-क्विबिट वाला क्वांटम कंप्यूटर स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, इसने 80 से अधिक औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी की है, जिससे यह दुनिया के शीर्ष पांच क्वांटम केंद्रों में से एक बन गया है।
विश्व क्वांटम दिवस के अवसर पर एक्यूआरएफ की शुरुआत से अमरावती क्वांटम वैली के पोर्टफोलियो में एक स्वदेशी हार्डवेयर आयाम जुड़ गया है, जो इसके मौजूदा क्वांटम क्लाउड, कौशल विकास और नवाचार से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को और भी अधिक सशक्त बनाता है।
कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए, मुख्यमंत्री के सचिव पी.एस. प्रद्युम्न ने बताया कि यह आंध्र प्रदेश की जनता के लिए एक सपने के सच होने जैसा है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की पहल के परिणामस्वरूप, 14 अप्रैल को देश की पहली स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटिंग परीक्षण सुविधा वास्तविकता में बदल गई है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने क्वांटम प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, स्वदेशी हार्डवेयर घटकों के निर्माण से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को अमरावती में स्थापित करने पर विशेष जोर दिया था। एसआरएम विश्वविद्यालय ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इस सुविधा को छात्रों के लिए सुलभ बनाया है।
सचिव ने इस बात का भी उल्लेख किया कि पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से लोग कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के लाभों का आनंद उठा रहे हैं, और अब समय आ गया है कि हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्वांटम प्रौद्योगिकी की ओर अग्रसर हों।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री ने उभरती हुई क्वांटम प्रौद्योगिकी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए युवाओं के कौशल को अद्यतन (अपडेट) करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया है। उनके आह्वान के बाद, लाखों छात्रों ने कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दाखिला लिया। अकेले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, चेन्नई में ही 2.5 लाख छात्रों ने प्रशिक्षण के लिए दाखिला लिया।
--आईएएनएस
एससीएच
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