Sandeep Reddy Vanga का 'धुरंधर' विवाद पर तीखा पलटवार, "यह काला चश्मा उतारिए, प्रोपेगेंडा नहीं सिनेमा है"
Sandeep Reddy Vanga: फिल्म निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने फिल्म 'धुरंधर' को 'प्रोपेगेंडा' कहने वालों को करारा जवाब देते हुए इसे आलोचकों की 'काली दृष्टि' बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहसी सिनेमा को एजेंडा कहना गलत है और नई सोच के लिए पुरानी रूढ़ियों के 'खेत को जलाना' जरूरी है।
पाकिस्तान में गहराया टीबी संकट, हर दिन 140 मौतें : रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान में तपेदिक (टीबी) अभी भी सबसे घातक बीमारियों में से एक है और हर साल हजारों लोगों की जान लेता है। रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना 1,800 से अधिक नए टीबी के मामले सामने आते हैं और लगभग 140 लोग रोज मर जाते हैं। यह दिखाता है कि पाकिस्तान की वर्तमान कोशिशें इस बीमारी से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से विश्व तपेदिक दिवस पर जारी आंकड़े पाकिस्तान के लिए चेतावनी की तरह हैं। इस संकट का पैमाना बहुत बड़ा है, क्योंकि हर साल 6,69,000 से अधिक लोग टीबी से संक्रमित होते हैं और 51,000 मौतें होती हैं।
पाकिस्तान के बिजनेस रिकॉर्डर में एक संपादकीय के अनुसार, पाकिस्तान पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में टीबी मामलों का 73 प्रतिशत हिस्सा रखता है और दुनिया में पांचवें नंबर पर है। यह लगातार दिखाता है कि देश इस सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती को हल करने में असफल रहा है।
इस साल की थीम हां, हम टीबी को खत्म कर सकते हैं, लोगों की ताकत से आशा और संभावना को दर्शाता है। लेकिन, जमीनी स्थिति में यह दिखता है कि विचार और कार्य में एक बड़ी खाई है। जब रोजाना 1,800 नए मामले सामने आते हैं और लगभग 140 लोग रोज मरते हैं, तो यह साफ है कि वर्तमान प्रयास पर्याप्त नहीं हैं।
डब्ल्यूएचओ के देश प्रतिनिधि के बयान के अनुसार, पाकिस्तान में हर दस मिनट में एक व्यक्ति टीबी से मरता है, जो तुरंत कदम उठाने की जरूरत को दर्शाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये मौतें रोकी जा सकती हैं, जो कि गुस्सा और जवाबदेही दोनों पैदा करती हैं।
फंड की भारी कमी, कमजोर स्वास्थ्य ढांचा और जरूरी दवाओं की कमी ने टीबी नियंत्रण के प्रयासों को कमजोर कर दिया है। ये नई समस्याएं नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान में सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की पुरानी अनदेखी को दिखाती हैं।
टीबी जैसी संक्रामक बीमारियां सबसे कमजोर लोगों को प्रभावित करती हैं। टीबी को खत्म करने के लिए पाकिस्तान को राजनीतिक इच्छाशक्ति, ज्यादा पैसा और मजबूत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की जरूरत है, जो दूर-दराज इलाकों तक भी पहुंचे। जल्दी पहचान, दवाओं की उपलब्धता और मरीजों का समर्थन सबसे जरूरी होना चाहिए।
इसके अलावा, लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाने चाहिए, ताकि टीबी के मरीज इलाज में हिचकिचाएं नहीं।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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