आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिकित्सा के क्षेत्र में नई आशा और संभावनाओं का द्वार खोल रही: कविंद्र गुप्ता
ग्रेटर नोएडा, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित 51वें राष्ट्रीय चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका और उसकी आवश्यकता पर जोर देते हुए इसे चिकित्सा क्षेत्र में नई आशा और संभावनाओं का द्वार बताया।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और व्यक्तिगत बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एआई तकनीकों की मदद से समय रहते मानसिक समस्याओं की पहचान कर उचित उपचार उपलब्ध कराना संभव हो रहा है। साथ ही, रोगों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक तेज और सटीक हुई है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा पी सिंह ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। विषय था मानसिक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में एआई-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशन व्यक्ति की भावनाओं, व्यवहार और भाषा का विश्लेषण कर प्रारंभिक स्तर पर मानसिक समस्याओं की पहचान करने में सक्षम हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि टेली-मानस जैसी सेवाएं दूरदराज के क्षेत्रों तक मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साथ ही, देश में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और सामूहिक सहयोग का भी विषय है।
राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति को समय पर सहायता मिल सके। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित वर्चुअल थेरेपिस्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म 24×7 सहायता प्रदान कर रहे हैं, जो विशेषकर उन क्षेत्रों में उपयोगी हैं जहां विशेषज्ञों की कमी है। उन्होंने यह भी बताया कि न्यूरोफीडबैक, ब्रेन इमेजिंग और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग मानसिक विकारों को बेहतर समझने और नए उपचार विकसित करने में सहायक हो रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवीय संवाद का विकल्प नहीं हो सकती। इसलिए इन तकनीकों का उपयोग मानवीय मूल्यों के साथ संतुलित रूप से किया जाना आवश्यक है।
राज्यपाल ने डेटा गोपनीयता, नैतिकता और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि यदि एआई का उपयोग सही दिशा में किया जाए, तो यह मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो राणा पी सिंह ने सम्मेलन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे उच्च अकादमिक मानकों से युक्त आयोजन बताया। सम्मेलन संयोजक एवं मनोविज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. आनंद पी सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया।
कार्यक्रम में प्रोफेसर माधव गोविंद, प्रोफेसर गौरी शंकर कालोइया, प्रोफेसर आशा श्रीवास्तव, डॉ. निशी मिश्रा और डॉ. आलोक मिश्रा ने भी अपने विचार साझा किए। वहीं, इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट्स (आईएसीपी) के पूर्व अध्यक्ष एवं संस्थापक सदस्य डॉ. मनोरंजन सहाय ने सम्मेलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया।
--आईएएनएस
पीएसके
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
51 लाख से अधिक एलपीजी सिलेंडर्स की प्रतिदिन हो रही डिलीवरी : केंद्र
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। घरेलू एलपीजी सिलेंडर्स की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और 8 अप्रैल को 51.5 लाख सिलेंडर्स को डिलीवर किया गया है। यह जानकारी सरकार द्वारा गुरुवार को दी गई।
सरकार ने बताया कि कुल बुकिंग में ऑनलाइन एलपीजी की हिस्सेदारी बढ़कर 98 प्रतिशत हो गई है और किसी भी वितरक के पास एलपीजी समाप्त होने की सूचना नहीं मिली है। वितरक स्तर पर कालाबाजारी को रोकने के लिए करीब 92 प्रतिशत डिलीवरी को डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) द्वारा किया जा रहा है।
औसत 1.06 लाख 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर्स की बिक्री की जा रही है, फरवरी में यह आंकड़ा 77,000 पर था और 23 मार्च से अब तक करीब 10 लाख पांच किलो वाले एलपीजी सिलेंडर्स की बिक्री हो चुकी है।
बयान में आगे कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने औचक निरीक्षण बढ़ा दिए हैं और 1,870 से अधिक कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, 189 एलपीजी वितरकों पर जुर्माना लगाया है और 53 वितरकों को निलंबित किया है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति वाणिज्यिक एलपीजी वितरण की योजना बनाने के लिए राज्य अधिकारियों और उद्योग निकायों के साथ समन्वय कर रही है।
बुधवार को लगभग 6,711 मीट्रिक टन व्यावसायिक एलपीजी (35 लाख से अधिक 19 किलोग्राम सिलेंडरों के बराबर) की बिक्री हुई, जिससे 14 मार्च से अब तक कुल बिक्री 99,796 मीट्रिक टन हो गई है।
18,000 से अधिक पाइप वाली प्राकृतिक गैस (एलपीजी) उपभोक्ताओं ने मायपीएनजीडीडॉटइन वेबसाइट के माध्यम से अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं। राज्यों को घरेलू और व्यावसायिक दोनों उपभोक्ताओं के लिए नए एलपीजी कनेक्शन की सुविधा प्रदान करने की सलाह दी गई है।
सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और उनके पास पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार है। देश में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक बना हुआ है। बयान में कहा गया है कि घरेलू खपत को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों से एलपीजी उत्पादन बढ़ाया गया है।
सरकार पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ईंधन की जल्दबाजी में खरीदारी और एलपीजी की अनावश्यक बुकिंग से बचें। बयान में आगे कहा गया है कि नागरिकों से अनुरोध है कि वे एलपीजी सिलेंडर बुक करने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें और जब तक आवश्यक न हो, एलपीजी वितरकों के पास जाने से बचें।
--आईएएनएस
एबीएस/
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