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भारत के पहले टेस्ट जीत के चश्मदीद नहीं रहे, सीडी गोपीनाथ का 96 साल की उम्र में निधन, देश के सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर थे

टेस्ट में भारत की पहली जीत दिलाने वाली टीम के सदस्य और देश के सबसे उम्रदराज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर सीडी गोपीनाथ का 96 साल की उम्र में निधन हो गया. गोपीनाथ ऑस्ट्रेलिया के महान नील हार्वी (97) के बाद दुनिया के दूसरे सबसे उम्रदराज क्रिकेटर थे. उनके परिवार में पत्नी, बच्चे और पोते-पोतियां हैं. उनके जाने के बाद अब मुंबई के 95 साल के चंद्रकांत पाटणकर देश के सबसे उम्रदराज क्रिकेटर बन गए हैं. पाटणकर ने 1955 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक टेस्ट खेला था. गोपीनाथ के निधन से भारत ने न सिर्फ अपने सबसे बुजुर्ग टेस्ट क्रिकेटर को खोया, बल्कि क्रिकेट इतिहास के एक शानदार दौर से जुड़े आखिरी खिलाड़ी को भी खो दिया. चार साल पहले चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में एक कार्यक्रम के दौरान जब भारत की पहली टेस्ट जीत की बात हुई तो उनकी आंखों में चमक थी. भारत ने 1952 में इसी मैदान पर इंग्लैंड को पारी और आठ रन से हराकर पहली बार टेस्ट मैच जीता था. उन्होंने उस जीत को याद करते हुए मजाक में कहा था, 'देखो! लंबी उम्र का यही फायदा है. आप कहानी जोड़ते और फिर से लिखते रह सकते हैं. मेरी उम्र को देखते हुए हर कोई मुझे संदेह का फायदा देगा, लेकिन संदेह का फायदा हमेशा बल्लेबाज को मिलता है, है ना?' उस समय 92 साल की उम्र में भी गोपीनाथ शानदार कहानीकार थे और अपने आठ टेस्ट मैचों के सफर की दिलचस्प बातें सुनाते रहे. उनके सबसे यादगार पल वही चार दिन थे जो तब के मद्रास (अब चेन्नई) में बीते. गोपीनाथ का अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड भले ही साधारण दिखता है, लेकिन उन्हें अपने करियर पर हमेशा गर्व रहा. 1951 में ब्रेबॉर्न स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ 50 और 42 रन से शानदार शुरुआत करने वाले इस बल्लेबाज ने आठ टेस्ट में एक अर्धशतक के साथ 242 रन बनाए. घरेलू क्रिकेट में गोपीनाथ का योगदान बहुत अहम रहा. उन्होंने अक्सर मद्रास की कप्तानी की और बड़ी पारियां खेलीं. उन्होंने 83 मैचों में नौ शतक और 42 की औसत से 4,259 रन बनाए. अपने करियर की सबसे खास पारी उन्होंने भारत दौरे पर आई न्यूजीलैंड टीम के खिलाफ खेली थी. दक्षिण क्षेत्र की ओर से खेलते हुए उन्होंने दूसरी पारी में 175 रन बनाए. उस समय न्यूजीलैंड टीम में बर्ट सटलिफ, जॉन रीड, जॉन एलाबास्टर और पूर्व ऑलराउंडर क्रिस हैरिस के पिता पार्के जिंपिन हैरिस जैसे खिलाड़ी थे. दक्षिण क्षेत्र यह मैच हार गया, लेकिन गोपीनाथ की पारी ने उन्हें फैंस का दिल जीतने में मदद की. गोपीनाथ ने कहा था, 'रीड और सटलिफ बाद में मुझे ड्रेसिंग रूम में मिले और हमने खेल के बारे में अच्छी बातचीत की. हम एक-दूसरे को अच्छे से समझना चाहते थे.' अपने खेल के दिनों के बाद गोपीनाथ ने राष्ट्रीय चयन समिति के प्रमुख और 1979 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के मैनेजर के तौर पर भी काम किया. उस दौरे को सुनील गावस्कर की ओवल में 221 रन की शानदार पारी के लिए याद किया जाता है. गावस्कर की इस पारी से जीत के लिए मिले 438 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने आठ विकेट पर 429 रन बनाए थे. यह मैच ड्रॉ रहा. गोपीनाथ पुरानी यादों के साथ-साथ आज के क्रिकेट को भी पूरे जोश से देखते थे. वह आईपीएल और चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के बड़े फैन थे. उन्होंने कहा था, 'मैंने सीएसके इसलिए चुना क्योंकि इसमें महेंद्र सिंह धोनी हैं. मैं धोनी को उनकी क्रिकेट की समझ से ज्यादा उनके खेलने के तरीके के लिए पसंद करता हूं. वह मैदान पर कभी भी कुछ गलत नहीं करते.' गोपीनाथ की पहचान मैदान पर सख्त प्रतियोगी और मैदान के बाहर बहुत अच्छे इंसान के रूप में रही है.

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VIDEO: आवेश खान के बाउंड्री पर खड़े होने और बैट चलाने के बाद हरकत में आई BCCI

नई दिल्ली. जब ऋषभ पंत का शॉट बाउंड्री की ओर जा रहा था और रस्सी पार करने से पहले ही बाउंड्री के बाहर खड़े नॉन‑प्लेइंग खिलाड़ी आवेश खान ने बैट से गेंद को वापस मैदान के अंदर मार दिया. नियम के हिसाब से गेंद बाउंड्री पार नहीं हुई थी और वहाँ कोई फील्डर भी नहीं था, इसलिए अंपायर ने चौका या पेनल्टी रन नहीं दिए; लॉ 41 (अनफेयर प्ले) और बॉल डैमेजिंग के तहत भी इसे तकनीकी रूप से गलत नहीं माना गया. लेकिन सनराइजर्स हैदराबाद ने बीसीसीआई को लिखित शिकायत की, यह कहते हुए कि यह खेल भावना के खिलाफ खेल का मज़ाक जैसा है और उनके साथ बेइज़्जती जैसा महसूस हुआ. विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि आवेश बैट लेकर बाउंड्री के इतने पास क्यों थे; अगर कोई फील्डर डाइव लगाता और बैट उससे टकरा जाता तो गंभीर चोट हो सकती थी इसलिए इसे नियम से अधिक सुरक्षा और स्पिरिट के लिहाज़ से गलत बताया गया, भले ही औपचारिक पेनल्टी की गुंजाइश कम मानी गई. इसीलिए बीसीसीआई ने आनन फानन में नियम बदलने पर कार्यवाई की.

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  Sports

आउट या नॉटआउट? ईडन गार्डन्स में अंपायर के एक फैसले ने मचाया कोहराम, फिन एलन के साथ हुआ सरेआम अन्याय!

Digvesh Rathi touches rope controversy: आईपीएल में अंपायरिंग का स्तर एक बार फिर सवालों के घेरे में है. कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच मुकाबले में फिन एलन को थर्ड अंपायर ने गलत तरीके से आउट करार दिया. रिप्ले में साफ दिखा कि फील्डर दिग्वेश राठी का पैर बाउंड्री रोप को छू रहा था, फिर भी अंपायर ने बिना गहराई से जांच किए उन्हें पवेलियन भेज दिया. इस विवादास्पद फैसले ने सोशल मीडिया पर प्रशंसकों का गुस्सा भड़का दिया है और टूर्नामेंट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. Thu, 9 Apr 2026 21:28:16 +0530

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