भारत को इतनी बड़ी सफलता मिली है जिसने पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। भारत ने वो कर दिखाया है जो आज तक दुनिया में कोई भी नहीं कर सका। ना ही यूनाइटेड स्टेट्स यानी कि ना ही अमेरिका, ना ही रशिया, ना ही चाइना और ना ही इजराइल। लेकिन भारत सबको पीछे छोड़कर नंबर वन बनने की ओर अब बढ़ चुका है। दरअसल बता दें कि भारत ने अब ऐसी ताकतवर मिसाइल डिजाइन और टेक्नोलॉजी तैयार कर ली है जो दुश्मन के सबसे मजबूत सिस्टम को भी चुनौती दे सकती है। अगर आपको लगे कि दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल डिफेंस सिस्टम आपको बचा सकती है तो आप गलतफहमी में हैं क्योंकि भारत की यह जो नई मिसाइल है यह उस भरोसे को तोड़ने जा रही है।
अमेरिका का थार्ड, रूस का S500 और चीन का HQ9 इन सबको यह चकमा दे सकती है। दरअसल भारत एक नई पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलस्टिक मिसाइल यानी कि आईसीबीएम विकसित कर रहा है जो मौजूदा अग्निवी से कई गुना ज्यादा एडवांस होगी। जहां अग्नि5 की रेंज लगभग 5000 या 5500 कि.मी. है वहीं ये जो नई मिसाइल है, इसकी रेंज होगी 10,000 कि.मी. से भी ज्यादा और सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि यह एक साथ 10 से ज्यादा या फिर 12 वॉर हेड ले जाने की क्षमता रख सकती है। जिन पर दुनिया भरोसा करती है। वहीं बता दें कि भारत अब एक ऐसी इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल बना रहा है जो इन सबको भी चकमा दे सकती है। इस मिसाइल की सबसे खतरनाक खासियत यह है कि इसकी जो स्मार्ट मूवमेंट है इसमें यहां पर इस्तेमाल होगा मैनुवरेबल रीएंट्री व्हीकल यानी कि एमएआरवी जब यह मिसाइल वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करती है तो यह सीधी नहीं बल्कि यह अपना रास्ता बदल सकती है। दुश्मन का रडार इसे सही तरीके से बिल्कुल भी ट्रैक नहीं कर पाएगा। आज के बता दें कि सबसे एडवांस सिस्टम में गिना जाता है Thar को। उसके बाद में S500 और चाइना का HQ9 आता है।
ये सभी सिस्टम सीधी उड़ान वाली मिसाइलों को रोकने के लिए बनाए गए हैं। लेकिन भारत की ये जो नई मिसाइल है यह रास्ता बदल सकती है अपने आप। नकली टारगेट यानी कि डीकोस छोड़ सकती है। रडार से यह बच सकती है। यानी जो दिखेगा वो असल में होगा नहीं। और जो असल में होगा वो रोक पाना उसे रोक पाना दुश्मन देशों के लिए काफी मुश्किल होगा। इस नई मिसाइल को अग्नि5 से हल्का बनाने पर भी काम किया जा रहा है और हो सकता है कि इसे हल्का भी बनाया जाए। स्टील की जगह यहां पर एडवांस कंपोजिट मटेरियल का इस्तेमाल है। इससे वजन कम होगा और ईंधन की बचत भी होगी और रेंज भी बढ़ाई जाएगी। अब यह क्यों अहम है भारत के लिए? किस तरीके से यह गेम चेंजर है उसे भी बता देते हैं। क्योंकि बता दें कि अब भारत के पास होगा लंबी दूरी से सटीक हमला, मल्टीपल वॉर हेड और इसके साथ ही एंटी मिसाइल डिफेंस को चकमा देने की क्षमता। इसका मतलब सीधा-सीधा साफ यह है कि दुश्मन चाहे जितनी भी तैयारी कर ले अब पूरी तरह से वह सुरक्षित रह नहीं पाएगा।
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इजराइल ने गुरुवार को दावा किया कि उसने बेरूत पर रात भर चले हमले में ईरान समर्थित लेबनानी समूह हिजबुल्लाह के नेता नईम कासिम को मार गिराया है। यदि हिजबुल्लाह द्वारा इसकी पुष्टि की जाती है, तो उनकी मृत्यु सशस्त्र समूह और ईरान दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण झटका होगा, जिनके लिए हिजबुल्लाह एक प्रमुख क्षेत्रीय सहयोगी है।
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्धविराम के बाद स्पेन ईरान में अपना दूतावास फिर से खोलेगा
स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने कहा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद स्पेन ईरान में अपना दूतावास फिर से खोलेगा, जिसे मार्च में युद्ध के कारण बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने तेहरान में स्पेन के राजदूत को वापस आकर कार्यभार संभालने और दूतावास को फिर से खोलने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि स्पेन ईरान की राजधानी में अपनी उपस्थिति के माध्यम से शांति प्रयासों में योगदान देना चाहता है।
चीन ने ईरान संघर्ष में शांति के अवसर का लाभ उठाने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने का आग्रह किया
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे उम्मीद है कि संबंधित पक्ष ईरान संघर्ष में शांति के अवसर का लाभ उठाएंगे और क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए तेजी से काम करेंगे। ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब बीजिंग शत्रुता समाप्त करने के लिए संवाद और तनाव कम करने का आह्वान कर रहा है।
फ्रांस बोला- ईरान-अमेरिका युद्धविराम में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच युद्धविराम लेबनान तक भी बढ़ाया जाना चाहिए, और चेतावनी दी कि जारी सैन्य कार्रवाई से युद्धविराम के खतरे पैदा हो सकते हैं। उन्होंने एक दिन पहले किए गए इजरायल के "बड़े पैमाने पर" हमलों की निंदा की और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान पाकिस्तान में शुरू होने वाली आगामी शांति वार्ता के तहत कई रियायतें देगा।
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