Kalashtami 2026: वैशाख माह की कालाष्टमी आज, जानें पूजन का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और व्रत का महत्व
Kalashtami 2026: आज यानी 09 अप्रैल 2026, गुरुवार को काल भैरवाष्टम का पावन त्योहार है. हिंदू धर्म में कालाष्टमी व्रत को विशेष माना जाता है. इस व्रत में भगवान शिव के काल भैरव रूप की पूजा की जाती है. हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. कुछ लोग इस दिन मां दुर्गा की पूजा करते हैं. कालाष्टमी के दिन विधि-विधान के साथ काल भैरव की पूजा की जाती है. ऐसा करने से साधकों की सभी मनोकामनाएं पूजा हो जाती है. इसके साथ ही राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से छुटकारा मिल जाता है. जीवन में किसी तरह का भय नहीं रहता है. जीवन की बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिल जाता है. इसलिए कालाष्टमी को शास्त्र विधि से काल भैरव जी की पूजा करनी चाहिए. आइए जानते हैं काल भैरवाष्टमी पर निथिता मुहूर्त और पूजा की विधि.
वैशाख काल भैरवाष्टमी पूजा मुहूर्त (Vaishakh Kalashtami 2026 Puja Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 32 मिनट से सुबह 05 बजकर 17 मिनट तक.
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से दोपहर 03 बजकर 20 मिनट तक.
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06 बजकर 42 मिनट से शाम 07 बजकर 05 मिनट तक.
निशा मुहूर्त- रात 11 बजकर 59 मिनट से रात 12 बजकर 44 मिनट तक.
पंचांग के अनुसार, काल भैरवाष्टमी के दिन व्रत रखकर इन मुहूर्त में काल भैरव जी की पूजा करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होगा. इसके साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी.
वैशाख काल भैरवाष्टमी पूजा विधि (Vaishakh Kalashtami 2026 Puja Vidhi)
आज काल भैरवाष्टमी व्रत के दिन स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. चौकी पर भगवान काल भैरव जी के श्रीविग्रह की स्थापना करें. गंगाजल से काल भैरव जी का अभिषेक करें. काल भैरव जी को काले तिल, उड़द दाल, नीले या काले फूल, नारियल चढ़ाएं. काल भैरव जी को उड़द की दाल से बनी मिठाई का भोग लगाएं. सरसों के तेल के दीपक से आरती करें. आरती के बाद पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करते हुए प्रणाम करें. आरती के बाद आसन पर बैठकर ऊं कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करें. काले कुत्ते को रोटी या भोजन कराएं. अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण और गरीबों को दान दें. काल भैरवाष्टमी पर्व पर निशा मुहूर्त में फिर से पूजा करें. निशा मुहूर्त में भैरवजी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्त होती है.
काल भैरवाष्टमी व्रत में भूलकर न करें ये गलतियां
काल भैरव जी की पूजा में शुद्धि का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
हमेशा काल भैरव जी की पूजा स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनकर करें.
कालाष्टमी व्रत में मांस-मदिरा का सेवन न करें.
व्रत में लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन न करें.
किसी जीव को नुकसान न पहुंचाएं.
क्रोध और गुस्सा करने से बचें.
बाल और नाखून न काटें.
बड़ों का अपमान करने से बचें.
ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें.
काल भैरवाष्टमी व्रत का महत्व (Vaishakh Kalashtami 2026 Significance)
शास्त्रों के अनुसार, भगवान काल भैरव जी को महादेव का उग्र रुप माना जाता हैं. कालाष्टमी के दिन व्रत पूर्वक इन पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. रोग और भय से छुटकारा मिल जाता है. राहु और केतु की वजह से जीवन में आ रहे संकट समाप्त हो जाते हैं. भैरव जी की कृपा से नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष समाप्त हो जाते हैं. इस दिन भैरव जी की पूजा करने के साथ उनके वाहन कुत्तों को भोजन कराना बेहद शुभ माना जाता है. अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरुरतमंद लोगों को दान भी अवश्य करना चाहिए.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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