यूरोप की गर्मी में भारतीय भी परेशान [Heatwave in Europe: Even Indians can’t bear it]
आम तौर पर, भारत की हीटवेव हेडलाइन बनती है लेकिन इस साल यूरोप की हीटवेव ने सबको चौंका दिया. 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा का टेम्परेचर, पब्लिक प्लेसेस में लोगों पर पानी की बौछारें और अकेले जर्मनी में लगभग 10 हजार लोगों की मौत. यह सब देख कर सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछना शुरू किया कि यूरोप की हीटवेव में ऐसा क्या है, जो लोग इतना परेशान है - यहां तक कि यहां रहने वाले भारतीय भी! DW हिन्दी की तस्नीम जहरा ने एक्सपर्ट्स से जाना कि आखिर यूरोप की हीटवेव और भारत की हीटवेव में क्या अंतर है? जो 40 डिग्री भारत में झेल लिया जाता है, वो जर्मनी में क्यों नहीं झेला जा रहा … Typically, heatwaves in India make the headlines, but this year, the heatwave in Europe took everyone by surprise. Temperatures exceeding 40 degrees Celsius, water being sprayed on people in public spaces, and approximately 10,000 deaths in Germany alone—witnessing all this, people on social media began to wonder what exactly makes the European heatwave so distressing—even for Indians living there! DW Hindi’s Tasneem Zahra spoke to experts to understand the difference between heatwaves in Europe and India. Why is it that the 40-degree heat endured in India is proving so difficult to handle in Germany? #dwhindi #dwnews #germany #heatwave
लोहे के दो टुकड़े नहीं, 350 साल की विरासत है ये कैंची! यूपी के इस शहर को क्यों कहते हैं ‘कैंची नगरी’?
पश्चिम उत्तर प्रदेश का मेरठ शहर सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी पीढ़ियों से चली आ रही हुनरमंद कारीगरी के लिए भी जाना जाता है. खासकर, मेरठ की कैंची अपनी मजबूती और टिकाऊपन के लिए मशहूर है, जिसे 'कैंची नगरी' का गौरव प्राप्त है. यह कारीगरी करीब साढ़े तीन सदियों से चली आ रही है.
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