Lionel Messi's Father Passed Away: लियोनेल मेसी के पिता जॉर्ज मेसी का हुआ निधन, 68 साल की उम्र में ली आखिकी सांस
Lionel Messi's Father Passed Away: अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के पिता जॉर्ज मेसी का 68 साल की उम्र में निधन हो गया. अर्जेंटीना की कई मीडिया ने इस बात की पुष्टि की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉर्ज लंबे समय से बीमार थे. जॉर्ज की तबीयत को लेकर पिछले कुछ समय से अटकलें लगाई जा रही थीं।. लियोनेल मेसी ने भी हाल ही में संकेत दिया था कि उनका परिवार मुश्किल दौर से गुजर रहा है, हालांकि उन्होंने अपने पिता की बीमारी या उनकी स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी शेयर नहीं की थी.
???? TRISTE NOUVELLE !
— FRENCHRAPUS ???????? (@FrenchRapUS) August 8, 2026
LE PÈRE DE LA LÉGENDE DU FOOTBALL, LIONEL MESSI, EST DÉCÉDÉ AUJOURD’HUI À L’ÂGE DE 68 ANS ????
IL SOUFFRAIT D’UNE MALADIE EN PHASE TERMINALE ET S’EST ÉTEINT ENTOURÉ DE SES PROCHES, EN ARGENTINE… pic.twitter.com/MpU5YxWPbB
यूपीआई ट्रांजैक्शन पर उपयोगकर्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, व्यापारियों के लिए भी अधिकांश ट्रांजैक्शन रहेंगे निःशुल्क: सरकार
नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच शनिवार को स्पष्ट किया कि यूपीआई से भुगतान करने वाले आम नागरिकों से किसी भी तरह का ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार ने कहा है कि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले सभी यूपीआई ट्रांजैक्शन भी पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे। साथ ही, व्यापारियों के लिए भी यूपीआई के अधिकांश ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि भविष्य में यदि व्यापारी छूट दर (एमडीआर) लागू की जाती है, तो यह केवल कुछ सीमित प्रकार के व्यापारी ट्रांजैक्शन पर, एक निश्चित सीमा से अधिक राशि होने की स्थिति में और बेहद मामूली दर पर लागू होगी। यह दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड से लिए जाने वाले शुल्क की तुलना में काफी कम होगी। सरकार ने कहा कि सभी व्यापारियों पर एक समान शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार, कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अध्यक्षता वाली यूपीआई एवं सेवा संचालन समिति यह तय करेगी कि एमडीआर लागू किया जाना है या नहीं और यदि लागू होता है तो उसकी दर क्या होगी।
वित्त मंत्रालय ने आगे स्पष्ट किया कि भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम (पीएसएस एक्ट) में हालिया संशोधन को लेकर कुछ गलत धारणाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों द्वारा इसे आम नागरिकों से यूपीआई शुल्क वसूलने की दिशा में कदम बताया जा रहा है, जबकि वास्तव में यह संशोधन एक सक्षमकारी प्रावधान है, जिसका उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी विकास, वित्तीय समावेशन और उभरते जोखिमों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।
बयान में आगे कहा गया है कि यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और डिजिटल ढांचे को लगातार उन्नत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत है। इसके लिए एक ऐसा आर्थिक ढांचा आवश्यक है, जिससे यूपीआई भविष्य में भी मजबूत और विश्वसनीय बना रहे।
सरकार ने कहा कि यूपीआई के क्षेत्र में अधिक कंपनियों को अपनी सेवाएं बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा, और इसके लिए लंबे समय तक टिकाऊ आय मॉडल की आवश्यकता है।
सरकार का कहना है कि केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना यूपीआई के विकास के अगले चरण के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए ऐसा संतुलित ढांचा तैयार करना जरूरी है, जिससे यूपीआई मजबूत, समावेशी, किफायती और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बना रहे।
सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि यूपीआई से संबंधित नीतिगत बदलावों के पीछे किसी बाहरी प्रभाव या दबाव की भूमिका हो सकती है। सरकार ने इसे पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया।
वित्त मंत्रालय ने आगे बयान में कहा कि यदि किसी बाहरी दबाव का प्रभाव होता, तो भारत ने वर्ष 2016 में यूपीआई की शुरुआत नहीं की होती। इसके अलावा, जनवरी 2020 से नागरिकों और व्यापारियों के लिए यूपीआई को निःशुल्क रखने की व्यवस्था भी लागू नहीं की जाती।
सरकार के अनुसार, इन्हीं प्रयासों के कारण यूपीआई आज दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय में काम करने वाली परस्पर-संचालित भुगतान प्रणाली बन चुकी है।
सरकार ने बताया कि वर्ष 2016-17 में शुरुआत के बाद यूपीआई ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को व्यापक रूप से बदल दिया है। वास्तविक समय में भुगतान और विभिन्न बैंकों एवं सेवाओं के बीच परस्पर संचालन की सुविधा के कारण यूपीआई आज दुनिया के लिए डिजिटल भुगतान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन चुका है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में अकेले यूपीआई के माध्यम से 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य करीब 29.9 लाख करोड़ रुपए रहा। यूपीआई अब 11 विदेशी देशों में भी सक्रिय है, जबकि कई अन्य देशों ने भी इस तकनीक में रुचि दिखाई है।
सरकार ने कहा कि भारत अब डिजिटल भुगतान के विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। यूपीआई को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक और व्यापक रूप से पहुंचाने तथा वैश्विक स्तर पर इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखने के लिए पूरे यूपीआई तंत्र का आर्थिक रूप से टिकाऊ होना जरूरी है।
भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में किया गया संशोधन इसी दिशा में एक दूरदर्शी कदम है, जिसका उद्देश्य यूपीआई को आने वाले वर्षों में भी सुरक्षित, किफायती, समावेशी और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय भुगतान प्रणाली बनाए रखना है।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यूपीआई नागरिकों के लिए निःशुल्क बना रहेगा और रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन पर आम लोगों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। भविष्य में यदि एमडीआर लागू किया जाता है, तो वह केवल सीमित व्यापारी ट्रांजैक्शन पर और मामूली दर पर लागू होगा।
सरकार ने कहा कि यूपीआई भारत का अपना डिजिटल नवाचार है, जिसे भारतीयों ने भारत के लिए विकसित किया है। सरकार ने पिछले एक दशक में इसे बढ़ावा देने और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया है और आगे भी इसके विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि यूपीआई से संबंधित जानकारी के लिए केवल वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और बिना सत्यापन वाले संदेशों को आगे साझा न करें।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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