उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी:UP-राजस्थान में बारिश के साथ ओले गिरे; 15 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट
IMD ने आज छत्तीसगढ़ और बिहार समेत 15 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड के चारों धाम यानी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में बुधवार को बर्फबारी हुई। वहीं, हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में भी बर्फ गिरी, जबकि मैदानी इलाकों में बारिश हुई। हिमाचल का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 11°C नीचे चला गया। जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग समेत ऊंचाई वाले इलाकों में भी ताजा बर्फबारी हुई। इधर, उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत 25 जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। प्रयागराज के मेजा में गंगा फेरी घाट पर बना पांटून पुल तेज बहाव में बह गया। मध्य प्रदेश में 3 साइक्लोनिक एक्टिविटी हैं। राजस्थान में पिछले दो दिनों में कई जिलों में एक इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक, 9 अप्रैल से एक हफ्ते तक मौसम साफ रहने की संभावना है। दिल्ली में बुधवार को 11 साल में अप्रैल का सबसे ठंडा दिन रिकॉर्ड किया गया। मौसम की चार तस्वीरें… अगले दो दिन मौसम का हाल 9 अप्रैल- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी की संभावना है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। जबकि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में गरज-चमक के साथ 30 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा चल सकती हैं। असम और मेघालय में तेज बारिश का अलर्ट है। 10 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी जारी रह सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में गरज-चमक के साथ 30 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा चल सकती हैं।
पेरेंटिंग- जॉब के साथ बच्चे को वक्त नहीं दे पाते:वो जिद्दी हो रहा है, अपनी डिमांड पूरी करने के लिए ब्लैकमेल करता है, क्या करें?
सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरा 8 साल का एक बेटा है। मैं और मेरे हसबैंड, दोनों कॉरपोरेट जॉब करते हैं। काम की वजह से हम बच्चे को पर्याप्त समय नहीं दे पाते थे। इस कमी को पूरा करने के लिए हम अक्सर उसे महंगे गिफ्ट्स, गैजेट्स दे दिया करते थे। उसकी हर इच्छा भी पूरी करते थे। लेकिन कुछ समय से हमें ऐसा लग रहा है कि बेटे की उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। वह अपनी बात मनवाने के लिए इमोशनली ब्लैकमेल भी करने लगा है। हमें अब अपनी गलती का एहसास भी हो रहा है, लेकिन ये समझ नहीं आ रहा कि इसे ठीक कैसे करें। सही संतुलन कैसे बनाएं? प्लीज हेल्प। एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। यह सवाल आज कई वर्किंग पेरेंट्स की स्थिति को दिखाता है। वर्किंग पेरेंट्स के लिए काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना चैलेंजिंग होता है। ऐसे में बच्चे को पर्याप्त समय न दे पाने पर गिल्ट होना स्वाभाविक है। बहुत से पेरेंट्स इस कमी को पूरा करने के लिए बच्चों को महंगे खिलौने, गैजेट्स या पैसे देकर खुश करने की कोशिश करते हैं। शुरुआत में यह तरीका आसान लगता है। लेकिन धीरे-धीरे बच्चे के मन में यह धारणा बन जाती है कि प्यार का मतलब सिर्फ भौतिक चीजें या सुख-सुविधाएं हैं। हालांकि अच्छी बात है कि आपने समय रहते इस बदलाव को नोटिस किया है। ऐसे में समझदारी से इस स्थिति को मैनेज किया जा सकता है। वर्किंग पेरेंट्स को गिल्ट क्यों होता है? गिल्ट के और कई कारण हो सकते हैं- ‘गिल्ट पेरेंटिंग’ का बच्चे पर प्रभाव गिल्ट की वजह से पेरेंट्स बच्चे को जरूरत से ज्यादा चीजें, छूट या लाड़-प्यार देते हैं। शुरुआत में यह ‘प्यार’ लगता है, लेकिन लंबे समय में इसका असर बच्चे की सोच, व्यवहार और इमोशनल डेवलपमेंट पर पड़ता है। ग्राफिक में देखिए गिल्ट पेरेंटिंग का बच्चे पर क्या असर होता है- आइए, अब ‘गिल्ट पेरेंटिंग’ को मैनेज करने के तरीके समझते हैं। वर्किंग पेरेंट्स ‘गिल्ट’ कैसे मैनेज करें? वर्किंग पेरेंट्स के लिए ‘गिल्ट’ पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। लेकिन इसे मैनेज किया जा सकता है। आइए इसे प्रैक्टिकल तरीके से समझते हैं- कुल मिलाकर इस समय बच्चे को ज्यादा समय, ज्यादा अटेंशन और ज्यादा साथ की जरूरत है। पेरेंटिंग गिल्ट को मैनेज करने के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। इसे ग्राफिक में देखिए- बच्चे के लिए पेरेंट्स का साथ जरूरी बच्चे के लिए पेरेंट्स का साथ उसकी इमोशनल, मेंटल और सोशल ग्रोथ की बुनियाद होता है। यह उसकी पर्सनैलिटी को आकार देता है। बच्चे को समय की कमी कैसे समझाएं? 6–10 साल के बच्चे में समझने की क्षमता विकसित हो रही होती है। ऐसे में उन्हें अपने काम के बारे में तर्क से समझाया जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- अंत में यही कहूंगी कि बच्चों के लिए सबसे बड़ी जरूरत महंगे गिफ्ट्स नहीं, बल्कि माता-पिता का समय, अटेंशन और प्यार है। अगर पेरेंट्स रोज थोड़ी देर भी बिना मोबाइल, बिना काम के बच्चे के साथ बिताते हैं तो यह बच्चे के लिए बहुत मायने रखता है। ………………….. पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 10 साल की बेटी एकदम मुंहफट है: जो मुंह में आए, बोल देती है, ये उसकी साफगोई है या संवेदना की कमी, उसे कैसे समझाएं 10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन 'सोशल इंटेलिजेंस' (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। पूरी खबर पढ़िए…
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