मिडिल ईस्ट तनाव के बीच संघर्ष-विराम का बांग्लादेश ने किया स्वागत, शांति की दिशा में अहम कदम बताया
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच बांग्लादेश ने हालिया सीजफायर का स्वागत करते हुए इसे शांति की दिशा में एक अहम और सकारात्मक कदम बताया है। बांग्लादेश ने उम्मीद जताई है कि सभी पक्ष इस युद्धविराम का सम्मान करेंगे।
बांग्लादेश विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग में सीजफायर की घोषणा स्वागत योग्य है। बांग्लादेश का मानना है कि यह इलाके में तनाव कम करने की दिशा में एक अच्छा कदम है।
बांग्लादेश को उम्मीद है कि इसमें शामिल सभी पार्टियां सीजफायर का सम्मान करेंगी और इस मौके का सही इस्तेमाल करके एक टिकाऊ समाधान की दिशा में काम करेंगी और पूरे इलाके में हमेशा के लिए शांति और स्थिरता बहाल करेंगी।
बांग्लादेश सीजफायर को आसान बनाने में डिप्लोमैटिक कोशिशों में शामिल सभी पार्टियों की तारीफ करता है। बांग्लादेश फिर से कहता है कि सभी झगड़ों को बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए शांति से सुलझाया जा सकता है और सुलझाया जाना चाहिए।
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी संघर्ष-विराम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इजरायल संघर्ष-विराम का समर्थन करता है और उम्मीद करता है कि ईरानी शासन की सैन्य क्षमताओं के गंभीर रूप से कमजोर पड़ने तथा अस्तित्वगत खतरों के समाप्त हो जाने के बाद, इस बार वे अमेरिका की 15 सूत्रीय योजना पर अधिक गंभीरता से विचार करेंगे।
वहीं, संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने एक कार्यक्रम के दौरान संघर्ष विराम को नाजुक करार देते हुए कहा कि यह समझौता फिलहाल केवल शुरुआती चरण में है और इसकी स्थिरता अनिश्चित बनी हुई है।
यह संघर्ष विराम अमेरिका की ओर से ईरान को दिए गए अल्टीमेटम के बाद हुआ, जिसमें प्रमुख समुद्री मार्गों को खोलने और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को रोकने की शर्त रखी गई थी। वेंस ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर वार्ताकारों ने यह स्पष्ट किया था कि समुद्री मार्ग को खोलने के बदले युद्धविराम लागू किया जाएगा।
समझौते के तहत ईरान ने रणनीतिक जलमार्गों को फिर से खोलने पर सहमति जताई, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने सैन्य हमले रोक दिए हैं। वेंस ने कहा, “ईरान ने जलमार्ग खोलने पर सहमति दी है और अमेरिका ने हमले रोक दिए हैं।”
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पंजाब ने केंद्र सरकार से मदद मांगी, 35 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल बारिश से प्रभावित
चंडीगढ़, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने बुधवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य में बेमौसम भारी बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं तथा अन्य रबी फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक उच्च-स्तरीय टीम भेजे।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे एक पत्र में उन्होंने गेहूं की फसलों पर खराब मौसम के गंभीर प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 35 लाख हेक्टेयर में बोए गए गेहूं से बंपर फसल की उम्मीद थी, लेकिन लगातार बारिश और ओलावृष्टि ने काफी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसान समुदाय संकट में आ गया है।
खुडियां ने कहा कि राज्य के कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार 1.30 लाख एकड़ से अधिक जमीन पर फसल के नुकसान की सूचना मिली है। बारिश होने के कारण नुकसान बढ़ रहा है, और अंतिम आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि यह नुकसान सिर्फ गेहूं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि फाजिल्का, फिरोजपुर, मुक्तसर साहिब, बठिंडा, अमृतसर, मोगा और मानसा सहित कई जिलों में सब्जियां, चारा और अन्य रबी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। फसल का नुकसान किसानों की आजीविका और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन गया है।
खुडियां ने कहा कि राज्य सरकार ने फसल के नुकसान का आकलन करने के लिए पहले ही एक विशेष गिरदावरी (सर्वेक्षण) का आदेश दे दिया है। नुकसान की व्यापकता और किसानों पर पड़े आर्थिक बोझ को देखते हुए, उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विस्तृत आकलन के लिए एक केंद्रीय टीम की तत्काल आवश्यकता है, और साथ ही यह आश्वासन भी दिया कि राज्य सरकार अपने किसानों का समर्थन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और केंद्रीय टीम को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।
--आईएएनएस
एसडी/एमएस
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