एलपीजी की सप्लाई सुचारू रूप से जारी, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है: आईओसीएल
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने बुधवार को कहा कि पूरे देश में एलपीजी की सप्लाई सुचारू रूप से चल रही है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही, घरों के लिए सिलेंडरों की बिना किसी रुकावट के उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे प्रयास किए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में आईओसीएल ने ग्राहकों से शांत रहने और बेवजह बुकिंग से बचने की अपील की। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि पर्याप्त सिलेंडर आसानी से उपलब्ध हैं और वितरण व्यवस्था भी ठीक से काम कर रही है।
आईओसीएल ने कहा कि एलपीजी की सप्लाई सुचारू है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इंडियन ऑयल हर घर तक सिलेंडर आसानी से पहुंचाने के लिए दिन-रात काम कर रहा है। कृपया शांत रहें और बेवजह बुकिंग से बचें।
यह भरोसा ऐसे समय में दिया गया है जब सरकार घरेलू और औद्योगिक, दोनों तरह के ग्राहकों के लिए एलपीजी की सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
इससे पहले दिन में, केंद्र सरकार ने घोषणा की कि कमर्शियल एलपीजी की सीमा को बढ़ाकर मार्च 2026 से पहले के थोक खपत स्तर का 70 प्रतिशत कर दिया गया है। अब इस बढ़ी हुई सीमा का फायदा कई औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा, जिनमें फार्मा, खाद्य, पॉलीमर, कृषि, पैकेजिंग, पेंट, स्टील और कांच उद्योग शामिल हैं।
हालांकि, एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह बढ़ी हुई हिस्सेदारी कुल मिलाकर 0.2 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षेत्रीय सीमा के अधीन होगी। इस हिस्सेदारी के तहत थोक एलपीजी चाहने वाले उद्योगों को तेल मार्केटिंग कंपनियों के साथ पंजीकरण कराने और सिटी गैस वितरण (सीजीडी) संस्थाओं से पाइप वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) कनेक्शन के लिए आवेदन करने से जुड़ी शर्तों का भी पालन करना होगा।
हालांकि, उन इकाइयों को छूट दी गई है जहां एलपीजी विनिर्माण प्रक्रिया में एक जरूरी कच्चा माल है, या जहां इसका इस्तेमाल किसी ऐसे विशेष काम के लिए होता है जिसकी जगह प्राकृतिक गैस नहीं ले सकती। इस बीच, कमजोर तबकों के लिए भी सप्लाई में बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने 5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडरों की औसत दैनिक सप्लाई को दोगुना कर दिया है; इन सिलेंडरों का इस्तेमाल आम तौर पर प्रवासी मजदूर करते हैं।
फरवरी में जहां औसतन 77,000 सिलेंडर बिकते थे, वहीं अब रोजाना 1.1 लाख से ज्यादा ऐसे सिलेंडर बिक रहे हैं। 23 मार्च से अब तक, पूरे देश में लगभग 8.9 लाख 5 किलोग्राम वाले सिलेंडर बिक चुके हैं।
इसके अलावा, कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता भी मजबूत बनी हुई है। 14 मार्च से अब तक लगभग 93,085 मीट्रिक टन एलपीजी बेची जा चुकी है।
--आईएएनएस
एसडी/एमएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ में ईरान पर हुए 13,000 से ज्यादा हमले, 13 अमेरिकी सैनिक शहीद
वॉशिंगटन, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। पेंटागन की ओर से बुधवार को एक बयान जारी करते हुए बताया कि अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया। यह एक बड़ा सैन्य अभियान रहा, जिसमें अमेरिका ने अपने 13 सैनिकों को खो दिया।
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन, एयर फोर्स जनरल डैन केन ने कहा कि इस ऑपरेशन का पैमाना इसकी तीव्रता और पहुंच को दिखाता है।
उन्होंने कहा, “युद्ध कार्रवाई शुरू होने के बाद से, अमेरिकी संयुक्त बलों ने 13,000 से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया।”
इनमें से 4,000 से ज्यादा ऐसे लक्ष्य थे जो युद्ध के दौरान अचानक सामने आए और उन्हें तुरंत तेज कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए निशाना बनाया गया।
इस ऑपरेशन में 10,000 से ज्यादा मिशन शामिल थे, जिनमें 62 बॉम्बर उड़ानें भी थीं। इनमें से कुछ उड़ानें अमेरिका से ईरान तक जाकर और वापस आने में 30 घंटे से भी ज्यादा चलीं।
केन ने कहा कि दुनिया में कोई और सेना ऐसा नहीं कर सकती, और इसे अमेरिका की लॉजिस्टिक क्षमता का उदाहरण बताया।
इस अभियान में ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे के कई हिस्सों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी बलों ने 450 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल स्टोरेज साइट, 801 ड्रोन स्टोरेज जगहें, और 1,500 से ज्यादा एयर डिफेंस टारगेट नष्ट किए, जिससे ईरान की करीब 80 प्रतिशत हवाई रक्षा क्षमता खत्म हो गई।
केन ने कहा कि इस ऑपरेशन में ईरान के कमांड और कंट्रोल नेटवर्क को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचाया गया। 2,000 से ज्यादा ऐसे सिस्टम नष्ट किए गए, जिससे उनकी सैन्य प्रतिक्रिया समन्वय करने की क्षमता कमजोर हो गई।
उन्होंने कहा कि हमने ईरान के कमांड, कंट्रोल और लॉजिस्टिक नेटवर्क को बुरी तरह तबाह कर दिया है।
नौसैनिक कार्रवाई भी काफी बड़ी रही। अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान के 90 प्रतिशत से ज्यादा नौसैनिक बेड़े को डुबो दिया, जिसमें बड़े युद्धपोत भी शामिल थे, और 700 से ज्यादा हमलों के जरिए 95 प्रतिशत से ज्यादा नौसैनिक माइंस को नष्ट कर दिया।
इस हमले का असर ईरान के रक्षा उद्योग पर भी पड़ा। लगभग 90 प्रतिशत हथियार फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया, जिनमें ड्रोन और मिसाइल के पुर्जे बनाने वाली फैक्ट्रियां भी शामिल थीं।
केन ने कहा कि ईरान के न्यूक्लियर इंडस्ट्रियल बेस का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा भी प्रभावित हुआ।
इस ऑपरेशन के लिए 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों को सेंट्रल कमांड क्षेत्र और अन्य ठिकानों पर तैनात किया गया।
उन्होंने कहा कि इस पूरे अभियान के दौरान, पेंटागन ने 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत की भी पुष्टि की। केन ने कहा कि हम अपने शहीदों और उनके परिवारों को कभी नहीं भूलते… खासकर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में शहीद हुए 13 सैनिकों को।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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