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अमेरिका-ईरान युद्धविराम में पाकिस्तान ने निभाया अहम रोल : महबूबा मुफ्ती

श्रीनगर, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी है। एक तरफ जहां महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह मुस्लिम समुदाय के लिए खुशी का दिन है, वहीं फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि लड़ाई से किसी को फायदा नहीं हुआ है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि इस युद्ध में इजरायल को बड़ा नुकसान हुआ है, वहां भी तबाही है। इस तबाही को लड़ाई से कम नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि किस लड़ाई से फायदा हुआ है। किसी भी लड़ाई से फायदा नहीं हुआ, बल्कि तबाही ही बढ़ी है। अब यह युद्ध बंद होना चाहिए।

श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अगर दोनों पक्ष बातचीत की टेबल पर आना चाहते हैं, तो यह मुस्लिम समुदाय के लिए अच्छी खबर है। इसमें पाकिस्तान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान का बड़ा अहम रोल रहा है कि उसने दुनिया को जंग के मुहाने से वापस लाने में मदद की।

महबूबा मुफ्ती ने आगे कहा कि ईरान की बहादुरी और उसकी हिम्मत की तारीफ करनी चाहिए। वहीं अमेरिका और इजरायल ने ईरान के स्कूलों पर हमला किया, बच्चों की जान ली और कॉलेजों को तोड़ दिया। पुल और पावर हाउस बर्बाद कर दिए, लोगों को निशाना बनाया। इसके मुकाबले ईरान ने सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। उन्होंने स्कूल और अस्पतालों पर हमला नहीं किया।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी देखना चाहिए कि इतने मुश्किल हालात में भी इस कौम के लोग आपे से बाहर नहीं हुए। इसके लिए ईरान के लोग बधाई के पात्र हैं। यह जो सीजफायर हुआ है, वह हमेशा के लिए लागू हो जाए और ईरान को फिर से आगे बढ़ने का मौका मिले।

श्रीनगर में पार्टी में नए सदस्यों के शामिल होने पर बोलते हुए पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, मैं पार्टी में शामिल होने वाले सभी लोगों का हार्दिक स्वागत करती हूं। मैं युवाओं के इस पार्टी में प्रवेश को सकारात्मक कदम मानती हूं, क्योंकि वर्तमान में जो समस्याएं हैं, वे मुख्य रूप से युवाओं को प्रभावित करती हैं। युवाओं को पुलिस स्टेशनों में बुलाया जाता है और सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट करने पर हिरासत में ले लिया जाता है। बेरोजगारी युवाओं पर बोझ है। युवाओं के लिए वर्तमान वातावरण घुटन भरा है, वे खुलकर बोल नहीं पाते। मुझे खुशी होती है जब युवा हमारी पार्टी में शामिल होते हैं।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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आईएमएफ के नियमों के बावजूद पाकिस्तान ने घटाई पेट्रोल लेवी : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान से कहा है कि वह डीजल पर सब्सिडी हटाए, क्योंकि बाजार की कीमत से कम पर ईंधन देना उनके लोन की शर्तों के खिलाफ है। इसके बावजूद, इस्लामाबाद ने खुलकर नियमों की अनदेखी करते हुए पेट्रोल पर भी सब्सिडी घटा दी है।

कराची के अखबार डॉन के लेख में कहा गया, “पेट्रोल पर लेवी को कम करने का प्रधानमंत्री का शुक्रवार रात का फैसला यह दिखाता है कि सरकार अपने पुराने आर्थिक खेल पर वापस आ गई है।”

इस कदम से अभी आईएमएफ के ताजा स्टाफ-स्तरीय समझौते पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा, लेकिन लेंडर डीजल की कीमतों में मौजूद असंतुलन को लेकर चिंतित हैं। यह असंतुलन सात मार्च को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हाल की घटनाओं के बाद पहली एडजस्टमेंट के बाद आया और आईएमएफ चाहता है कि इसे जल्दी हटाया जाए।

शुरुआत में सरकार ने डीजल पर पेट्रोलियम लेवी से होने वाली राजस्व की कमी को पेट्रोल पर बढ़े लेवी के जरिए पूरा करने की योजना बनाई थी। डीजल पर लेवी बजट में तय 80 रुपए प्रति लीटर के मुकाबले अभी शून्य है। लेकिन, प्रधानमंत्री ने पेट्रोल पर लेवी 80 रुपए प्रति लीटर घटा दी, ताकि सबको राहत मिले, न कि सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को।

आईएमएफ ने शुरू में सरकार की ओर से घोषित टारगेटेड सब्सिडी को चुपचाप बर्दाश्त कर लिया, शायद इसलिए क्योंकि इससे लेवी के रेवेन्यू टारगेट को नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, पिछले हफ्ते की घोषणा ने उस स्थिति को काफी बदल दिया है।

इसका मतलब यह है कि सरकार के लिए जनता को राहत देने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता जा रहा है। इस लोकप्रिय कदम से एक बड़ा राजस्व स्रोत कमजोर होगा, जबकि टैक्स कलेक्शन अभी भी लक्ष्य से कम है।

इससे आईएमएफ प्रोग्राम के महत्वपूर्ण लक्ष्य जैसे प्राइमरी सरप्लस पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए कर्ज देने वाले का कमियों को दूर करने पर जोर देना आर्थिक दृष्टि से सही है। इस्लामाबाद की मुश्किलें काफी हद तक खुद की बनाई हुई हैं।

कई सालों तक टैक्स सुधार में देरी और फालतू खर्च को कम करने में संकोच की वजह से सरकार के पास बाहरी झटकों का सामना करने के लिए कम पैसे हैं। वर्तमान तेल कीमतों में वृद्धि और वैश्विक सप्लाई रूट में व्यवधान ने इन कमजोरियों को और उजागर कर दिया है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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