आरबीआई के रेपो रेट फैसले से क्रेडिट ग्रोथ, आर्थिक सुधार और वित्तीय स्थिरता को मिलेगा बढ़ावा: विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला अर्थव्यवस्था में चल रही रिकवरी को बनाए रखने, क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा देने और कर्ज की लागत को स्थिर रखने में मदद करेगा। अर्थशास्त्रियों और बैंकरों ने बुधवार को यह बात कही।
इंडियन ओवरसीज बैंक के एमडी और सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्रीय बैंक का यह फैसला संतुलित और सेफ्टी-फर्स्ट दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने एमएसएमई सेक्टर के लिए कारोबारी माहौल आसान बनाने पर आरबीआई के फोकस की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग के लिए ड्यू डिलिजेंस की शर्त हटाना एक सकारात्मक कदम है, जिससे छोटे व्यवसायों को लिक्विडिटी और वर्किंग कैपिटल तक आसान पहुंच मिलेगी।
साउथ इंडियन बैंक के एसजीएम और सीएफओ विनोद फ्रांसिस ने कहा, मौजूदा स्थिति में ब्याज दरों को स्थिर रखना बढ़ती महंगाई के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए वित्तीय प्रणाली को आवश्यक स्थिरता प्रदान करती है।
उन्होंने आगे कहा कि पर्याप्त लिक्विडिटी के साथ स्थिर ब्याज दर का माहौल रिटेल और एमएसएमई सेक्टर में कर्ज की मांग को बढ़ावा देगा और बैंकों के लिए एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट को मजबूत करेगा।
एस्सार कैपिटल के ऑपरेटिंग पार्टनर श्रीनिवासन वैद्यनाथन ने कहा कि आरबीआई का यह फैसला काफी हद तक उम्मीदों के अनुरूप है और यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखना चाहता है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बीच रुपए को ज्यादा कमजोर होने से बचाने पर भी आरबीआई का ध्यान है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है।
वहीं, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के एमडी और सीईओ त्रिभुवन अधिकारी ने कहा कि ब्याज दरों में स्थिरता से खासकर किफायती और मध्यम आय वर्ग के घर खरीदारों के लिए कर्ज लेना आसान बना रहेगा।
इसके अलावा, क्रिसिल लिमिटेड की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट दीप्ति देशपांडे ने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से ऊर्जा लागत के असर को कुछ हद तक नियंत्रित किया गया है, जिससे रिटेल महंगाई पर दबाव सीमित रहा है।
आईसीआरए लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और को-ग्रुप हेड, कॉर्पोरेट रेटिंग्स प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि युद्धविराम के बाद भी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई सामान्य होने में समय लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे सप्लाई शुरू होने से मौजूदा कमी में राहत मिलेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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Iran-US Ceasefire: सीजफायर को लेकर Israel में नाराजगी, क्या Netanyahu पर है Trump का दबाव, देखें ग्राउंड रिपोर्ट
ईरान के डिप्टी स्पीकर नेगजात का बड़ा बयान सामने आया है कि अगर अमेरिका ने 10 शर्तें नहीं मानी तो वो इस डील पर साइन नहीं करेंगे. लेकिन इस बीच लेबनान पर हमले के बीच ईरान की चेतावनी आई है. लेबनान पर हमला सीजफायर का उल्लंघन है. हमले अगर नहीं रुके तो हर मोर्चे पर लड़ाई फिर से शुरू होने का कारण बनेंगे. यह समझना जरूरी है कि 40 दिन के युद्ध में अमेरिका, इजराइल और ईरान को क्या हासिल हुआ.
15 सैनिक अमेरिकी सैनिक मरे, 538 से ज्यादा घायल
बात अगर अमेरिका इजराइल की जाए तो रिजीम चेंज का प्लान पूरी तरह से नाकाम हुआ. ईरान की टॉप लीडरशिप का खात्मा मुख्य रणनीतिक लक्ष्यों में एक बड़ी जो नाकामी है. सैन्य साख पर बड़ी चोट पहुंची. अमेरिका के 15 सैनिक मरे. 538 से ज्यादा घायल हुए. वहीं ईरान की अगर बात की जाए तो हॉर्मोन स्टेट पर रणनीतिक कंट्रोल, दमदार जंगी क्षमता का प्रदर्शन, रिजीम की पकड़ पहले से अधिक मजबूत यहां पर देखने को मिली. न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम पर चोट, जान और माल का भारी नुकसान हुआ है.आपने देखा कि 40 दिन के इस युद्ध में आखिर क्या हासिल होता नजर आया.
निर्देशों के अनुसार सीजफायर
हासिल तो कुछ नहीं लेकिन गंवाया दरअसल उसने यहां पर यह आप इसको इस तरह से समझिए कि अमेरिका के 15 सैनिक मारे जाते हैं. 538 से ज्यादा घायल हो जाते हैं. इस बीच आपको बता दें कि सीज फायर पर आईडीएफ का बड़ा बयान सामने आया है. रात भर ईरान में बड़े पैमाने पर हमले किए लेकिन निर्देशों के अनुसार सीज फायर कर दिया. हिजबुल्ला के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा. आईडीएफ का कहना है निर्देशों के अनुसार सीजफायर कर दिया है. यही बात यहां पर कह रही थी कि इजराइल दरअसल बिल्कुल भी इसके समर्थन में भले ही वो वैसे बता रहा हो कि हां ठीक है हम समर्थन में है लेकिन वो इससे नाखुश है. हमारे संवाददाता राहुल डबास ने ग्राउड रिपोर्ट ने पेश करते हुए बताया कि इजराइल ने ट्रंप के सीज फायर को माना है लेकिन रात भर हमले उन्होंने किए और लेबनान पर तो हमले जारी रहेंगे. लेबनान की तरफ से भी लगातार हमले हो रहे हैं.
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