Iran-US Ceasefire: सीजफायर को लेकर Israel में नाराजगी, क्या Netanyahu पर है Trump का दबाव, देखें ग्राउंड रिपोर्ट
ईरान के डिप्टी स्पीकर नेगजात का बड़ा बयान सामने आया है कि अगर अमेरिका ने 10 शर्तें नहीं मानी तो वो इस डील पर साइन नहीं करेंगे. लेकिन इस बीच लेबनान पर हमले के बीच ईरान की चेतावनी आई है. लेबनान पर हमला सीजफायर का उल्लंघन है. हमले अगर नहीं रुके तो हर मोर्चे पर लड़ाई फिर से शुरू होने का कारण बनेंगे. यह समझना जरूरी है कि 40 दिन के युद्ध में अमेरिका, इजराइल और ईरान को क्या हासिल हुआ.
15 सैनिक अमेरिकी सैनिक मरे, 538 से ज्यादा घायल
बात अगर अमेरिका इजराइल की जाए तो रिजीम चेंज का प्लान पूरी तरह से नाकाम हुआ. ईरान की टॉप लीडरशिप का खात्मा मुख्य रणनीतिक लक्ष्यों में एक बड़ी जो नाकामी है. सैन्य साख पर बड़ी चोट पहुंची. अमेरिका के 15 सैनिक मरे. 538 से ज्यादा घायल हुए. वहीं ईरान की अगर बात की जाए तो हॉर्मोन स्टेट पर रणनीतिक कंट्रोल, दमदार जंगी क्षमता का प्रदर्शन, रिजीम की पकड़ पहले से अधिक मजबूत यहां पर देखने को मिली. न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम पर चोट, जान और माल का भारी नुकसान हुआ है.आपने देखा कि 40 दिन के इस युद्ध में आखिर क्या हासिल होता नजर आया.
निर्देशों के अनुसार सीजफायर
हासिल तो कुछ नहीं लेकिन गंवाया दरअसल उसने यहां पर यह आप इसको इस तरह से समझिए कि अमेरिका के 15 सैनिक मारे जाते हैं. 538 से ज्यादा घायल हो जाते हैं. इस बीच आपको बता दें कि सीज फायर पर आईडीएफ का बड़ा बयान सामने आया है. रात भर ईरान में बड़े पैमाने पर हमले किए लेकिन निर्देशों के अनुसार सीज फायर कर दिया. हिजबुल्ला के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा. आईडीएफ का कहना है निर्देशों के अनुसार सीजफायर कर दिया है. यही बात यहां पर कह रही थी कि इजराइल दरअसल बिल्कुल भी इसके समर्थन में भले ही वो वैसे बता रहा हो कि हां ठीक है हम समर्थन में है लेकिन वो इससे नाखुश है. हमारे संवाददाता राहुल डबास ने ग्राउड रिपोर्ट ने पेश करते हुए बताया कि इजराइल ने ट्रंप के सीज फायर को माना है लेकिन रात भर हमले उन्होंने किए और लेबनान पर तो हमले जारी रहेंगे. लेबनान की तरफ से भी लगातार हमले हो रहे हैं.
ईरान शुरू से ही शांति चाहता था, शर्तें मान लीं तो स्थायी संघर्ष विराम संभव: सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि इलाही
दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान में संघर्ष विराम की घोषणा की चौतरफा प्रशंसा हो रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक ट्रुथ सोशल पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। ईरान की ओर से भी 2 हफ्ते की अस्थायी सहमति जताई गई है। बदले भू-राजनीतिक हालात के बीच कुछ सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। भारत में ईरानी सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने ईरान की सोच-विचार और उसकी कोशिशों के बारे में बताया है। आईएएनएस से एक्सक्लूसिव बातचीत में इलाही ने स्पष्ट कहा कि ईरान ये संघर्ष नहीं चाहता था और हम कभी भी न्यूक्लियर वेपन के समर्थक नहीं रहे।
डॉ. इलाही मानते हैं कि अमेरिका संघर्षविराम के लिए मजबूर हुआ। उन्होंने इसकी वजहें भी गिनवाईं। कहा, यूएस को संघर्ष विराम का ऐलान करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि वे जंग जारी नहीं रख सकते थे। उन्होंने बहुत बड़ी गलती की थी। पिछले 41 दिनों में वे जंग रोकना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके। आखिर में, जब उन्हें एहसास हुआ कि वे इस युद्ध को जारी नहीं रख सकते और वे और हारेंगे, तो उन्होंने सीजफायर के नाम पर इस युद्ध को रोकने का ऐलान किया।
इलाही ने कहा, मुझे लगता है कि शुरू से ही हम जंग नहीं चाहते थे। यह जंग हम पर थोपी गई थी। दूसरी बात, हमें एहसास हुआ कि इस जंग से अलग-अलग देशों के बहुत से अलग-अलग लोगों को नुकसान हुआ है, और हम ऐसा नहीं चाहते थे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि सीजफायर से कोई स्थायी हल निकल सकता है? तो ईरान के सुप्रीम लीडर के रिप्रेजेंटेटिव बोले, हमारी शर्त के साथ, अगर वे हमारी शर्तें मान लेते हैं, तो हां, यह इस जंग का अंत होगा।
अमेरिका का आरोप कि ईरान यूरेनियम संवर्द्धन में लगा है पर ईरान का क्या मत है? डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अपने सर्वोच्च नेता की बात याद करते हुए कहा, ...शुरू से ही, शायद 30 साल या उससे भी पहले, हमारे सुप्रीम लीडर ने साफ-साफ ऐलान किया था कि परमाणु हथियार हमारे धर्म के हिसाब से हराम है, ये हमारे पास नहीं हो सकता। हम नहीं चाहते, हम नहीं चाहते थे, हम अभी नहीं चाहते और भविष्य में भी नहीं, कभी नहीं, हम न्यूक्लियर वेपन नहीं चाहते और यह बात सब जानते हैं।
आखिर जो संकट पैदा हुई उसकी वजह क्या रही? गल्फ देशों ने भी ईरान पर कुछ आरोप लगाए हैं। इस पर इलाही ने कहा, इस इलाके में झगड़े, संकट तब से पैदा हुए जब से अमेरिका 7,000 मील दूर से इस इलाके में आया और इस इलाके में बहुत सारे झगड़े और मुश्किलें लेकर आया। यह पहली बात है। दूसरी बात जो मैं ऐलान करना चाहता हूं, वह यह है कि हम जानते हैं कि अमेरिका हम पर न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, वाशिंगटन से हमला नहीं करता। वे बेस कहां हैं जिनका इस्तेमाल करके अमेरिका ने हम पर हमला किया? बिल्कुल, वे बेस इसी अरब देश में थे।
ईरान को उम्मीद है कि दुनिया समझ चुकी है कि इस क्षेत्र को छेड़ा तो नुकसान किसी एक को नहीं पूरी दुनिया को उठाना पड़ सकता है। इलाही ने उम्मीद जताई कि वैश्विक संकट खत्म हो जाएगा। बोले, मुझे उम्मीद है कि यह ग्लोबल संकट खत्म हो जाएगा, लेकिन दूसरे देशों को एहसास है कि अगर इस खाड़ी, फारस की खाड़ी में लड़ाई और संकट होता है, तो उन्हें नुकसान होगा। इसलिए अब उन्हें एक साथ आवाज उठानी होगी और इस इलाके में किसी भी देश पर हमला करने से रोकना होगा।
--आईएएनएस
केआर/
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