सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल खतरनाक, रोजाना डिजिटल समय को ऐसे करें कंट्रोल
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा समय तक सोशल मीडिया पर रहने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इस पर कंट्रोल करना बेहद जरूरी है।
नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन पर बिताया गया समय हमारी सोच को सीमित कर देता है और वास्तविक दुनिया से दूर ले जाता है। इससे एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, अकेलापन और पारिवारिक संबंधों में तनाव जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। कई लोग सोशल मीडिया की लत का शिकार हो रहे हैं, जिससे उनकी दिनचर्या और मानसिक शांति दोनों प्रभावित हो रही है।
यही नहीं सोशल मीडिया की लगातार नोटिफिकेशन, लाइक्स और कमेंट्स की चाहत व्यक्ति को लगातार ऑनलाइन रहने के लिए मजबूर करती है। इससे नींद की कमी, तनाव और उदासी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। यंग जनरेशन में यह समस्या और भी ज्यादा देखी जा रही है। ऐसे में डिजिटल समय को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट कुछ उपाय सुझाते हैं, जो कारगर है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित डिजिटल जीवन जीना बहुत जरूरी है। सोशल मीडिया का उपयोग सूचनाओं और जुड़ाव के लिए करें, लेकिन इसे जीवन का केंद्र न बनने दें। अगर आप महसूस करते हैं कि सोशल मीडिया आपकी दिनचर्या और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, तो तुरंत अपने उपयोग पर नियंत्रण करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें।
समय सीमा तय करें: रोजाना सोशल मीडिया के लिए सिर्फ 30-45 मिनट का समय तय करें।
डिजिटल डिटॉक्स: हर दिन कम से कम 4 से 5 घंटे स्क्रीन से दूर रहें। सुबह और रात को फोन खुद से दूर रखें।
नोटिफिकेशन ऑफ करें: अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद कर दें, ताकि बार-बार फोन चेक करने की आदत न बने।
ऑफलाइन एक्टिविटीज पर काम करें: किताब पढ़ना, व्यायाम करना, परिवार के साथ समय बिताना और शौक पूरे करना शुरू करें।
स्क्रीन टाइम ऐप्स का उपयोग करें: फोन में उपलब्ध स्क्रीन टाइम ट्रैकर ऐप्स से अपने इस्तेमाल पर नजर रखें।
नींद का ध्यान रखें : सोने से कम से कम 1 घंटा पहले सोशल मीडिया बंद कर दें या मोबाइल दूर कर दें।
परिवार के साथ नियम बनाएं: घर में नो फोन डिनर या फैमिली टाइम जैसे नियम लागू करें।
--आईएएनएस
एमटी/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत के नक्शेकदम पर चला नेपाल, पेट्रोलियम उत्पाद शुल्क में कटौती का ऐलान
काठमांडू, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल की नई सरकार ने मंगलवार को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर कुछ टैक्स छूट देने का फैसला किया, ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम किया जा सके। यह ऐलान भारत सरकार के फैसले से मेल खाता है।
मंगलवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में पेट्रोल, डीजल और केरोसीन पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी और इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स में 50 फीसदी की छूट को मंजूरी दी गई, संघीय मामलों और सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने पत्रकारों को बताया। उन्होंने कहा, यह फैसला नेपाल गजट में प्रकाशित किया जाएगा।
अभी, पेट्रोल पर 25.23 एनपीआर (नेपाली रुपया) प्रति लीटर कस्टम ड्यूटी लगती है, जबकि डीजल पर 12.02 एनपीआर प्रति लीटर टैक्स लगता है। इसके अलावा, दोनों फ्यूल पर 10 एनपीआर प्रति लीटर का इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स लगता है। इन दो टैक्स के अलावा, सरकार वैल्यू-एडेड टैक्स (वैट), रोड मेंटेनेंस टैक्स, प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड चार्ज, पॉल्यूशन टैक्स और ग्रीन टैक्स जैसे अतिरिक्त शुल्क लेवी भी लगाती है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति पर रोक लगी हुई है। इस वजह से, इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। इससे परिवहन और बीमा का खर्च भी बढ़ गया है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन पर निर्भर सामान की कीमतें बढ़ गई हैं। एशियाई देश इस रुकावट से खास तौर पर प्रभावित हुए हैं, क्योंकि वे खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
नेपाल सीधे खाड़ी या दूसरे क्षेत्रों से पेट्रोलियम उत्पाद आयात नहीं करता है, बल्कि रिफाइंड फ्यूल के लिए पूरी तरह से भारत पर निर्भर है। हालांकि, भारत खुद ईंधन आयात में चुनौतियों का सामना कर रहा है। मार्च के आखिर में, भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर कम कर दी, जिससे पेट्रोल के लिए यह 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल के लिए जीरो हो गई।
पिछले वित्त वर्ष में, नेपाल ने 288 बिलियन एनपीआर का पेट्रोलियम उत्पाद आयात किया था।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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