अमेरिका की कठपुतली बना पाकिस्तान, ट्रंप का ऑर्डर फॉलो करते हैं शहबाज; जानें कैसा खुला राज
दावा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का कार्यालय शायद वह हिस्सा हटाना भूल गया जो संभवतः अमेरिकी निर्देश का हिस्सा था। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई है कि क्या पाकिस्तान के संदेश सीधे वाशिंगटन से लिखकर आ रहे हैं।
US-Iran Ceasefire: 'मैं 2 हफ्ते तक हमले रोकने पर सहमत हूँ', ट्रंप की डेडलाइन से चंद मिनट पहले कैसे बनी बात?
दुनिया जिस समय सांसें थामकर ट्रंप की उस डेडलाइन के खत्म होने का इंतजार कर रही थी, जिसमें उन्होंने 'ईरानी सभ्यता के अंत' की घोषणा की थी, ठीक उसी समय कूटनीति ने अपना जादू दिखाया।
राष्ट्रपति ट्रंप, जिन्होंने परमाणु हमले जैसे संकेत दिए थे, अचानक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद दो हफ्तों के युद्धविराम पर सहमत हो गए।
???? President Donald J. Trump makes a statement on Iran: pic.twitter.com/9mqTayL0Q3
— The White House (@WhiteHouse) April 7, 2026
OFFICIAL STATEMENT OF IRAN: pic.twitter.com/IZ9qoGpgK8
— The White House (@WhiteHouse) April 7, 2026
यह सीजफायर न केवल बारूदी धुएं को कम करेगा, बल्कि वर्षों पुराने इस संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए बातचीत की मेज सजाएगा।
ट्रंप का ऐलान: "मैं दो हफ्तों के लिए बमबारी स्थगित करने पर सहमत हूँ"
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, "मैं दो हफ्तों के लिए ईरान पर बमबारी और हमलों को स्थगित करने पर सहमत हूँ।
यह एक दोतरफा युद्धविराम होगा।" ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को पहले ही हासिल कर चुका है और अब वह दीर्घकालिक शांति के लिए एक ठोस समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यह रोक सशर्त है और ईरान को 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को तुरंत खोलना होगा।
ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: पाकिस्तान के जरिए पहुंची 'डील'
ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है, जिसे ट्रंप ने बातचीत के लिए एक 'व्यवहारिक आधार' बताया है। इस 10-सूत्रीय प्रस्ताव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता
2. होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण जारी रहना
3. यूरेनियम संवर्धन की स्वीकृति
4. सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना
5. सभी द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाना
6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना
7. बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना
8. ईरान को मुआवजे का भुगतान
9. क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी
10. लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ़ लड़ाई समेत सभी मोर्चों पर युद्ध विराम
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है। ट्रंप ने स्वीकार किया कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर के साथ हुई गहन बातचीत के बाद लिया गया है, जिन्होंने प्रस्तावित विनाशकारी हमलों को टालने की अपील की थी। अब समझौते के अगले दौर की बातचीत भी पाकिस्तान में ही होने की संभावना है।
व्हाइट हाउस का कड़ा संदेश: "दशकों पुराना आतंक खत्म होगा"
सीजफायर के बावजूद व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि "ईरान का दशकों पुराना आतंकवाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में जारी नहीं रहेगा।"
ट्रंप ने संकेत दिया कि ये दो हफ्ते दोनों पक्षों को पीछे हटने और समझौते को अंतिम रूप देने का मौका देंगे। फिलहाल, इजरायल भी अमेरिका के इस फैसले के साथ खड़ा है और उसने भी अपने हमले रोकने पर सहमति जताई है।
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