असम विधानसभा चुनाव के लिए सभी सियासी दल जोर-शोर से चुनावी रैलियां कर रहे हैं। जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रही है। तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी सत्ता के वनवान का अज्ञातवास खत्म होने की आस लगाए बैठी है। बता दें कि साल 2016 में राज्य में पहली बार भाजपा जीत हासिल कर सत्ता में आई थी। ऐसे में विपक्षी दल लगातार सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ मुद्दे उठाकर पार्टी को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में असम चुनाव के यह मुद्दे सत्ता दल के लिए टेंशन बढ़ा सकते हैं।
राज्य के प्रमुख मुद्दे
एंटी-इंकमबेंसी
भारतीय जनता पार्टी राज्य में विकास की बात जोर-शोर से कर रही है। लेकिन कुछ ऐसे बड़े मुद्दे हैं, जिनकी ओर विपक्षी पार्टियों के जोरदार अपील करने पर हार-जीत का मामला 50-50 हो सकता है।
महंगाई
जरूर चीजों के लगातार दाम बढ़ते जा रहे हैं। जोकि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ असम में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य में खाद्य महंगाई में तेज वृद्धि देखने को मिली है। जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मतदाता प्रभावित हैं।
राज्य के अन्य सियासी दल महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले हुए हैं। जिसको सत्ता विरोधी लहर के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन सत्ताधारी दल ने आरोपों को सिरों से खारिज कर दिया है और अपनी 'विकास परियोजनाओं' पर ध्यान केंद्रित किया है।
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असम की शिवसागर विधानसभा सीट एक अहम सीट है। यह विधानसभा सीट ब्रह्मपुत्र घाटी के मैदानों में है और नागालैंड बॉर्डर के पास है। यहां पर बड़े चाय के बागान है। इस बार के विधानसभा चुनाव में शिवसागर सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। राज्य में 09 अप्रैल 2026 को एक चरण में मतदान होने हैं और मतगणना 04 मई 2026 को होगी।
कौन-कौन चुनावी मैदान में
शिवसागर विधानसभा सीट से रायजोर दल से अखिल गोगोई, भारतीय जनता पार्टी से कुशल डोवारी और AGP से प्रदीप हजारिका चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। तीनों प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि किसके सिर पर जनता जीत का सेहरा सजाती है।
राजनीतिक इतिहास
साल 1951 में बनी शिवसागर सीट पर अब तक 15 विधानसभा चुनाव हुए हैं। जिनमें से सबसे ज्यादा 8 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है। सीपीआई ने 5 बार और एक-एक निर्दलीय सीट के अलावा रायजोर दल ने भी जीत हासिल की है। साल 2021 के चुनाव में शिवसागर सीट से नए राजयोर दल के फाउंडर प्रेसिडेंट अखिल गोगोई ने जीत हासिल की थी।
वहीं भारतीय जनता पार्टी को यहां से एक बार भी जीत नहीं मिली है। इसलिए यह चुनाव भाजपा के लिए खाता खोलने का मौका हो सकता है। इस सीट पर मुसलमानों का भी प्रभाव है और करीब 17% का वोट बैंक बनाते हैं। इसलिए इस सीट से जीत हासिल करने के लिए मुस्लिम वोटर्स का साथ होना जरूरी हो जाता है। भारतीय जनता पार्टी और उनकी सहयोगी पार्टी एजीपी के लिए यह विधानसभा चुनाव अपना खाता खोलने का बड़ा मौका है। क्योंकि दोनों साथ में है।
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