हाल ही के सालों में कई राज्यों में चुनाव के दौरान घुसपैठ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने लगा है। लेकिन असम राज्य में यह आजादी के बाद से बड़ा मुद्दा रहा है। राज्य के पहले सीएम गोपीनाथ बारदोलाई ने साल 1950 में घुसपैठ के खिलाफ कड़ा कानून लाकर इस मुद्दे से निपटने का भरोसा दिया था। वहीं आजादी के करीब 75 साल बाद पहली बार असम के लोगों में इससे मुक्ति का भरोसा जगा है। भारतीय जनता पार्टी इस भरोसे के सहारे असम में हैट्रिक लगाने के प्रयास में जुटी है।
घुसपैठियों का मुद्दा
यही कारण है कि भाजपा के घोषणापत्र में घुसपैठ का मुद्दा सबसे ऊपर है। पार्टी नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में पार्टी यूसीसी लाने के अलावा घुसपैठियों को पूरी तरह से बाहर निकालने का वादा कर रही है। हिमंत बिस्व सरमा की भाजपा सरकार ने नामघरों से अवैध कब्जा हटाने के साथ-साथ 1.50 लाख बीघा जमीन को मुक्त कराया है। इससे पार्टी घुसपैठियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का संकेत देने में सफल रही है।
असम देश का एकमात्र ऐसा राज्य रहा है, जहां साल 1951 में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन लागू हुआ। लेकिन कालांतर में यह भरोसा क्षीण होता चला गया। इससे पहले भी अवैध घुसपैठ का मुद्दा सिर्फ चुनावी मुद्दे तक सीमित रहा। कांग्रेस समेत अन्य सभी पार्टियां इससे मुक्ति दिलाने का वादा करती रही हैं।
हालांकि बीजेपी ने इस मुद्दे को 'अस्मिता और सुरक्षा' का विषय बनाकर कांग्रेस पार्टी पर वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी इस दावे को सिर्फ चुनावी हथकंडा बता रही है। बीजेपी ने सत्ता में वापसी कर घुसपैठियों को चिह्नित कर राज्य से बाहर निकालने का वादा किया है।
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें परेशान, हताश और डरा हुआ बताया। यह घटना तब हुई जब असम पुलिस की एक टीम ने कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास का दौरा किया। पुलिस की यह कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल पासपोर्ट विवाद से संबंधित है, जो मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा द्वारा दर्ज कराई गई आपराधिक मानहानि की एफआईआर के बाद सामने आया है।
एक्स से बात करते हुए रमेश ने निजामुद्दीन पूर्व स्थित खेड़ा के घर के बाहर पुलिस अधिकारियों की तैनाती की निंदा की और इसे "चुड़ैल का शिकार" और "दंभिक" द्वारा राज्य मशीनरी का उपयोग करके विपक्ष की उन आवाजों को दबाने का प्रयास बताया जो कथित कुकर्मों को उजागर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जनहित में बुनियादी सवाल पूछने पर मेरे सहयोगी पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधिकारियों की पूरी फौज तैनात करना यह साबित करता है कि असम के मुख्यमंत्री परेशान, हताश और भयभीत हैं। यह कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि बदले की भावना से की गई कार्रवाई है, जिसमें एक तानाशाह विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रहा है। जो लोग डराते-धमकाते हैं, वे असल में डरे हुए होते हैं और उनके पास छिपाने के लिए बहुत कुछ होता है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि मुख्यमंत्री को हार का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी असम पुलिस की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री सरमा से आग्रह किया कि वे धमकियों और अपशब्दों का सहारा लेने के बजाय खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों का समाधान करें। उन्होंने कहा कि सरमा के खिलाफ लगाए गए आरोप गवाहों और सबूतों से समर्थित हैं और उनका उचित समाधान किया जाना चाहिए। यह विवाद दो दिन पहले खेरा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुयान सरमा के पास कई पासपोर्ट (भारतीय, यूएई और मिस्र) हैं, दुबई में उनकी कुछ संपत्तियां अज्ञात हैं और अमेरिका के व्योमिंग में उनकी एक कंपनी पंजीकृत है। सरमा परिवार ने इन आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया कि खेरा द्वारा साझा किए गए दस्तावेज़ "एआई द्वारा निर्मित मनगढ़ंत" और "छेड़छाड़ की गई तस्वीरें" हैं, जिन्हें पाकिस्तानी सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से प्रसारित किया गया था।
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