सावन आते ही बदल गया जोधपुर का रंग, झूलों की मस्ती, हरी चूड़ियों की खनक और लहरिया-बांधनी की चमक ने बांधा समां
Jodhpur Sawan Festival: सावन के आगमन के साथ राजस्थान के जोधपुर में मौसम के साथ बाजारों और गलियों की रंगत भी बदल गई है. हरियाली और बारिश के बीच सावन की पारंपरिक रौनक देखने को मिल रही है. महिलाओं के बीच हरी चूड़ियों का खास आकर्षण बना हुआ है, वहीं जगह-जगह झूले सावन की मस्ती को बढ़ा रहे हैं. राजस्थानी संस्कृति की पहचान लहरिया और बांधनी के रंग-बिरंगे परिधानों की भी बाजारों में खूब मांग देखने को मिल रही है. सावन के गीत, झूलों की मस्ती और पारंपरिक परिधानों ने शहर के माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया है. जोधपुर की यह रंगीन सावनी छटा लोगों को खूब आकर्षित कर रही है.
सरगुजा में आज भी जिंदा है माठा बनाने की 10-20 साल पुरानी परंपरा, लकड़ी की मथनी से तैयार होता है शुद्ध देसी माठा
रतन माझी बताते हैं कि मथनी लकड़ी के डंडे को काटकर बनाई जाती है, जिसके दोनों तरफ पैर होते हैं. यह मथनी आज के समय में बहुत कम मिलती है. रतन के अनुसार, यह विधि उन्हें उनके पूर्वजों ने सिखाई है. उनका कहना है कि लोहे का उपयोग करके हाथ से बनाया गया माठा सेहत और स्वाद दोनों के लिए अच्छा नहीं होता, जबकि मथनी से बने माठे का स्वाद बहुत अच्छा और स्वादिष्ट होता है.
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