सरगुजा में आज भी जिंदा है माठा बनाने की 10-20 साल पुरानी परंपरा, लकड़ी की मथनी से तैयार होता है शुद्ध देसी माठा
रतन माझी बताते हैं कि मथनी लकड़ी के डंडे को काटकर बनाई जाती है, जिसके दोनों तरफ पैर होते हैं. यह मथनी आज के समय में बहुत कम मिलती है. रतन के अनुसार, यह विधि उन्हें उनके पूर्वजों ने सिखाई है. उनका कहना है कि लोहे का उपयोग करके हाथ से बनाया गया माठा सेहत और स्वाद दोनों के लिए अच्छा नहीं होता, जबकि मथनी से बने माठे का स्वाद बहुत अच्छा और स्वादिष्ट होता है.
दिल्ली के युवाओं का कमाल! ₹3225 का यह सिस्टम बचाएगा बारिश का पानी, 10 साल बिना बिजली करेगा काम
Rainwater Harvesting System: दिल्ली के युवाओं की स्टार्टअप कंपनी 'नीरेन' ने जल संकट से निपटने के लिए मात्र 3225 रुपये में एक आधुनिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया है. कंपनी के सीईओ नैशाल शाह के मुताबिक, बिना बिजली के 10 साल से अधिक चलने वाला यह सिस्टम बारिश के पानी को दो बार फिल्टर कर घर की टंकी और ग्राउंडवाटर दोनों को रिचार्ज करता है. देश-विदेश में अब तक इसकी 30 हजार से ज्यादा यूनिट्स लग चुकी हैं.
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