World Health Day 2026: हेल्दी रहने के लिए आज से बदलें लाइफस्टाइल, अपनाएं ये 5 आदतें, बीमारियों को कहें अलविदा
World Health Day 2026: हर साल 07 अप्रैल को दुनियाभर में वर्ल्ड हेल्थ डे मनाया जाता है. इस दिन का मकसद लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक करना है. साथ ही उन्हें बेहतर लाइफस्टाइल अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है. यह दिन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जरूरी याद दिलाने वाला अवसर है कि सेहत ही असली दौलत है. इस दिन की शुरुआत साल 1950 में हुई थी. इसे मनाने के पीछे खास वजह है. 7 अप्रैल 1948 को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की स्थापना हुई थी. तभी से हर साल इस दिन स्वास्थ्य से जुड़े अहम मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है.
वर्ल्ड हेल्थ डे की थीम (World Health Day Theme 2026)
हर साल यह दिन एक खास थीम के साथ मनाया जाता है. साल 2026 की थीम है “Together for Health, Stand with Science” इसका मतलब है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा. साथ ही वैज्ञानिक सोच और तकनीक को अपनाना जरूरी है.
स्वास्थ्य के लिए विज्ञान क्यों है जरूरी
आज का समय तेजी से बदल रहा है. नई-नई बीमारियां सामने आ रही हैं. ऐसे में विज्ञान स्वास्थ्य क्षेत्र का सबसे बड़ा सहारा बन चुका है. नई दवाइयों का निर्माण, वैक्सीन का विकास और आधुनिक जांच तकनीक ये सब विज्ञान की देन हैं. महामारी के दौरान हमने देखा कि कैसे कम समय में वैक्सीन तैयार हुई. इससे लाखों लोगों की जान बच सकी. अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जीनोमिक रिसर्च की मदद से बीमारियों को पहले से ज्यादा सटीक तरीके से समझा जा रहा है. इससे इलाज आसान और तेज हो गया है.
हेल्दी रहने के 5 आसान टिप्स (Healthy Lifestyle Tips)
स्वस्थ रहने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाना बहुत जरूरी है. डॉक्टर भी यही सलाह देते हैं कि छोटी-छोटी चीजें बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं.
संतुलित आहार लें
रोजाना की डाइट में हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें. प्रोटीन और फाइबर भी जरूरी हैं. जंक फूड और ज्यादा मीठा खाने से बचें.
रोज करें एक्सरसाइज
दिन में कम से कम 30 मिनट जरूर एक्टिव रहें. तेज चलना, योग या हल्की दौड़ भी काफी है. इससे शरीर फिट रहता है और वजन कंट्रोल में रहता है.
पूरी नींद लें
डॉक्टर कहते हैं कि हेल्दी रहने के लिए हर दिन 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी है. नींद पूरी न होने से थकान और तनाव बढ़ता है. अच्छी नींद शरीर को रीफ्रेश करती है.
तनाव को करें कंट्रोल
आजकल स्ट्रेस आम समस्या बन गया है. योग, ध्यान और गहरी सांस लेने से तनाव कम किया जा सकता है. अपने पसंदीदा काम के लिए भी समय निकालें.
नियमित हेल्थ चेकअप
अक्सर लोग बीमारी बढ़ने के बाद ही डॉक्टर के पास जाते हैं. लेकिन समय-समय पर जांच कराना जरूरी है. इससे बीमारी का पता जल्दी चल जाता है और इलाज आसान होता है.
स्वस्थ समाज ही मजबूत देश की पहचान
वर्ल्ड हेल्थ डे हमें यह सिखाता है कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज बनाता है. जब लोग फिट रहते हैं, तो देश भी मजबूत बनता है. इस दिन का संदेश साफ है अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें. छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाएं और वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ें.
यह भी पढ़ें: World Health Day 2026: कब और क्यों मनाया जाता है विश्व स्वास्थ्य दिवस? जानें इस साल की थीम, इतिहास और महत्व
ईरान में फंसे पायलट के रेस्क्यू के लिए अमेरिका ने 155 एयरक्राफ्ट के साथ चलाया ऑपरेशन: ट्रंप
वाशिंगटन, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 100 से ज्यादा विमानों वाले एक बड़े अमेरिकी हवाई ऑपरेशन में ईरान में फंसे दो पायलट को बचाया गया। यह हाल के सालों में सबसे मुश्किल लड़ाकू खोज और रेस्क्यू मिशनों में से एक था।
बता दें, ईरान के खिलाफ अमेरिका के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान गुरुवार देर रात एक एफ-15 फाइटर जेट गिर गया। एफ-15 ई के दोनों क्रू मेंबर ईरानी इलाके में इजेक्ट हो गए थे। एक पायलट को कुछ ही घंटों में ढूंढकर बचा लिया गया, लेकिन दूसरा पायलट लापता हो गया था। अमेरिकी पायलट लगभग दो दिनों तक पकड़ में नहीं आया फिर उसे एक बड़े फॉलो-अप मिशन में निकाला गया।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित न्यूज कॉन्फ्रेंस में रिपोर्टरों से कहा, कुछ ही घंटों में, हमारी सेना ने दुश्मन के एयरस्पेस में 21 मिलिट्री एयरक्राफ्ट तैनात किए, कई बार दुश्मन की तरफ से बहुत भारी फायरिंग का सामना करना पड़ा। हम ईरान के ऊपर दिन में सात घंटे उड़ रहे थे।
ज्वाइंट चीफ्स के चेयरमैन डैन केन ने कहा कि इजेक्ट होने के बाद दोनों पायलट अलग-थलग हो गए, जिससे उन्हें सुरक्षित घर लाने के लिए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
पहले पायलट को दिन के उजाले में तब बचाया गया जब अमेरिकी एयरक्राफ्ट ईरानी एयरस्पेस में घुसा और दुश्मन सेनाओं से भिड़ा। दूसरा पायलट एक वेपन सिस्टम ऑफिसर था। वह जख्मी हालत में क्रैश साइट से बहुत दूर लैंड किया और दुश्मन के लोगों से घिरा हुआ था।
ट्रंप ने कहा कि वह काफी बुरी तरह घायल हो गया था और आतंकवादियों से भरे इलाके में फंसा हुआ था, जिससे उसे पकड़े जाने के डर से ऊबड़-खाबड़ इलाके से गुजरना पड़ा।
दूसरे रेस्क्यू मिशन का दायरा बहुत तेजी से बढ़ाया गया। ट्रंप ने कहा कि इसमें “155 एयरक्राफ्ट को शामिल किया गया, जिनमें चार बॉम्बर, 64 फाइटर, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर, 13 रेस्क्यू एयरक्राफ्ट शामिल थे।” इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने घायल पायलट की तलाश कर रही ईरानी सेना को गुमराह करने के लिए खास योजना को अंजाम दिया।
सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने कहा कि पूरा ऑपरेशन स्पीड और एक्यूरेसी पर निर्भर था। उन्होंने इसे समय के खिलाफ एक रेस बताया और सर्च की तुलना रेगिस्तान के बीच में रेत के एक कण की तलाश से की।
रैटक्लिफ ने कहा कि सीआईए ने इंसानी संपत्ति और बेहतरीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया और पायलट की तलाश कर रहे ईरानी रेस्क्यू टीम को उलझाने वाला कैंपेन चलाया।
दूसरे पायलट के पोजीशन की पुष्टि होने के बाद, अमेरिकी फोर्स ने भारी खतरे के बीच रात में रेस्क्यू शुरू किया। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि मिशन “हाई रिस्क, हाई स्टेक्स दुश्मन के इलाके के बीच में किए गए थे।”
उन्होंने कहा कि घायल पायलट ने अपना बीकन एक्टिवेट करने के बाद एक छोटा सा मैसेज भेजा, “गॉड इज गुड।”
केन ने कहा कि ए-10 सपोर्ट प्लेन और ड्रोन समेत रेस्क्यू एयरक्राफ्ट ने दुश्मन सेना से मुकाबला किया, जबकि हेलीकॉप्टर पायलट को रेस्क्यू करने के लिए आगे बढ़े। एक एयरक्राफ्ट पर फायरिंग हुई और बाद में उसे फ्रेंडली इलाके में छोड़ दिया गया, जबकि पहले रेस्क्यू में शामिल हेलीकॉप्टरों में भी आग लग गई, जिसमें पायलट को मामूली चोटें आईं।
गंभीर खतरों के बावजूद, बिना किसी जीवन के नुकसान के सभी लोगों ने मिलकर पायलट को रेस्क्यू किया। हेगसेथ ने कहा, किसी भी अमेरिकी की जान नहीं गई।
ट्रंप ने कहा कि कुछ मिलिट्री अधिकारियों ने खतरे की वजह से मिशन का विरोध किया था। उन्होंने कहा, कुछ सैन्य अधिकारी थे जिन्होंने कहा, आप ऐसा बिल्कुल न करें, और इस खतरे को देखते हुए कि सैकड़ों लोग मारे जा सकते थे।
उन्होंने इस मामले में मीडिया के कवरेज को लेकर नाराजगी भी जताई, जिसमें पायलट के लापता होने की जानकारी दी गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इससे ईरानी अधिकारी अलर्ट हो गए और बड़े पैमाने पर खोज शुरू कर दी गई। ट्रंप ने कहा, पूरा ईरान देश जानता था कि एक पायलट, अपनी जान के लिए लड़ रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि हाल के हफ्तों में ईरान पर बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियान में 10,000 से ज्यादा फाइटर जेट और 13,000 से ज्यादा हमले शामिल हैं। ट्रंप ने इस पैमाने को अनोखा बताया।
एफ-15ई को मार गिराना मौजूदा ऑपरेशन में किसी इंसान वाले एयरक्राफ्ट का पहला नुकसान था।
अमेरिका लंबे समय से दुश्मन के इलाके से अपने लोगों को वापस लाने के सिद्धांत को मानता रहा है। यह सिद्धांत वियतनाम से लेकर इराक और अफगानिस्तान तक की लड़ाइयों में और मजबूत हुआ है। ऐसे मिशन लड़ाई में सबसे मुश्किल होते हैं और इनके लिए हवाई, जमीन और इंटेलिजेंस यूनिट्स के बीच तालमेल की जरूरत होती है।
अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से तनाव बना हुआ है, जिसकी वजह न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं, इलाके में असर और सैन्य टकराव को लेकर विवाद हैं।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation





















