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Uncovered with Manoj Gairola: ईरान ने दिया अमेरिका को बड़ा झटका, एक एयरमैन बचाने में गंवाए 4 एयरक्राफ्ट, ट्रंप की बढ़ी बेचैनी
Uncovered with Manoj Gairola: एक महीने से ज्यादा वक्त से चल रहे ईरान युद्ध में बीता हुआ रविवार एक्शन पैक्ड रहा. ईरान ने एक अमेरिकी विमान F-15 को अपनी जमीन पर मार गिराया और इससे इजेक्ट हुए एक एयरमैन को वापस लाने के लिए अमेरिकी फोर्सेज ने बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. ये ऑपरेशन कामयाब रहा. लेकिन सच्चाई ये है कि इस ऑपरेशन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के माथे पर पसीना ला दिया.
अमेरिका को गंवाने पड़े 4 एयरक्राफ्ट
ईरान की धरती से एक एयरमैन को वापस लाने में अमेरिका को अपने 4 बड़े एयरक्राफ्ट गंवाने पड़े. इनमें से 2 को उसे खुद ही नष्ट करना पड़ा. इसी के साथ ट्रंप की उस प्लानिंग को भी धक्का लगा, जिसके तहत वो ईरान में कमांडो कार्रवाई करके उसका हाईली इनरिच्ड यूरेनियम जब्त करने की ताक में बैठे थे. और अब ऐसा लगता है, जैसे ट्रंप बौखला गए हैं.वो सोशल मीडिया पर ईरान के लिए गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही ईरान के बिजली घरों और पुलों जैसे सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर्स को नष्ट करने की धमकी दे रहे हैं.
Uncovered with Manoj Gairola आज के एपिसोड में हम बात करेंगे कि आखिरकार ईरान ने ट्रंप को ऐसा कौन सा झटका दिया. कि वो सोशल मीडिया पर मोहल्ले के गुंडों जैसी भाषा बोलने लगे. उन्होंने ईरान के लिए इतने आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया कि उनका जिक्र हम अपने शो में भी नहीं कर सकते.
1 एयरमैन को सुरक्षित लाने के लिए अमेरिका ने झोंकी पूरी ताकत
ट्रंप की इस हताशा में सबसे बड़ी भूमिका इस एयर मैन रेस्क्यू ऑपरेशन की है. वैसे तो इस रेस्क्यू ऑपरेशन के मकसद और इसकी कामयाबी को लेकर कई तरह की थ्योरीज चल रही हैं. लेकिन अगर हम अमेरिका के ही वर्जन को सही मानकर चलें. तब भी अमेरिका की ये कामयाबी उनके लिए एक बहुत बड़ा सेटबैक ही है. ईरान की धरती से अपने एक एयरमैन को सुरक्षित लाने के लिए अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. सैंकड़ों कमांडोज, सी-130 जहाजों में बैठकर ईरान धरती पर उतरे. इसके अलावा कई ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर्स और लगातार मिलते एयर सपोर्ट के सहारे अमेरिका ने अपने एयरमैन को बचा तो लिया. लेकिन ईरान की पुरानी हवाई पट्टी पर उतरे उसके विमान वहीं फंस गए. एक तरह से अमेरिका के सैंकड़ों फौजी दुश्मन के इलाके में फंसे हुए थे. फिर तीन और जहाज भेजे गए और इससे पहले कि ईरान के फौजी इन्हें घेर लेते सारे अमेरिकंस इन 3 जहाजों में बैठकर वापस लौट गए. दो C-130 जहाज और दो Black hawk हेलीकॉप्टर वहीं रह गए. ये एयरक्राफ्ट कहीं ईरान के हाथ ना लग जाएं इस डर से अमेरिका ने अपने ही इन एयरक्राफ्ट्स को बम से उड़ा दिया.
ईरान ने इसपर क्या कहा?
दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि ये रेस्क्यू ऑपरेशन तो बस एक कवर है. अमेरिका का मकसद ईरान में एक बड़ी फौजी घुसपैठ करना था जिसे नाकाम किया गया है और इसी दौरान अमेरिका के बड़े-बड़े एयरक्राफ्ट नष्ट हुए हैं. एक पुरानी कहावत है कि ‘किसी भी युद्ध में सबसे पहली कैजुएल्टी सच की होती है.’ अमेरिका के इस रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ बड़े एक्सपर्ट संदेह की निगाहों से देख रहे हैं. इन एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक एयरमैन को रेस्क्यू करने के लिए इतना बड़ा फौजी अमला नहीं उतारा जाता. ये संभवत: ईरान के यूरेनियम को जब्त करने का मिशन था, जो पूरी तरह नाकाम रहा. अब सच्चाई जो भी हो लेकिन इतना साफ हो गया है कि ईरान की धरती पर कोई भी कमांडो कार्रवाई करना अमेरिका के लिए बेहद मुश्किल है. यही बात डोनाल्ड ट्रंप को और ज्यादा हताश कर रही है.
ट्रंप की बढ़ी बेचैनी
हमने Uncovered with Manoj Gairola के अपने पिछले एपिसोड में आपको बताया था कि कैसे ट्रंप एक कमांडो ऑपरेशन के जरिए ईरान के यूरेनियम को जब्त करने का प्लान बना रहे हैं लेकिन ये प्लान बहुत कठिन और जोखिमभरा है. अब जबकि एक एयरमैन को रेस्क्यू करने में अमेरिका के हाथ-पांव फूल गए तो ईरान के यूरेनियम को जब्त करना कितना मुश्किल होगा? इस बात का अंदाजा संभवत: ट्रंप को भी हो चुका है. शायद यही वजह है कि वो अब ईरान के लिए निम्न स्तर की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और उसके सिविलियन इंफ्रास्टक्चर को निशाना बनाने जैसी ओछी बात कह रहे हैं.
ट्रंप बार-बार दे रहा है अल्टीमेटम
ट्रंप ने अब ईरान को एक नया अल्टीमेटम दिया है. जिसकी डेडलाइन तय की है मंगलवार शाम 8 बजे. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान बिना शर्त सरेंडर करके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल दे. हालांकि ट्रंप पहले भी ऐसी कई डेडलाइन दे चुके हैं लेकिन इस बार उनका फ्रस्ट्रेशन चरम पर पहुंचता दिख रहा है. ट्रंप की इन धमकियों के आगे ईरान झुकता हुआ नजर नहीं आ रहा है. ईरान के इरादे साफ है अगर उसके सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले होंगे तो वो खाड़ी में मौजूद अमेरिका के मित्र देशों के नागरिक ढांचों पर हमले करेगा. जिनमें सऊदी अरब, कुवैत, यूएई और कतर जैसे देश शामिल हैं. युद्ध शुरू करते वक्त ट्रंप का अनुमान था कि ये लड़ाई ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के मारे जाने के कुछ ही दिन में खत्म हो जाएगी. लेकिन अब दूसरे महीने में ये युद्ध और ज्यादा विनाशकारी होता दिख रहा है. हमारा ये विश्लेषण आपको कैसा लगा. नमस्कार!
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