Explainer: अमेरिका में कई राज्यों में फैला साल्मोनेला संक्रमण, कैसे इंसानों के शरीर में पहुंच रहा ये बैक्टीरिया
Explainer: अगर आप भी किसी विदेशी रेस्टोरेंट में खाना पसंद करते हैं. जहां किसी देश की विशेष डिश आपको बेहद पसंद आती हो तो जरा सावधान हो जाइए. क्योंकि अमेरिका में इनदिनों ऐसा ही मामला सामना आया है. जिससे हाहाकार मचा दिया है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं एक मिर्ची के बारे में. जिसके चलते अमेरिका के 27 राज्यों में एक संक्रमण फैल गया है.
मैक्सिको से हुई थी जलेपीनो मिर्च की सप्लाई
मैक्सिको से लाई गई इस मिर्च का नाम जलेपीनो है. अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारी अभी भी जलेपीनो मिर्च से जुड़े साल्मोनेला जावियाना संक्रमण के कई राज्यों में फैले प्रकोप की जांच कर रहे हैं. इस जांच को 'सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' और 'यूएस फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन' मिलकर, राज्य और स्थानीय स्वास्थ्य विभागों के साथ कर रहे हैं.
जून में सामने आया साल्मोनेला संक्रमण का पहला मामला
FDA के मुताबिक, साल्मोनेला संक्रमण का पहला मामला जून में सामने आया था. अधिकांश मामले 19 जून से 20 जुलाई के बीच सामने आए. बता दें कि साल्मोनेला संक्रमण का यह प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारी कई राज्यों में फैले साइक्लोस्पोरियासिस के प्रकोप की भी जांच कर रहे हैं.
- यह प्रकोप निजी कंपनी 'टेलर फार्म्स' से सप्लाई की गई लेट्यूस (सलाद पत्ता) से जुड़ा है. टेलर फार्म्स एक बड़ी फूड-सर्विस प्रोड्यूसर कंपनी है, जिसके ग्राहकों में 'यम ब्रांड्स' (YUM.N) भी शामिल है.
क्या है साल्मोनेला संक्रमण और कैसे फैलता है इसका बैक्टीरिया?
दरअसल, साल्मोनेला रॉड के आकार के बैक्टीरिया का एक समूह है जो साल्मोनेलोसिस का कारण बन सकता है, जो भोजन से होने वाली एक आम बीमारी है. इसके लक्षणों में आमतौर पर दस्त, बुखार और पेट में ऐंठन शामिल हैं, जो दूषित भोजन खाने के 12 से 72 घंटों के भीतर दिखाई देते हैं और चार से सात दिनों तक रहते हैं. इस संक्रमण से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को गंभीर संक्रमण और जटिलताओं का अधिक खतरा होता है.
27 राज्यों में अब तक 345 लोग मिले संक्रमित
मंगलवार यानी 5 अगस्त तक अमेरिका के 27 राज्यों में साल्मोनेला से संक्रमिमत कुल 345 मामले सामने आए हैं. सभी मामलों का संबंध जलेपीनो मिर्च से बताया जा रहा है. इस संक्रमण से पीड़ित 36 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, हालांकि राहत की बात ये है कि इस संक्रमण से अब तक किसी की मौत नहीं हुई है. 27 राज्यों (मिडवेस्ट, दक्षिण और पश्चिम) में सामने आए मामलों से पता चलता है कि दूषित जलेपीनो मिर्च का फैलाव कितना व्यापक है.
अमेरिका में हर साल साल्मोनेला से संक्रमित होते हैं इतने लोग
CDC के मुताबिक, अमेरिका में दूषित भोजन से होने वाली बीमारियों की मुख्य वजहों में साल्मोनेला शामिल है, जिससे हर साल लगभग 13.5 लाख (1.35 मिलियन) लोग संक्रमित होते हैं. अमेरिका में साल्मोनेला के कुछ बड़े मामलों में 1985 में दूध से जुड़ा मामला शामिल है, जिसमें 5,770 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी; 2010 में अंडे से जुड़ा मामला, जिसमें पूरे देश में 3,578 लोग बीमार पड़े थे; जबकि 2008 में दूषित जलोपीनो और सेरानो मिर्च से 1442 लोग बीमार हुए थे.
रेस्टोरेंट में इस्तेमाल की जाती है जलोपीनो मिर्च
बता दें कि ये संक्रमण मैक्सिको के सिनालोआ से आई जलोपीनो मिर्च से जुड़े हैं. इन्हें 'कोस्ट सिट्रस डिस्ट्रीब्यूटर्स' ने अमेरिका में मैक्सिकन-स्टाइल रेस्तरां समेत कई डिस्ट्रीब्यूटर्स, रेस्तरां और फूड सर्विस कंपनियों को सप्लाई किया था. संक्रमण फैलने की खबर मिलने के बाद, चिपोटले मैक्सिकन ग्रिल और QDOBA ने प्रभावित जलोपीनो मिर्च परोसना बंद कर दिया.
- QDOBA रेस्तरां भी अब जलोपीनो मिर्च नहीं परोस रहा है. जिन मरीजों से बात की गई, उनमें से ज्यादातर ने बताया कि बीमार पड़ने से पहले उन्होंने मैक्सिकन-स्टाइल रेस्तरां में खाना खाया था, जिनमें चिपोटले मैक्सिकन ग्रिल और QDOBA शामिल हैं. उन्होंने 14 जून से 14 जुलाई के बीच इन रेस्टोरेंट में खाना खाया था.
- कोस्ट सिट्रस डिस्ट्रीब्यूटर्स इस बीमारी के फैलने से जुड़ी जलोपीनो मिर्च को वापस मंगाने के लिए सहमत हो गया है.
- चूंकि ये उत्पाद उनके स्टोर से हटा दिए गए हैं, इसलिए FDA का मानना है कि इस बीमारी के फैलने के मामले में इन जगहों से ग्राहकों को अब कोई खतरा नहीं है. रेगुलेटर, चिपोटले मैक्सिकन ग्रिल के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि ये उत्पाद कहां-कहां भेजे गए थे.
कैसे खुद को बचा रहे लोग?
डिस्ट्रीब्यूटर, रेस्तरां और फ़ूड सर्विस ऑपरेटरों को कोस्ट सिट्रस डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा मैक्सिको के सिनालोआ से मंगाई गई ताजा जलोपीनो मिर्च नहीं बेचनी चाहिए और न ही परोसनी चाहिए. FDA के मुताबिक, अगर सप्लायर की पुष्टि नहीं हो पाती है, तो वापस मंगाई गई जलोपीनो मिर्च (चाहे वे फ्रीज की गई हों) और सिनालोआ से आई ताजा जलोपीनो मिर्च को फेंक देना चाहिए.
- FDA ने उन ग्राहकों को तुरंत मेडिकल मदद लेने की सलाह दी है जिन्होंने हाल ही में मैक्सिकन-स्टाइल रेस्तरां में खाना खाया था और वे बीमार पड़ गए हैं.
- CDC के अनुसार, इस इन्फेक्शन के आम इलाज में फ़्लोरोक्विनोलोन्स (fluoroquinolones), एज़िथ्रोमाइसिन (azithromycin) और थर्ड-जेनरेशन सेफलोस्पोरिन्स (cephalosporins) जैसी एंटीबायोटिक्स शामिल हैं, जो आमतौर पर गंभीर मामलों या ज़्यादा जोखिम वाले मरीजों के लिए लिखी जाती हैं.
- रेस्तरां और रिटेलर्स को सलाह दी गई है कि वे उन सभी सतहों और कंटेनरों की सफाई और सैनिटाइजेशन में अतिरिक्त सावधानी बरतें जो इस प्रोडक्ट के संपर्क में आए हों, ताकि क्रॉस-कंटैमिनेशन (एक चीज से दूसरी चीज में संक्रमण फैलने) का जोखिम कम किया जा सके.
किस तरह की जा रही मामलों की निगरानी?
- FDA वर्तमान में ट्रेसबैक प्रयास कर रहा है, साथ ही नमूनों का परीक्षण भी कर रहा है, इसके अलावा एफडीए वितरण रिकॉर्ड की भी समीक्षा कर रहा है. जिससे जलोपीनी मिर्च को रिकॉल किया जा सके. साथ ही उपभोक्ताओं तक और अधिक कंटैमिनेटेड प्रोडक्ट न पहुंच सकें.
भारत का मेड-टेक इकोसिस्टम तेजी से हो रहा मजबूत, घरेलू विनिर्माण और सरकारी योजनाओं से मिली नई ताकत: पीएम मोदी
नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत के तेजी से विकसित हो रहे मेडिकल टेक्नोलॉजी (मेड-टेक) क्षेत्र की सराहना करते हुए कहा कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा, आयात पर निर्भरता में कमी और सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के कारण भारत एक भरोसेमंद वैश्विक मेड-टेक साझेदार के रूप में उभर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा किया, जिसमें भारत में मेडिकल डिवाइस निर्माण क्षेत्र में हुए बदलावों और आत्मनिर्भर मेड-टेक इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित किया गया है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत का मेड-टेक क्षेत्र घरेलू उत्पादन, आयात निर्भरता में कमी और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना तथा मेडिकल डिवाइस पार्कों जैसी सरकारी पहलों के बल पर लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लक्ष्य के साथ वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय मेड-टेक भागीदार बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अपने लेख में जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार मेडिकल उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है, जिनमें पीएलआई योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क, और फार्मा-मेडटेक में अनुसंधान एवं नवाचार संवर्धन (पीआरआईपी) योजना प्रमुख हैं।
उन्होंने बताया कि पीएलआई योजना के तहत भारत में अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है। साथ ही विदेशी निवेश में लगातार वृद्धि इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
नड्डा ने कहा कि मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होने से आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन) अधिक मजबूत होगी और लागत कम करने में मदद मिलेगी। इससे उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों, इमेजिंग सिस्टम, इम्प्लांट्स और आईसीयू में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की उपलब्धता और पहुंच भी बेहतर होगी।
उन्होंने कहा कि मेड-टेक सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सॉफ्टवेयर ऐज ए मेडिकल डिवाइस (एसएएमडी), कनेक्टेड मेडिकल डिवाइसेस, रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में भी बड़े अवसर मौजूद हैं। आने वाले वर्षों में ये तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं के स्वरूप को बदल सकती हैं।
जेपी नड्डा के अनुसार, वर्तमान में भारत का मेड-टेक बाजार 15 से 16 अरब डॉलर का है और यह लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार नियामकीय ढांचे (रेगुलेटरी सिस्टम), परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल डेटा के विकास को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है, जिसका उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारतीय मेडिकल उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाना है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मजबूत मेडिकल डिवाइस उद्योग न केवल विनिर्माण और रोजगार को बढ़ावा देगा, बल्कि निर्यात वृद्धि और तकनीकी विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही इससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सस्ती, सुलभ और मजबूत बन सकेंगी।
गौरतलब है कि इसी सप्ताह जारी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग भविष्य में वैश्विक स्तर पर एक बड़ी ताकत बन सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, वर्तमान में करीब 14 अरब डॉलर मूल्य वाला भारत का चिकित्सा उपकरण क्षेत्र इस दशक के अंत तक 30 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि वर्ष 2047 तक इसका आकार 250 अरब डॉलर तक होने की संभावना है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









