Migraine Pain Relief: माइग्रेन का दर्द असहनीय लगने लगा है? ये घरेलू तरीके दिला सकते हैं राहत
Migraine Pain Relief: माइग्रेन सिर्फ सामान्य सिरदर्द नहीं होता। इसमें सिर के एक हिस्से में तेज धड़कता हुआ दर्द, जी मिचलाना और रोशनी या तेज आवाज से परेशानी जैसी दिक्कत हो सकती है। कई बार दर्द इतना बढ़ जाता है कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में तुरंत आराम करने और आसपास का माहौल शांत रखने से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है।
माइग्रेन के ट्रिगर हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। नींद पूरी न होना, तनाव, लंबे समय तक खाना न खाना, डिहाइड्रेशन और बहुत अधिक कैफीन कुछ लोगों में अटैक को बढ़ा सकते हैं। इसलिए दर्द शुरू होने पर कुछ आसान सेल्फ-केयर उपाय आजमाए जा सकते हैं। लेकिन अगर माइग्रेन बार-बार हो रहा है या पहले से ज्यादा गंभीर हो गया है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
अंधेरे और शांत कमरे में आराम करें
माइग्रेन के दौरान तेज रोशनी और आवाज दर्द को बढ़ा सकती है। ऐसे में किसी शांत और कम रोशनी वाले कमरे में जाकर आंखें बंद करके आराम करें। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर स्क्रीन से कुछ समय दूरी बनाना भी मददगार हो सकता है। जरूरत महसूस हो तो थोड़ी देर सोने की कोशिश करें।
ठंडी पट्टी से मिल सकती है राहत
माथे या गर्दन पर कपड़े में लपेटकर ठंडी पट्टी या कोल्ड पैक लगाने से कुछ लोगों को माइग्रेन के दर्द में राहत मिल सकती है। इसे सीधे त्वचा पर लगाने से बचें। कुछ लोगों को इसके बजाय गर्म सिकाई या गर्म पानी से नहाने से भी आराम मिलता है, इसलिए जो तरीका आपको सूट करे उसे आजमाया जा सकता है।
पानी की कमी न होने दें
डिहाइड्रेशन सिरदर्द को बढ़ा सकता है। इसलिए पूरे दिन पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। माइग्रेन के दौरान अगर उल्टी या जी मिचलाने की समस्या हो तो थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी लेते रहें। बहुत ज्यादा कैफीन लेने से बचें, क्योंकि कुछ लोगों में अधिक कैफीन माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है।
खाना स्किप करने से बचें
लंबे समय तक खाली पेट रहना कुछ लोगों में माइग्रेन का ट्रिगर बन सकता है। इसलिए भोजन का समय नियमित रखने की कोशिश करें। बहुत देर तक खाना न खाने के बजाय समय पर संतुलित भोजन करें। अगर किसी खास खाद्य पदार्थ के बाद बार-बार माइग्रेन होता है, तो उसका रिकॉर्ड रखना ट्रिगर पहचानने में मदद कर सकता है।
तनाव कम करने की कोशिश करें
तनाव माइग्रेन के आम ट्रिगर्स में शामिल हो सकता है। दर्द के दौरान धीमी और गहरी सांस लेने, रिलैक्सेशन एक्सरसाइज या शांत माहौल में कुछ देर बैठने से तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। नियमित रूप से तनाव प्रबंधन की आदतें अपनाना माइग्रेन को मैनेज करने में उपयोगी हो सकता है।
नींद का रूटीन रखें
बहुत कम या अनियमित नींद माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती है। कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर सोएं और जागें। रात में सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और आरामदायक वातावरण बनाना भी बेहतर नींद में मदद कर सकता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Khoya Purity Check: रक्षाबंधन पर घर में मिठाई बनाने का चलन काफी खास होता है। इस दिन बहन के लिए अपने हाथों से बनाई मिठाई में स्वाद के साथ अपनापन भी जुड़ा होता है। अगर आप भी मावे से पेड़ा, बर्फी, गुलाब जामुन या कोई दूसरी मिठाई बनाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे पहले खोया की क्वालिटी पर ध्यान देना जरूरी है। बाजार में मिलने वाला हर खोया शुद्ध हो, यह जरूरी नहीं। कभी-कभी लागत कम करने के लिए इसमें स्टार्च, अतिरिक्त दूध पाउडर, वनस्पति वसा या अन्य पदार्थ मिलाए जा सकते हैं।
मावा मिठाई का मुख्य आधार होता है, इसलिए इसकी गुणवत्ता सीधे तैयार मिठाई के स्वाद और टेक्सचर पर असर डालती है। त्योहार के समय मांग बढ़ने पर खोया खरीदते वक्त थोड़ी सावधानी बरतना समझदारी है। कुछ आसान घरेलू संकेतों और शुरुआती जांच से संदिग्ध मावे की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन घरेलू तरीकों को अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। शुद्धता की पुष्टि के लिए खाद्य प्रयोगशाला की जांच ही अधिक विश्वसनीय होती है।
रंग और बनावट पर दें ध्यान
अच्छी क्वालिटी का खोया आमतौर पर दूधिया से लेकर हल्का क्रीम रंग का दिखाई देता है। इसका टेक्सचर नरम और थोड़ा दानेदार हो सकता है। अगर मावा बहुत ज्यादा चमकदार, असामान्य रूप से सफेद या बेहद चिकना दिखाई दे तो सावधानी बरतें। हालांकि, केवल रंग देखकर खोया नकली या मिलावटी तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसकी बनावट दूध के प्रकार और बनाने की प्रक्रिया से भी बदलती है।
थोड़ा मावा हाथ से मसलकर देखें
खोया का छोटा सा हिस्सा लेकर उंगलियों के बीच हल्के हाथ से मसलें। सामान्य मावे में दूध की प्राकृतिक चिकनाई और दानेदारपन महसूस हो सकता है। अगर यह जरूरत से ज्यादा रबड़ जैसा, बहुत चिपचिपा या असामान्य रूप से चिकना लगे तो इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ सकता है। यह केवल एक प्रारंभिक घरेलू निरीक्षण है, पक्का परीक्षण नहीं।
पानी में घोलकर देखें
थोड़ी मात्रा में खोया लेकर उसे साफ पानी में अच्छी तरह घोलकर देखें। अगर पानी में असामान्य तलछट, बहुत ज्यादा अलग-अलग परतें या कोई अजीब बनावट नजर आती है तो उत्पाद को लेकर सावधानी बरतें। हालांकि, दूध से बने मावे में भी कुछ प्राकृतिक ठोस पदार्थ हो सकते हैं, इसलिए केवल इस परीक्षण के आधार पर मिलावट का फैसला नहीं किया जा सकता।
स्टार्च की जांच में आयोडीन मददगार हो सकता है
खोया में स्टार्च की मिलावट की शुरुआती जांच के लिए आयोडीन आधारित टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। स्टार्च मौजूद होने पर आयोडीन के संपर्क में रंग गहरा नीला-काला हो सकता है। लेकिन घरेलू स्तर पर रसायनों का इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है और टेस्ट किए गए नमूने को बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। किसी भी रंग परिवर्तन को अंतिम प्रमाण मानने के बजाय संदिग्ध नमूने की लैब जांच कराना बेहतर है।
स्वाद और गंध को नजरअंदाज न करें
ताजा और अच्छी क्वालिटी के खोया में दूध जैसी प्राकृतिक खुशबू और स्वाद होता है। अगर मावे से खट्टी, बासी, साबुन जैसी या दूसरी असामान्य गंध आ रही हो तो उसे खरीदने से बचें। इसी तरह बहुत ज्यादा मीठा या अजीब स्वाद भी गुणवत्ता को लेकर संकेत दे सकता है। खराब गंध वाला खोया मिठाई बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
रक्षाबंधन के लिए खोया हमेशा साफ-सुथरी और भरोसेमंद दुकान से खरीदें। पैक्ड उत्पाद लेते समय लेबल, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और खाद्य लाइसेंस संबंधी जानकारी जरूर देखें। खुले मावे में साफ-सफाई और रखरखाव पर विशेष ध्यान दें। अगर उत्पाद की गुणवत्ता संदिग्ध लगे तो उससे मिठाई बनाने का जोखिम न लें।
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लेखक: (कीर्ति)
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