'जमील जमाली' को महंगा पड़ा 'हरिजन' शब्द बोलना, अब 'धुंधर' एक्टर ने मांगी माफी
Rakesh Bedi Apologized For Using Harijan Word: हाल ही में एक पुराने वीडियो के कारण 'धुरंधर' एक्टर राकेश बेदी अचानक विवादों में आ गए हैं. वहीं बता दें कि यह विवाद उनके अभिनय या फिल्मों को लेकर नहीं, बल्कि उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए एक शब्द को लेकर है. जी हां, सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से फैल गया और देखते ही देखते एक बड़ी बहस का विषय बन गया. चलिए आपको बताते हैं आखिर क्या है ये मामला?
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक पुराना वीडियो क्लिप ऑनलाइन सामने आया. इस क्लिप को आजाद समाज पार्टी के मुंबई प्रदेश अध्यक्ष कैलाश जायसवार ने शेयर किया. वीडियो में राकेश बेदी, भारत के महान समाज सुधारक भीमराव अंबेडकर के योगदान पर चर्चा कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने ‘हरिजन’ शब्द का इस्तेमाल किया.
फिल्म अभिनेता व चर्चित फिल्म धुरंधर के जमील जमाली #राकेश_बेदी द्वारा एक विडियो में दिए गए आपत्तिजनक बयान डाॅ. बाबासाहेब आंबेडकर जी "हरिजनों" के लिए लड़ाई लड़ते रहें, इस बयान पर मैंने उनसे से कॉल पर बात की, और कहा त्वरित विडियो के माध्यम से बहुजन समाज से माफी मांगीए। pic.twitter.com/PkL4OmWfK8
— Kailash Jaiswar (@kailashJai_ASP) April 5, 2026
हालांकि, आज के समय में यह शब्द संवेदनशील और अनुचित माना जाता है. भारत सरकार और सामाजिक संगठनों द्वारा इसके आधिकारिक उपयोग पर रोक लगाई जा चुकी है. ऐसे में इस शब्द के प्रयोग को लेकर सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना शुरू हो गई और अभिनेता से जवाबदेही की मांग उठने लगी.
क्यों हुआ विवाद?
‘हरिजन’ शब्द ऐतिहासिक रूप से इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन अब इसे कई लोग अपमानजनक और अस्वीकार्य मानते हैं. इसकी जगह ‘दलित’ या ‘अनुसूचित जाति’ जैसे शब्दों का प्रयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है. ऐसे में राकेश बेदी द्वारा इस शब्द का इस्तेमाल लोगों को नागवार गुजरा, जिसके चलते उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा.
राकेश बेदी की सफाई और माफी
विवाद बढ़ने के बाद राकेश बेदी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक माफी मांगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था. उन्होंने कहा, “अगर मेरे द्वारा ‘हरिजन’ शब्द के इस्तेमाल से किसी को दुख पहुंचा है, तो मैं दिल से माफी चाहता हूं. मुझे यह जानकारी नहीं थी कि यह शब्द अब प्रतिबंधित और अनुचित माना जाता है.” उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि यह गलती अनजाने में हुई थी और उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया.
कैलाश जैसवार ने फिल्म अभिनेता व धुरंधर फिल्म के जमील जमाली "राकेश बेदी" से माफी मंगवाईं. अभिनेता द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान - डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जी 'हरिजनों' के लिए लड़ाई लड़ते रहे, इस बयान पर मैंने राकेश बेदी से विडियो संदेश के जरिए माफी मंगवाईं।@AzadSamajParty मुंबई pic.twitter.com/obxYiB92ql
— Kailash Jaiswar (@kailashJai_ASP) April 5, 2026
बातचीत के बाद आया माफी वीडियो
कैलाश जायसवार ने एक वॉइस नोट भी साझा किया, जिसमें उनकी और राकेश बेदी की फोन पर बातचीत सुनाई दी. इस बातचीत में जायसवार ने अभिनेता को समझाया कि वर्तमान समय में यह शब्द क्यों आपत्तिजनक माना जाता है और उनसे सार्वजनिक माफी की अपील की. बताया जा रहा है कि इसी बातचीत के बाद राकेश बेदी ने माफी वीडियो जारी किया.
फिल्मों की सफलता के बीच विवाद
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राकेश बेदी अपनी हालिया फिल्मों ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की सफलता को लेकर चर्चा में हैं. निर्देशक आदित्य धर की इन फिल्मों को दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है.
आर्टेमिस II मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने हैनसेन ओरियन कैप्सूल की खिड़की से देखा चांद, बताया अपना अनुभव
वांशिंगटन, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) के अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन ओरियन कैप्सूल से आर्टेमिस-II मून मिशन पर गए हुए हैं। नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ने स्थानीय समयानुसार रविवार को अमेरिकी मीडिया को बताया कि उन्होंने हैनसेन ओरियन कैप्सूल की खिड़की से चंद्रमा को देखा।
अमेरिकी मीडिया एनबीसी के साथ बातचीत के दौरान क्रिस्टीना कोच ने चांद देखने का अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने कहा कि यह धरती से दिखने वाले चांद से अलग दिखता है। कोच ने कहा, जैसे हम आमतौर पर चांद को देखते आ रहे हैं, यहां आपकी समझ में कुछ ऐसा होता है जो चांद को वैसा नहीं दिखने देता है। जैसे कि चांद का अंधेरे वाला हिस्सा बिल्कुल सही जगह पर नहीं लगता है। कोच ने यह भी स्पष्ट किया कि यह चांद का वही अंधेरा वाला हिस्सा है, जिसे अंतरिक्ष यात्रियों ने पहले भी देखा है।
कोच ने आगे बताया कि उन्होंने और तीन दूसरे क्रू मेंबर्स अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन और विक्टर ग्लोवर और कैनेडियन एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन ने अपने ट्रेनिंग मटेरियल (ट्रेनिंग के दौरान साझा की गई जानकारी) की समीक्षा की और जो कुछ वे देख रहे थे, उससे उसकी तुलना की ताकि उस अनजान नज़ारे को समझा जा सके।
अंतरिक्ष यात्री ने बताया कि जो दृश्य उन्हें अंतरिक्ष से दिखाई दे रहा था, वह उनके लिए नया और थोड़ा अनजान था। इसलिए उन्होंने अपनी ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई जानकारी से उसकी तुलना की। इस प्रक्रिया के जरिए वे उस अलग दिखने वाले नजारे को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर रहे थे। अंतरिक्ष यात्री यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि वास्तव में वे क्या देख रहे हैं और वह उन्हें अलग क्यों महसूस हो रहा है।
कोच ने कहा कि सभी क्रू मेंमबर में इसे लेकर काफी उत्साह है। वे ओरियन कैप्सूल के अंदर आराम से सो पा रहे हैं। कैप्सूल लगभग 16.5 फीट चौड़ा है और इसमें कैंपर वैन जितनी रहने की जगह है।
उन्होंने कहा, यहां इंसान होना इस मिशन की सबसे दिलचस्प चीजों में से एक है। उन्होंने बताया कि वे सब बस सामान्य इंसानों की तरह ही अपनी दिनचर्या संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
कोच ने हल्के-फुल्की भाषा में समझाते हुए कहा कि हम चांद के दूसरी तरफ जाकर उसकी शानदार चीजों को देख सकते हैं और फिर सोच सकते हैं, हम्म, शायद मुझे अपने मोजे बदल लेने चाहिए और मोजों की एक जोड़ी ढूंढने की कोशिश कर सकते हैं। तो यह मानव अंतरिक्ष यात्रा का एक अनोखा पहलू है।
बता दें, नासा का ये मिशन 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ पूरा होगा। नासा का लक्ष्य 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास दो अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना और भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाना है।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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