US Navy SEAL Team 6: कैसे लादेन को मारने वाली टीम ने ईरान की धरती पर कदम रखा? 'ऑपरेशन पायलट' की इनसाइड स्टोरी
F-15E Pilot Rescue: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बीच एक ऐसी सैन्य कार्रवाई हुई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिकी जांबाज पायलट, जिसका विमान F-15E ईरान की सीमा में क्रैश हो गया था, उसे बचाने के लिए पेंटागन ने अपनी सबसे घातक यूनिट 'नेवी सील टीम-6' को मैदान में उतारा।
यह वही विशिष्ट दस्ता है जिसने 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर ओसामा बिन लादेन को ढेर किया था। इस बार चुनौती और भी बड़ी थी, क्योंकि पायलट ईरान की मुख्य भूमि के 300 किलोमीटर अंदर एक बेहद संवेदनशील इलाके में फंसा हुआ था।
मिशन की बारीकियां: 300 किलोमीटर की खतरनाक घुसपैठ
यह ऑपरेशन किसी हॉलीवुड थ्रिलर जैसा था। नेवी सील के कमांडो 'स्टेल्थ' हेलीकॉप्टरों के जरिए ईरान के रडार सिस्टम को चकमा देते हुए सीमा के 300 किलोमीटर अंदर दाखिल हुए। पायलट ने पैराशूट से लैंडिंग के बाद एक सुरक्षित पहाड़ी गुफा में शरण ले रखी थी और अपने 'इमरजेंसी बीकन' से गुप्त सिग्नल भेज रहा था।
सील टीम ने 'नाइट विजन' और आधुनिक सेंसर तकनीक का इस्तेमाल कर उसे ट्रैक किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कमांडो जब वहां पहुंचे, तो ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की एक टुकड़ी भी पायलट की तलाश में कुछ ही दूरी पर थी।
भारी गोलीबारी और सफल 'एक्सट्रैक्शन'पायलट तक पहुँचने के बाद असली चुनौती उसे सुरक्षित बाहर निकालने की थी। जैसे ही अमेरिकी कमांडोज ने पायलट को रिसीव किया, ईरानी सेना को भनक लग गई और दोनों ओर से भारी गोलीबारी शुरू हो गई। नेवी सील टीम-6 ने अपनी बेजोड़ ट्रेनिंग का परिचय देते हुए एक सुरक्षा घेरा बनाया और पायलट को हेलीकॉप्टर तक पहुंचाया।
इस दौरान अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने ऊपर से कवर प्रदान किया ताकि ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय न हो सके। करीब 45 मिनट तक चले इस 'फेस-ऑफ' के बाद टीम पायलट को लेकर सुरक्षित बाहर निकल आई।
ट्रंप का संदेश और ईरान के लिए चेतावनीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन की सफलता के बाद नेवी सील टीम-6 की जमकर तारीफ की है। ट्रंप ने कहा, "हमारी सबसे बेहतरीन टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दुनिया के किसी भी कोने में अगर हमारा कोई सैनिक मुसीबत में है, तो हम उसे घर वापस लाने की ताकत रखते हैं।"
इस रेस्क्यू ने ईरान के उन दावों की हवा निकाल दी है जिसमें वे पायलट को पकड़कर 'वॉर प्रिजनर' बनाने की योजना बना रहे थे। यह मिशन ईरान की सैन्य तैयारियों और रडार सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
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