भीषण गर्मी में राहत का दूसरा नाम सूती कपड़े, हल्के रंगों का चुनाव भी जरूरी
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के कई हिस्सों का तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है। ऐसे में चिलचिलाती धूप, उमस और लू के थपेड़ों के बीच किस तरह के कपड़े पहनें, यह एक बड़ी समस्या है। भीषण गर्मी से बचने के लिए सूती कपड़ों से बेहतर विकल्प और कुछ नहीं है।
गर्मियों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक पहुंच जाता है, तब गलत कपड़े पहनना पसीने, चिपचिपाहट और चिड़चिड़ेपन का कारण बन सकता है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस मौसम में हमेशा हल्के सूती (कॉटन) कपड़े ही पहनें। सही कपड़े सिर्फ शरीर को आराम नहीं देते, बल्कि मन को भी शांत रखते हैं। जब शरीर ठंडा और सूखा रहता है, तो चिड़चिड़ापन कम होता है। सूती कपड़े पहनने से मन हल्का और तरोताजा महसूस करता है, जिससे पूरा दिन बेहतर बीतता है। गर्मी के मौसम में सूती कपड़े न सिर्फ आराम देते हैं, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। पुराने समय से दादी-नानी गर्मी के मौसम में सूती कपड़े पहनने की सलाह देती आ रही हैं।
अब सवाल है कि सूती कपड़ा ही क्यों? सूती कपड़ा पूरी तरह प्राकृतिक होता है। इसमें कोई रसायन या सिंथेटिक फाइबर नहीं होता। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह हवा को आसानी से आने-जाने देता है। कहने का मतलब है कि यह सांस लेने योग्य फैब्रिक है। इससे तेज धूप में भी त्वचा ठंडी और सूखी रहती है। दूसरा बड़ा फायदा यह है कि सूती कपड़ा पसीने को बहुत अच्छी तरह सोख लेता है। पसीना कपड़े में फैल जाता है और हवा के संपर्क में आने से जल्दी सूख जाता है। इससे शरीर ठंडा रहता है और चिपचिपाहट नहीं होती। वहीं, पॉलिएस्टर या नायलन जैसे सिंथेटिक कपड़े पसीना नहीं सोखते। पसीना त्वचा पर ही जमा रहता है, जिससे घमौरियां, खुजली और पसीने की बदबू जैसी समस्याएं हो जाती हैं।
सूती कपड़े हल्के, मुलायम और त्वचा के अनुकूल होते हैं। ये रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए बहुत आरामदायक हैं। इन्हें कैजुअल या फॉर्मल किसी भी तरह से पहन सकते हैं। सूती कपड़ों में धारियां, चेक और सादे डिजाइन उपलब्ध होते हैं, जो परंपरा और आधुनिक फैशन दोनों को जोड़ते हैं।
गर्मी में कपड़ों के साथ ही रंगों का चुनाव भी बहुत जरूरी है। कपड़े का रंग भी गर्मी को प्रभावित करता है। गर्मियों में हल्के रंग जैसे सफेद, हल्का गुलाबी, आसमानी और हल्का पीला, क्रीम सबसे अच्छे माने जाते हैं। ये रंग सूरज की किरणों को वापस कर देते हैं, जिससे शरीर कम गर्म होता है। गहरे रंग जैसे काला, नेवी ब्लू या गहरा लाल गर्मी को ज्यादा सोखते हैं और शरीर को ज्यादा गर्म कर देते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में हल्के रंगों के सूती कपड़े चुनना बेहतरीन विकल्प है।
--आईएएनएस
एमटी/एबीएम
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गंभीर बीमारियों का इलाज, आपातकालीन स्थितियों में 10 लाख की सहायता प्रदान कर रही ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’
पंजाब की प्रमुख मुख्यमंत्री सेहत योजना स्वास्थ्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रही है, जो प्रति परिवार 10 लाख रुपये की कवरेज प्रदान करती है और अचानक डॉक्टरी आपातकाल के दौरान वित्तीय बोझ को कम करते हुए समय पर इलाज लेने में सक्षम बनाती है. कई बीमारियां जैसे दिल का दौरा, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं किसी भी समय हमला कर सकती हैं, इसलिए पंजाब सरकार का दृष्टिकोण व्यापक स्तर पर जन स्वास्थ्य हस्तक्षेप के माध्यम से डॉक्टरी जरूरत और किफायती इलाज के बीच के अंतर को पूरा करने पर केंद्रित है.
चिंता को वित्तीय तैयारी के माध्यम से देखा जा रहा
दिल का दौरा, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं जैसी बीमारियां बिना किसी चेतावनी के हमला कर सकती हैं, जिससे अचानक गंभीर लक्षण पैदा होते हैं और गंभीर जटिलताओं को रोकने के लिए तुरंत डॉक्टरी सहायता की जरूरत होती है. यह सुझाव देता है कि ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां अक्सर गुप्त रूप से विकसित होती हैं और बिना किसी चेतावनी के हमला करती हैं, जिसके संबंध में फैसला लेने के लिए बहुत कम समय बचता है. पंजाब में इस बढ़ती चिंता को वित्तीय तैयारी के माध्यम से देखा जा रहा है, मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी सरकार-समर्थित पहल का उद्देश्य डॉक्टरी जरूरत और किफायती इलाज के बीच के अंतर को पूरा करना है.
2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज
पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में चल रही यह योजना हर परिवार को प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान करती है. यह योजना सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में 2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज कवर करती है.
बेहतर नतीजों में मदद मिल सकती है
बड़ी और गंभीर बीमारियों की छिपी शुरुआत को उजागर करते हुए विश्व स्वास्थ्य आंकड़े समय पर फैसला लेने की जरूरत को दर्शाते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज और सांस लेने की समस्या जैसी बीमारियां हर साल विश्व भर में लगभग 75 प्रतिशत मौतों का कारण बनती हैं और बहुत से पीड़ितों को यह भी नहीं पता होता कि वे जोखिम में हैं. मोहाली के जिला अस्पताल की मेडिसिन की मेडिकल ऑफिसर डॉ. ईशा अरोड़ा ने कहा कि जब तक मरीज हमारे पास आते हैं, बीमारी अक्सर अगले चरण तक पहुंच जाती है.
देरी खतरनाक हो सकती है
डॉक्टरी विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि जब आपातकाल आता है, तो समय सबसे महत्वपूर्ण कारक बन जाता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार दिल के दौरे या स्ट्रोक के इलाज में कुछ मिनटों की देरी भी स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है और यहां तक कि जान भी ले सकती है. डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे पलों में मरीज आम तौर पर झिझक महसूस करते हैं. डॉ. ईशा अरोड़ा ने कहा कि इलाज शुरू होने से पहले ही परिवार अक्सर खर्चे पर विचार करने लग पड़ते हैं और यह देरी खतरनाक हो सकती है. इस संदर्भ में मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी वित्तीय सुरक्षा योजनाओं से एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है.
33 लाख से अधिक को योजना के तहत नामांकित किया गया
इस योजना को कवरेज से लेकर वास्तविक देखभाल डिलीवरी तक पंजाब भर में काफी बढ़ावा मिला है. अधिकारियों का कहना है कि 33 लाख से अधिक परिवारों को इस योजना के तहत नामांकित किया गया है, जिसमें खासकर डायलिसिस, कैंसर और दिल जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लाखों मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं. पंजाब की राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार इस योजना के तहत 33 लाख से अधिक लाभार्थियों को सफलतापूर्वक रजिस्टर किया गया है और 1,98,793 मुफ्त इलाजों को मंजूरी दी गई है, जिसकी राशि लगभग 3,30,01,32,533 रुपये बनती है. इस कुल राशि में से 59,34,18,468 रुपये पहले ही अस्पतालों को वितरित किए जा चुके हैं. हर उम्र वर्ग के लोगों, खास तौर पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, ने इस स्कीम से लाभ उठाया है, जिसमें दिल की सर्जरी और कैंसर की देखभाल जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज दिया जा रहा है.
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