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डोसा नहीं बनता क्रिस्पी? अपनाएं ये आसान टिप्स और पाएं परफेक्ट स्वाद

अगर आप घर पर होटल जैसा पतला, कुरकुरा और स्वादिष्ट डोसा बनाना चाहते हैं, तो सही तरीका अपनाना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं इसका सही तरीका. डोसा बनाने के लिए 1 किलो चावल और 100 ग्राम उड़द दाल को धोकर रातभर भिगो दें. सुबह इसे पीसकर ऐसा घोल बनाएं जो न ज्यादा पतला हो, न गाढ़ा. इसके बाद बैटर को 8–10 घंटे के लिए ढककर रख दें, ताकि उसमें अच्छी तरह खमीर उठ जाए. इसके बाद तवे को पहले गर्म करें, फिर हल्का ठंडा होने दें. बहुत ज्यादा गरम तवे पर बैटर नहीं फैलेगा और ठंडा तवा डोसा चिपका देगा. एक करछी बैटर डालकर गोल-गोल घुमाते हुए पतला फैलाएं. किनारों पर थोड़ा तेल या घी डालें और मध्यम आंच पर पकाएं. जब डोसा हल्का सुनहरा हो जाए और किनारे खुद उठने लगें, तो समझ लें कि वह तैयार है.

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वजन घटाने वालों के लिए बेस्ट नाश्ता, इस रेसिपी से घर पर बनाएं पौष्टिक सूजी चिल्ला

भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर हेल्दी और आसान नाश्ते की तलाश में रहते हैं. ऐसे में सूजी का चिल्ला एक बेहतरीन विकल्प है. सूजी पचने में हल्की होती है और इसमें ताजी सब्जियां मिलाने से यह पौष्टिक नाश्ता बन जाता है. सूजी चिल्ला बनाने में भी आसान है. इसे बनाने के लिए एक बर्तन में एक कप सूजी और आधा कप दही लें. इसमें बारीक कटा प्याज, टमाटर, हरी धनिया, हरी मिर्च और अदरक मिलाएं. जरूरत के अनुसार पानी डालकर घोल तैयार करें और 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें, ताकि सूजी फूल जाए. इसके बाद मध्यम आंच पर पैन गर्म करें और हल्का तेल लगाएं. बैटर को गोल आकार में फैलाकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेक लें. तैयार चिल्ले को पुदीना चटनी, नारियल चटनी या टमाटर सॉस के साथ परोस सकते हैं.

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  Sports

नजफगढ़ का ‘प्रिंस’: जिसने आईपीएल का सपना पूरा करने के लिए कांस्टेबल की परीक्षा छोड़ दी थी

 कुछ साल पहले तक नजफगढ़ में रहने वाले रेलवे सुरक्षा बल के सहायक सब इंस्पेक्टर (एएसआई) राम निवास यादव अपने सबसे छोटे बेटे प्रिंस के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थे, जिसकी दिलचस्पी केवल टेनिस बॉल टूर्नामेंट में यॉर्कर गेंदबाजी करने में थी। लेकिन इस युवा क्रिकेटर को खुद पर भरोसा था और उसने अपने पिता से सीधे शब्दों में कह दिया, ‘‘आप मेरी चिंता करना छोड़ दो। मैं अपने से कुछ कर लूंगा।’’ अब बात करते हैं 2026 की। वह बेपरवाह दिखने वाला लड़का अपने वादे पर खरा उतर चुका है।

लखनऊ सुपर जायंट्स के इस स्विंग गेंदबाज का नाम है प्रिंस यादव, जो इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अक्षर पटेल और ईशान किशन जैसे अनुभवी भारतीय बल्लेबाजों के डिफेंस को भेदने में सफल रहा। प्रिंस के पिता रामनिवास ने कहा, ‘‘कोई भी पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित होगा और मैं भी था। 18 साल की उम्र तक उसने चमड़े की गेंद से एक बार भी गेंदबाजी नहीं की थी। मैंने उसे दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल की परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर किया। वह शारीरिक रूप से फिट था, लेकिन लिखित परीक्षा के लिए अच्छी तरह से तैयार नहीं था क्योंकि उसका ध्यान कहीं और था।’’

रामनिवास ने आखिर अपने बेटे की जिद मान ली क्योंकि उनके पास अपने बेटे का साथ देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘बेटे की ज़िद है और हमें पूरा करना था। एक एएसआई के वेतन में कितना ही गुज़ारा हो पाता है। लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने उसे अपनी इच्छा पूरी करने दी।’’ प्रिंस के शानदार प्रदर्शन के बाद अब नजफगढ़ के खेड़ा डाबर गांव से भी लोग उनके घर पर बधाई देने के लिए आने लगे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले हमारे इस इलाके को लोग इसलिए जानते थे क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति साहिबा (प्रतिभा पाटिल) चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक संस्थान का उद्घाटन करने (2012में) यहां आई थी। अब हमारा इलाका क्रिकेट के लिए फेमस हो गया है।’’ राम निवास के अनुसार प्रिंस के पहले और अब तक के एकमात्र कोच अमित वशिष्ठ और भारत के अंडर-19 विश्व कप विजेता तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान ने उनके खेल में निखार लाने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, “मैं अमित सर का जितना भी शुक्रिया अदा करूं, कम है। उन्होंने प्रिंस को टेनिस टूर्नामेंट खेलते हुए देखा और उसे नजफगढ़ स्थित अपनी अकादमी से जुड़ने के लिए कहा। प्रदीप जी (सांगवान) भी अमित सर के शिष्य थे और उन्होंने प्रिंस को फिटनेस में मदद की।’’ एक समय ऐसा भी था जब प्रिंस अपनी पीठ पर रेत की बोरी बांधकर धान के खेतों में दौड़ते थे ताकि उनके शरीर का ऊपरी हिस्सा मजबूत बन जाए।

रामनिवास ने कहा, ‘‘प्रदीप ने उसका बहुत मार्गदर्शन किया और अमित सर ने उसके खेल में सुधार किया। मैं डीपीएल (दिल्ली प्रीमियर लीग) और नयी दिल्ली टीम को कैसे भूल सकता हूं। अगर डीपीएल नहीं होता, तो मुझे नहीं लगता कि मेरे बेटे की प्रगति इतनी तेज़ होती। इसलिए मैं डीडीसीए और विजय दहिया सर का भी आभारी हूं।’’

प्रिंस के कोच वशिष्ठ ने कहा,‘‘वह यॉर्कर गेंदें फेंक सकता था और टेनिस बॉल को भी अच्छी गति से स्विंग करा सकता था। जब मैंने उसे देखा तो मैंने उसके दोस्तों से कहा कि वे उसे मुझसे मिलने के लिए कहें। वह पहले से ही 18 साल का था और उसके पास अपनी काबिलियत साबित करने के लिए बहुत कम समय था।’’ वशिष्ठ को लगता है कि प्रिंस की कड़ी मेहनत करने की क्षमता ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘वह कड़ी मेहनत करने से पीछे नहीं हटा। वह दिल्ली की भीषण गर्मी में भी दो घंटे गेंदबाजी कर सकता है। प्रदीप के साथ काम करने से उसकी फिटनेस में सुधार हुआ है। वह जहीर खान और भरत अरुण से भी टिप्स ले चुका है। अब उसकी सफलता की कोई सीमा नहीं है।

Tue, 07 Apr 2026 17:17:33 +0530

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