चलती एम्बुलेंस में गूंजी किलकारी! ‘जाको राखे साइयां’ की मिसाल बनी धनी बाई, 108 स्टाफ ने बचाई दो जिंदगियां
Pali Ajab Gajab News: एक प्रेरणादायक घटना में प्रसव पीड़ा से जूझ रही धनी बाई को अस्पताल ले जाते समय चलती एम्बुलेंस में ही सुरक्षित डिलीवरी करानी पड़ी. समय की नाजुकता को समझते हुए 108 एम्बुलेंस स्टाफ ने तुरंत निर्णय लिया और पूरी सावधानी के साथ प्रसव प्रक्रिया को अंजाम दिया. उनकी तत्परता और अनुभव के चलते मां और नवजात दोनों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी. इस घटना को ‘जाको राखे साइयां’ की मिसाल बताया जा रहा है, जहां सही समय पर मिली मदद ने बड़ी अनहोनी को टाल दिया. यह घटना न केवल आपातकालीन सेवाओं की अहमियत को दर्शाती है, बल्कि 108 स्टाफ की समर्पण भावना और मानवता की मिसाल भी पेश करती है, जो संकट की घड़ी में किसी देवदूत से कम नहीं हैं.
Video: न मशीन, न सांचा! दादी-नानी की पोटली से निकला आइडिया! रंगीन धागों से खड़ा किया 70 लाख का बिजनेस
Kailash Pandey Thread Art Success Story: उत्तराखंड के नैनीताल के एक छोटे से गांव से निकले कैलाश पांडे कभी सीमित संसाधनों और कठिन पहाड़ी जिंदगी के बीच रास्ता तलाश रहे थे. आज वही धागों से बनी अनोखी Thread Art के जरिए नई पहचान गढ़ रहे हैं. बचपन में दादी-नानी द्वारा पुराने कपड़ों से बनाए गए खिलौनों से शुरू हुई यह कला, सस्ते चीनी खिलौनों के दौर में लगभग खो गई थी. लेकिन कैलाश ने हार नहीं मानी. लोहे की फैक्ट्री तक में काम किया, मगर मन हमेशा कला की ओर लौट आता. 20-25 साल की लगातार मेहनत के बाद उनकी कला आज गांव की ताकत बन चुकी है. उनके साथ 50-60 महिलाएं जुड़कर गार्डन स्टिक, डेकोरेशन और गिफ्ट आइटम तैयार कर रही हैं. दिल्ली के Karigar Bazaar से जुड़ने के बाद उन्हें बड़ा मंच मिला. अब तक 60-70 लाख रुपये की बिक्री हो चुकी है. सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान नहीं, फिर भी कैलाश मानते हैं कि सच्ची कला खुद अपना रास्ता बना लेती है.
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