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श्रमिकों के न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते में वृद्धि, नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू, मई में खाते में बढ़कर आएगी इतनी राशि

छत्तीसगढ के सरकारी और निजी क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों (अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल) के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ शासन के श्रमायुक्त हिम शिखर गुप्ता द्वारा न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के लिए नई परिवर्तनशील महंगाई भत्ता और न्यूनतम वेतन की दरें निर्धारित कर दी गई …

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होर्मुज को लेकर खाड़ी देशों का 'विकल्पों' पर जोर, बायपास करने की योजना में आई तेजी

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संघर्ष चरम पर है। वर्तमान हालात काबू से बाहर हैं, और होर्मुज चोक प्वाइंट को लेकर फिक्र बढ़ गई है। खाड़ी देश इससे काफी परेशान हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज के विकल्प को लेकर योजना तैयार है! दरअसल, यह ऐसा अहम रास्ता है जिससे होकर रोज करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है।

बढ़ते भूराजनीतिक जोखिम और हाल ही में जहाजों पर हुए हमलों ने पाइपलाइन और ओवरलैंड कॉरिडोर जैसे विकल्पों को लागू करने के लिए प्रेरित किया है।

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे देश पहले से ही मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके स्ट्रेट को थोड़ा बाईपास कर रहे हैं।

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन भी कहा जाता है, इस संकट के दौरान एक अहम संपत्ति के तौर पर उभरी है।

किंगडम के पूर्वी तेल फील्ड से लाल सागर पोर्ट यानबू तक लगभग 1,200 किलोमीटर तक फैली इस पाइपलाइन की क्षमता लगभग 7 मिलियन बैरल प्रति दिन है और यह निर्यात प्रवाह बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।

यूएई भी अपनी अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन का इस्तेमाल कर रहा है, जो ऑनशोर हबशान फील्ड को ओमान की खाड़ी में फुजैराह पोर्ट से जोड़ती है। हर दिन 1.8 मिलियन बैरल तक की कैपेसिटी वाली यह पाइपलाइन एक्सपोर्ट को होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने में मदद करती है, हालांकि अभी इसका इस्तेमाल अपनी अधिकतम क्षमता से कम है।

विश्लेषकों ने बताया कि ये पाइपलाइन जरूरी ऑप्शन तो हैं, लेकिन ये गल्फ ऑयल शिपमेंट में किसी भी बड़ी रुकावट को थोड़ा ही ठीक कर सकती हैं।

इसके जवाब में, दोनों देश अपनी एक्सपोर्ट फ्लेक्सिबिलिटी (निर्यात में थोड़ी नरमी) बढ़ाने के लिए एक्सपेंशन प्लान देख रहे हैं।

खबर है कि सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने या और रूट बनाने पर विचार कर रहा है, साथ ही अपने लाल सागर तट पर नए एक्सपोर्ट टर्मिनल डेवलप कर रहा है, जिसमें बड़ा नियोम प्रोजेक्ट भी शामिल है।

इस बीच, यूएई अपनी बायपास क्षमता को और मजबूत करने के लिए फुजैराह तक दूसरी पाइपलाइन बनाने की संभावना देख रहा है।

इन विकल्पों को मुश्किल क्रॉस-बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तुलना में ज्यादा सही माना जा रहा है।

देश भर में विस्तारीकरण के अलावा, खाड़ी देश लंबे समय तक चलने वाली मजबूती को बेहतर बनाने के मकसद से बड़े रीजनल पाइपलाइन नेटवर्क पर भी विचार कर रहे हैं।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि पूरे इलाके में आपस में जुड़े कॉरिडोर का एक नेटवर्क अलग-अलग रूट की तुलना में ज्यादा सुरक्षा दे सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्ट्री के जानकारों ने कहा कि मौजूदा संकट ने ऐसे प्रोजेक्ट्स के बारे में सोचने पर मजबूर किया है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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