Jharkhand News: झारखंड में ग्रामीण विकास को मिली नई रफ्तार, नाबार्ड का रिकॉर्ड प्रदर्शन
Jharkhand News: झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है. संस्थान का कुल कारोबार 5,703.74 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है.यह उपलब्धि नाबार्ड झारखंड की मुख्य महाप्रबंधक दीपमाला घोष के नेतृत्व में हासिल हुई है.
किसानों, स्वयं सहायता समूहों और बुनियादी ढांचे को मिला बड़ा सहारा
इस निवेश का सीधा फायदा राज्य के किसानों, स्वयं सहायता समूहों (SHG) और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को मिलेगा. नाबार्ड ने राज्य के ग्रामीण और सहकारी बैंकों को 3,316 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी है. इससे किसानों को कम ब्याज दर पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत आसानी से ऋण मिल सकेगा. साथ ही, स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों को भी सरल शर्तों पर लोन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें. ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. सड़क, पुल और सिंचाई जैसी जरूरी परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार को 2,400 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है. इससे गांवों में सुविधाएं बेहतर होंगी और लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा.
डिजिटल क्षेत्र में बड़ा योगदान
डिजिटल क्षेत्र में भी नाबार्ड ने बड़ा कदम उठाया है. “डिजिटल इंडिया” अभियान को आगे बढ़ाते हुए राज्य के 1,500 से अधिक लैम्प-पैक्स (LAMPS-PACS) का कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है, जो अब ई-पैक्स (E-PACS) के रूप में काम कर रहे हैं. ई-केसीसी (E-KCC) की सुविधा शुरू होने से फसल ऋण लेने की प्रक्रिया अब पहले से तेज और आसान हो गई है. आने वाले समय में बाकी बचे लगभग 4,500 लैम्प-पैक्स को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा.
प्राकृतिक खेती पर जोर
इसके अलावा, नाबार्ड ने प्राकृतिक खेती और जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया है. ‘जीवा’ (JIWA) कार्यक्रम के तहत जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे खेती की लागत कम हो रही है और मिट्टी की गुणवत्ता सुधर रही है.
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किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत बनाकर छोटे किसानों को बाजार से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. नाबार्ड की ये पहलें झारखंड में एक मजबूत, समावेशी और डिजिटल ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
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Vikat Sankashti Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी पर करें इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ, टल जाएगा बड़े-से-बड़ा संकट
Vikat Sankashti Chaturthi 2026: आज विकट संकष्टी चतुर्थी है. इस चतुर्थी को साल की 4 बड़ी चतुर्थी में से एक माना जाता है. शास्त्रों के मुताबिक, इस चतुर्थी का व्रत रखने से साल की सभी चतुर्थी का व्रत रखने का फल मिल जाता है. वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. भगवान गणेश की पूजा करने और उनके स्तोत्र का पाठ करने से उनकी दिव्य कृपा मिलती है. आज हम आपको गणेश जी के एक चमत्कारी स्तोत्र का पाठ बता रहे हैं. जिसका पाठ करने से जीवन में कभी धन की समस्या नहीं रहती है. साथ ही कर्ज उतारने में दिक्कत आ रही है तो आसानी से बड़े से बड़ा कर्ज उतर जाता है. इस स्तोत्र को ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र के नाम से जाना जाता है. आज वैशाख मास की विकट चतुर्थी से इस स्तोत्र का पाठ शुरु करें और रोजाना इसका पाठ करें तो अपार धन की प्राप्ति होगी. धन कभी कोई समस्या नहीं रहेगी. आइए जानते हैं क्या है पाठ
श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम्
विनयोग-
अस्य श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः अनुष्टुप्छन्दः श्रीऋणमोचक महागणपति र्देवता । मम ऋणमोचनमहागणपतिप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥
ऋष्यादिन्यास
भगवान शुक्राचार्य ऋषये नमः शिरसि, ऋण मोचन गणपति देवतायै नमः हृदि, मम ऋण मोचनार्थ जपे विनियोगाय नमः अंजलौ.
ध्यान मंत्र
रक्ताङ्गं रक्तवस्त्रं सितकुसुमगणैः पूजितं रक्तगन्धैः
क्षीराब्धौ रत्नपीठे सुरतरुविमले रत्नसिंहासनस्थम् ।
दोर्भिः पाशाङ्कुशेष्टाभयधरमतुलं चन्द्रमौलिं त्रिणेत्रं
ध्यायेत् शान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम् ॥
ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र
स्मरामि देव देवेशं वक्रतुण्डं महाबलम् ।
षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये ॥ १॥
महागणपतिं देवं महासत्वं महाबलम् ।
महाविघ्नहरं शम्भोः नमामि ऋणमुक्तये ॥ 2॥
एकाक्षरं ह्येकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम् ।
एकमेवाद्वितीयं च नमामि ऋणमुक्तये ॥ 3॥
शुक्लाम्बरं शुक्ल वर्णं, शुक्ल गंधानुलेपनम् ।
सर्व शुक्ल मयं देवं, नमामि ऋण मुक्तये ॥ 4॥
रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम् ।
रक्तपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 5॥
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम् ।
कृष्णसर्पोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये ॥ 6॥
पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम् ।
पीतपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 7॥
नीलांबरं नीलवर्णं, नील गंधानुलेपनम् ।
नील पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण मुक्तये ॥ 8॥
धूम्राम्बरं धूम्रवर्णं धूम्रगन्धानुलेपनम् ।
होम धूमप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 9॥
सर्वाम्बरं सर्ववर्णं, सर्व गंधानुलेपनम् ।
सर्व पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण मुक्तये ॥ 10॥
भद्र जातं च रुपं च, पाशांकुश धरं शुभम् ।
सर्व विघ्न हरं देवं, नमामि ऋण मुक्तये ॥11॥
।। इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे श्रीऋणमोचन महागणपति स्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।
फल श्रुति
यः पठेत् ऋण हरं स्तोत्रं, प्रातः काले सुधी नरः, षण्मासाभ्यनतरे चैव, ऋणच्छेदो भविष्यति
ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र का महत्व
भगवान गणेश की शास्त्र विधि से पूजा करने के बाद इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. इस स्तोत्र का पाठ करने से बड़े से बड़ा कर्ज से छुटकारा मिल जाता है. जीवन में कभी गरीबी नहीं रहती. जीवन में कभी धन की समस्या नहीं रहती है. जीवन में लगातार धन का आगमन बना रहता है. इस स्तोत्र का पाठ व्यापार स्थान की गद्दी पर बैठकर किया जाए तो व्यापार में सफलता प्राप्त होती है.
पाठ के बाद आरती अवश्य करें
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।। ..
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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