पहली बार होटल में पहुंचीं दादी, एक्सेस कार्ड देख समझ नहीं आया कैसे खुलेगा दरवाजा, पोती ने बताया तो खिल उठा चेहरा!
होटल में पहली बार एक्सेस कार्ड देखकर दादी हुईं कन्फ्यूज, पोती ने प्यार से समझाया कैसे खुलेगा कमरे का दरवाजा. दादी-पोती की मासूम बातचीत और प्यारा रिश्ता देखकर सोशल मीडिया यूजर्स को अपने दादा-दादी की याद आ गई.
‘गोहत्या नहीं कर सकता सच्चा मुसलमान’, बयान वायरल होने पर रामपुर SP ने दी सफाई
उत्तर प्रदेश के रामपुर के पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह सिसोदिया इन दिनों सुर्खियों में हैं. उन्होंने हाल में कह दिया था कि एक सच्चा मुसलमान न तो कभी गाय को मार सकता है और न ही दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकता है. उनके बयान ने विवाद खड़ा कर दिया. बयान वायरल होने पर उन्होंने सफाई दी. गुरुवार को पुलिस लाइंस में गो हत्या के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर हुई बैठक के बाद मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि सावन के महीने में गंज और स्वार पुलिस थाना क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं सामने आईं थीं.
इस बयान पर हुआ विवाद
रामपुर एसपी ने कैमरे पर कहा कि इस्लाम के अनुसार, किसी ऐसे जानवर का मांस खाना, जिससे किसी शख्श की धार्मिक भावनाएं आहत हों वह वर्जित है. एक सच्चा मुसलमान कभी भी ऐसा नहीं कर सकता है. जो लोग यह काम कर रहे हैं, वो या तो मुसलमान नहीं हैं या वे बहुत हरामी हैं. ऐसे हरामियों का इलाज करना ही मेरा काम है.
धर्मगुरुओं के साथ की बैठक
एसपी ने आगे कहा कि वह रामपुर में मुतवल्लियों और धर्मगुुरुओं के साथ बैठक करेंगे. उनसे अपील करेंगे कि वह ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाएं. अधिकारियों ने पिछले 10 वर्ष में कथित तौर पर गोहत्या के मामलों में शामिल लोगों के वेरिफिकेशन अभियान की घोषणा की. उन्होंने पुलिस थाने को ऐसे लोगों की फाइल तैयार करने के लिए कहा है, जिसमें जमानत की शर्तें और जमानत देने वालों की जानकारी शामिल हो.
विवाद होने पर दी सफाई…
सोशल पर वीडियो वायरल होने पर एसपी ने सफाई पेश की. उन्होंने कहा कि मैंने ये बात गोहत्या के बारे में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कही थी. सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि दारुल उलूम देवबंद ने वक्त-वक्त पर कहा है कि ऐसे जानवरों को मारना, जिससे दूसरे धर्म के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों, सही नहीं है और इसे 'हराम' बताया है."
मेरे बयान को गलत अर्थ में समझा गया- SP
एसपी ने कहा कि मैंने सामाजिक सौहार्दपूर्ण अपील करते हुए कहा था कि अगर किसी काम से दूसरे धर्मों की भावनाएं आहत होती है तो ऐसे कामों को करने से बचना चाहिए. मेरे बयान को गलत अर्थ में समझा गया. मेरे बयान का मकसद किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना बिल्कुल नहीं था.
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